गुर्जर आरक्षण से उत्पन्न पेचीदगियां संभालने में गहलोत सरकार नाकाम

जयपुर।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार को कहा है कि वह सचिवालय के तीन कनिष्ठ सहायक और एलडीसी की भर्ती 2018 में मोस्ट बैकवर्ड क्लास एमबीसी वर्ग में चयनित अभ्यर्थियों को उनके लिए 2019 में बनाए गए।

अतिरिक्त पदों पर नियुक्ति दें और अदर बैकवर्ड क्लास, मतलब ओबीसी के लिए आरक्षित पदों से समायोजित नहीं करें।

इसके साथ ही अदालत ने मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार सचिव और कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

इस मामले में तथ्यों के अनुसार राज्य के अधिकृत कर्मचारी सेवा भर्ती बोर्ड ने 16 अप्रैल 2018 में सचिवालय के लिए कनिष्ठ और एलडीसी सहायकों की भर्ती के लिए 11255 पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था।

1 मार्च 2019 को राज्य सरकार ने इन पदों की संख्या बढ़ाकर 12092 कर दी और 7 मार्च 2019 को पदों को भरने के लिए फैसला भी आयोजित किया गया।

इन पदों में टीएसपी और नॉन टीएसपी उम्मीदवार भी शामिल हैं।

यहां यह भी गौरतलब है कि 15 फरवरी 2019 को राज्य सरकार ने एमबीसी भर के लिए आरक्षण 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया था।

राज्य सरकार की नीति अनुसार 10 अक्टूबर 2019 को वांछित से डेढ़ गुना ज्यादा प्रत्याशियों को परीक्षा के दूसरे चरण के लिए चयनित किया गया था।

स्पष्टीकरण के लिए बता दें कि यह संख्या कुल संख्या 12456 उम्मीदवारों की होती है, परंतु 3 दिसंबर 2019 को राज्य सरकार द्वारा के लिए अतिरिक्त पद, जिनको छाया पद कहते हैं, बनाने की घोषणा की थी।

यानी एमबीसी वर्ग के लिए 4% अधिक 50 और जुड़ेंगे। इससे वांछनीय पदों की संख्या 12456 से बढ़कर 12906 हो गई थी।

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बहरहाल 31 जनवरी 1 फरवरी 2020 को राज्य सरकार द्वारा चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन भी कर लिया गया था।

राज्य सरकार ने तब सभी उम्मीदवारों को कहा था कि एमबीसी भर के लिए अलग से पदों का गठन हो चुका है, परंतु जब रिजल्ट घोषित करने की बारी आई तब केवल 12419 पदों के लिए घोषणा की गई थी।

हाईकोर्ट में अंकित धायल व अन्य द्वारा दायर याचिका के अनुसार राज्य सरकार ने 12906 पदों में से 487 पद के उम्मीदवारों में उम्मीदवारों को भी समायोजित कर दिया।

याचिकाकर्ताओं के वकील अनूप ढंढ ने कहा है कि चयन प्रक्रिया से प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ने एमबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को उनके लिए बनाई गई अतिरिक्त नहीं किया है।

जिससे कई उम्मीदवारों को ओबीसी वर्ग के तहत दिए गए आरक्षण का फायदा नहीं हुआ है और कई सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के साथ भी नाइंसाफी हुई है।

सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।