26 महीनों बाद वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी की भाजपा में वापसी

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक और राजस्थान के पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी कि आज भारतीय जनता पार्टी में विधिवत वापसी हो गई है।

दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले खुद की पार्टी बनाकर स्वतंत्र चुनाव लड़ने वाले घनश्याम तिवारी ने लोकसभा चुनाव 2019 के पहले कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली थी।

घनश्याम तिवारी 2003 से लेकर 2008 की वसुंधरा राजे सरकार में शिक्षा एवं विधि मंत्री रहे थे, लेकिन बाद में उनके वसुंधरा राजे के साथ खटपट होने के कारण 2013 से लेकर 2018 की भाजपा सरकार में उनको मंत्री नहीं बनाया गया था।

घनश्याम तिवारी घनश्याम तिवारी सीकर से सांसद रह चुके हैं, इसके साथ ही उन्होंने चोमू से भी चुनाव लड़ा था। बाद में 2003 से लेकर 2018 तक लगातार तीन बार सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे।

तिवाड़ी ने 2018 में भारत वाहिनी पार्टी के नाम से खुद के दल का गठन किया था और लगातार वसुंधरा राजे की अपेक्षाओं के चलते उन्होंने दिसंबर 2018 के चुनाव से पहले भाजपा छोड़ दी थी।

माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया का अध्यक्ष बनने के बाद यह सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक है, क्योंकि घनश्याम तिवारी को वसुंधरा राजे का धुर विरोधी माना जाता है।

सर्वविदित है कि वसुंधरा राजे और डॉ सतीश पूनिया के बीच भी राजनीतिक खाई बहुत बड़ी है। ऐसे में तिवाड़ी की वापसी सतीश पूनिया को मजबूत करेगी और वसुंधरा राजे के लिए राजस्थान की राजनीति के द्वार बंद करेगी।

उल्लेखनीय है कि घनश्याम तिवाड़ी ने जब से भारतीय जनता पार्टी छोड़ी और कांग्रेस का दामन थामा, तब से वह राजनीतिक तौर पर काफी घुटन महसूस कर रहे थे। तिवाड़ी लगातार आरएसएस के पदाधिकारियों के संपर्क में रहकर पार्टी में वापसी के प्रयास कर रहे थे।

यह भी पढ़ें :  शाह को कमलनाथ का जवाब, जनता उम्र नहीं काम देख रही

घनश्याम तिवारी के भारतीय जनता पार्टी में वापस आने के बाद अब वसुंधरा राजे के विरोध में माने जाने वाला पूरा खेमा एकजुट हो गया है और कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इसमें बड़ी भूमिका है जो चाहता है कि वसुंधरा राजे राजस्थान की राजनीति से बाहर हो जाए।

किंतु इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया का घनश्याम तिवारी के भाजपा में वापस आने के वक्त उपस्थित नहीं होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि कटारिया जयपुर में मौजूद होने के बाद में पार्टी कार्यालय नहीं पहुंचे हैं।