32 जजों की वरियता पर जस्टिस खन्ना और माहेश्वरी को बनाया SC के जज

Nationaldunia

जयपुर।
कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुसार काम करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को 32 जजों की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए 2 जजों को प्रमोट कर​दिया।

इससे पहले न्यायविदों और कानूनविदों ने इसका विरोध करते हुए आपत्ति दर्ज करवाई थी, लेकिन राष्ट्रपति ने सभी आपत्तियां दरकिनार कर राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जज बना दिया।

राजस्थान से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले जस्टिस माहेश्वरी 9वें जज हैं, जबकि अकेले जोधपुर से 5वें जस्टिस हैं। उनसे पहले जस्टिस आरएम लोढ़ा सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रह चुके हैं।

कॉलेजियम की बात करें तो 1997 से लेकर अब तक 7 बार न्यायविदों और कानूनविदों की राय को दरकिनार किया गया है। हालांकि, बीते 14 माह में इस तरह के मामले ज्यादा सामने आए हैं।

कर्नाटक के जस्टिस एसए नजीर, बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रंजना पी देसाई, हिमाचल प्रदेश के लोकेश्वर पंत, इलाहबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जीपी माथुर, कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस रुमा पाल, उत्तराखंड़ के जत केएम जोसेफ को भी इसी तरह से प्रमोट किया गया था।

इस मामले को लेकर पूर्व सीजेआई जस्टिस आरएम लोढ़ा कहना है कि 12 जनवरी 2018 को चार जजों द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस काम नहीं आई है। उनका कहना है कि कॉलेजियम अगर निर्णय बदलता है तो इसका कारण भी बताना चाहिए।

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