वसुंधरा के बंगला नंबर-13 को लेकर राठौड़-लोढ़ा विधानसभा में भिड़े

जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को, जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सदन में नियम बदल कर सरकारी बंगला लोड किया हुआ है। उस मामले में राजस्थान विधानसभा में निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भिड़ गए।

विधानसभा में कांग्रेस के विधायक मुरारी लाल मीणा बोल रहे थे, तभी बीच में खड़े होकर निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भाजपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी वाड्रा का बंगला बीजेपी ने खाली करवा दिया, लेकिन बीजेपी के लोगों ने अशोक गहलोत सरकार के हाथ जोड़कर वसुंधरा राजे का बंगला नंबर 13 खाली नहीं होने दिया।

संयम लोढ़ा के द्वारा ऐसा बोलने पर उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ खड़े हो गए और दोनों के बीच खूब जोरदार तकरार हुई। इस दौरान सदन में सभापति राजेंद्र पारीक ने दोनों को समझाने का प्रयास किया लेकिन दोनों तरफ से एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए गए।

दरअसल वसुंधरा राजे जब 2008 में राजस्थान की सत्ता से बेदखल हो गई थीं, तो उनको नेता प्रतिपक्ष होने के नाते बंगला नंबर 13 अलवर किया गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में वसुंधरा राजे फिर से सत्ता में आईं, तब उन्होंने इसी बंगले को मुख्यमंत्री आवास के रूप में काम में लिया, लेकिन दिसंबर 2018 में फिर से सत्ता से बेदखल होने के बाद भी वसुंधरा राजे इसी बंगले में रह रही हैं।

आरोप लगाया जाता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दोनों मिले हुए हैं। इस मामले को लेकर कई बार नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी कहा है कि अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और ऐसे में एक बड़ा बंगला जो कि सीनियर मिनिस्टर या मुख्यमंत्री लेवल के किसी व्यक्ति को मिलना चाहिए, वह एकमात्र विधायक के रुप में वसुंधरा राजे को मिला हुआ है।

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वसुंधरा राजे के ऐसी बंगला नंबर 13 को लेकर निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के बीच तकरार हुई। हालांकि, इससे पहले 2013 से लेकर 2018 तक भाजपा की ही सांगानेर से विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भी वसुंधरा राजे बंगला नंबर 13 खाली करवाने के लिए एक अभियान चलाया था।

बाद में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सरकारी बंगला काम में लिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा एक महत्वपूर्ण फैसला दिया गया था, जो पूरे देशभर के लिए नजीर था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सरकारी बंगला नहीं दिया जा सकता है।

इसी प्रकरण को लेकर राजस्थान में भी राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें कोर्ट के द्वारा दिशा-निर्देश दिए गए कि पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला आलोट नहीं किया जा सकता है, लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के द्वारा पिछले बजट सत्र के दौरान ही इसके लिए सदन में नियम बदल दिया और कहा गया कि वरिष्ठ विधायक और दो बार की मुख्यमंत्री होने के नाते वसुंधरा राजे को बड़ा बंगला दे दिया।

उल्लेखनीय यह भी है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेटी और कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से दिल्ली के अति महत्वपूर्ण स्थान पर बरसों से अलॉट किए गए सरकारी बंगले को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा खाली करवा लिया गया था। इस प्रकरण को लेकर कांग्रेसजनों के द्वारा हंगामा खूब किया गया। किंतु नियमानुसार किसी ऐसे व्यक्ति को बंगला आलोट नहीं किया जा सकता है, जो किसी भी सदन का सदस्य ना हो।

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