पायलट, सिद्धू को नहीं मिलेगा मनमुताबिक पद ,जाने क्यों??

राम गोपाल जाट

1.इस बार भी पायलट और सिद्धू कि मन की मुराद रहेगी अधुरी।

2.आलाकमान चाहकर भी नहीं दे पाऐंगे इनको मनचाहा पद

3.सिद्धू ,पायलट का राजनीतिक सघर्ष अभी लंबा चलेगा।

पॉलिटिक्स और क्रिकेट दोनों में टाइमिंग का खेल होता है मतलब टाइमिंग सही तो सब कुछ सही टाइमिंग खराब तो सब कुछ खराब लिहाजा इसको यू समझिए सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्धू के पास आकर्षण है, जनाधार है,लच्छेदार भाषण बाजी हैं ,कार्यकर्ता है समर्थकों का जनसैलाब है लेकिन टाइमिंग खराब है।

बीते दिनों दिल्ली में नवजोत सिंह सिद्धू से लंबे कयासों के बाद प्रियंका गांधी की मुलाकात ने कपिल और सिद्धू की सियासी वर्चस्व की लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है किस सिद्धू और पायलट के मसले पर कांग्रेसका केंद्रीय आलाकमान सकारात्मक समाधान करने के लिए प्रयासरत हैं और जल्द ही जुलाई के महीने में दोनों प्रदेशों में सियासी उठापटक थम जाएगी।

सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्धू दोनों के समर्थक चाहते हैं की पायलट की बहाली हो उन्हें या तो मुख्यमंत्री बनाया जाए या पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी वापस मिले। वही सिद्धू समर्थक चाहते हैं कि उनको डिप्टी सीएम या पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाए।

लेकिन सियासी जानकारों का मानना है मौजूदा हालातों में पायलट और सिद्धू को मनचाहा पद नहीं मिलने वाला है हालांकि उनके समर्थकों को सत्ता और संगठन में सह सम्मान बहाल किया जा सकता है।

अब सवाल खड़ा होता है कि आखिर पायलट और सिद्धू को मनचाहा पद देने में दिक्कत कहां आ रही है।

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आपको बता दें मध्यप्रदेश में कमलनाथ मुख्यमंत्री थे और पार्टी अध्यक्ष भी वही थे लंबे समय तक ज्योतिराज सिंधिया और कमलनाथ के गुट में मध्य प्रदेश कांग्रेस बट गई और लंबी बयानबाजी और खींचतान के बाद ज्योति राजे सिंधिया को पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होना पड़ा।

अगर राजस्थान की बात की जाए तो एक धड़ा सचिन पायलट का था तो दूसरा अशोक गहलोत सचिन पायलट जहां पार्टी अध्यक्ष थे तो वही अशोक गहलोत अपने जादूगरी से तीसरी बार फिर मुख्यमंत्री बने फिर दोनों के बीच लड़ाई हुई और बीते 1 साल में राजस्थान में जो सियासी वर्चस्व की लड़ाई को लेकर जो घटनाक्रम हुआ वह जगजाहिर है।

मतलब अगर किसी प्रोटोकॉल वाले पद पर पायलट या सिद्धू की वापसी होती है तो पार्टी में गुटबाजी जारी रहेगी और आलाकमान यह बिल्कुल नहीं चाहता अगर मान लिया जाए कि नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया जाए और कैप्टन अमरिंदर मुख्यमंत्री हैं थोड़े दिनों के लिए तो सिद्धू को अध्यक्ष बना कर खुश किया जा सकता है लेकिन वर्चस्व की लड़ाई भीतर तो जारी रहेगी और टिकट वितरण के दौरान खुलकर सामने आ सकती हैं क्योंकि अगले साल के शुरुआत में पंजाब में चुनाव होने हैं और आलाकमान किसी भी सूरत में पार्टी में गुटबाजी नहीं चाहता है और ना ही सिद्धू को खोना चाहता है।

वही 1 साल पहले सचिन पायलट कैंप बगावत करके पार्टी में अपनी वफादारी और अपने नंबर कम करवा चुका है इसलिए अशोक गहलोत का कद वफादारी के मामले में गांधी परिवार के सामने पायलट के मुकाबले ज्यादा मजबूत है यही वजह है कि पायलट को पार्टी खोना तो नहीं चाहती लेकिन जो पायलट चाहते हैं वह पार्टी और आलाकमान देना भी नहीं चाहते

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कुछ सियासी जानकारों का मानना है कि अभी बीते हफ्ते केजरीवाल पंजाब के दौरे पर थे उन्होंने मुफ्त बिजली मुफ्त पानी जैसे दिल्ली की तर्ज पर खैरात बांटने वाले वादे किए हैं इन दिनों पंजाब में बिजली का संकट गहराया हुआ है नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट करके कैप्टन की सरकार को बिजली कटौती के मामले पर घेरा है आपको बता दें राय ताराम हो अरविंद केजरीवाल ने अपने पंजाब दौरे के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू की तारीफों के पुल बांधे थे गौरतलब है कि सिद्धू कांग्रेस में आने से पहले आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चा थी ऐसे में अगर कांग्रेस में सिद्धू की बात नहीं बनी तो यह कोई बड़ी बात नहीं है कि वह चुनाव आते-आते आम आदमी पार्टी के खेमे में नजर आए।

क्रिकेटर से कमेंटेटर और फिर कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में जज के रूप में काम कर चुके नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीतिक सफर दो दशक से ज्यादा पुराना है वह लंबे समय तक बीजेपी में रहे कि आप की महत्वकांक्षी पूरी नहीं होने के कारण कांग्रेसमें आ गए अब कांग्रेस में भी उनकी दाल गलती नजर नहीं आ रही और ऐसे में वह अपने सियासी भविष्य के लिए बेहतर की तलाश में लगातार लगे हुए हैं।

यह और बात है बिजली कटौती के मामले में 15 सरकार को घेरने वाले नवजोत सिंह सिद्धू बीते 9 महीनों से खुद बिजली का बिल जमा नहीं करवा पाए हैं यह भी इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

फिलहाल तो सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक पद की मुराद तो पूरी होती हुई नजर नहीं आ रही लेकिन हां कार्यकर्ताओं को फायदा मिल सकता है ऐसे में अभी इन दोनों नेताओं का राजनीतिक संघर्ष और लंबा चलने वाला है।

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