गुमान में घूमते विधायकों की संगठन के सामने बच्चों की तरह लगी क्लास

-सामने खड़े होकर देना पड़ा जवाब, तो बताना पड़ा आखिर क्यों नहीं बैठ रहे हैं बागी उम्मीदवार?

जयपुर। राजधानी जयपुर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर और यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के गृह जिले कोटा के छह नगर निगम के चुनाव इस महीने की 29 तारीख को और अगले महीने की 1 तारीख को होने जा रहे हैं।

इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा संगठन को तवज्जो देते हुए विधायकों और यहां तक कि सांसद की भूमिका को भी सीमित करने का काम किया है और कार्यकर्ताओं में यह संदेश देने का काम किया है कि संगठन सर्वोपरि है और कोई भी कार्यकर्ता जो मेहनत करता है और इमानदारी से लगन से आगे बढ़ने का प्रयास करता है, उसको संगठन में महत्व दिया जाता है, टिकट भी दिया जाता है।

संगठन के द्वारा अपने असली ताकत दिखाने के चलते विधायकों के कार्यकर्ताओं के टिकट कटने के कारण बगावत भी बड़े पैमाने पर हुई है। तीनों जिलों के 6 निगमों की सभी सीटों पर मिलाकर भाजपा के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं ने बगावत कर निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है।

भाजपा के द्वारा सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, जिला अध्यक्ष, पूर्व जिला अध्यक्ष को बगावत करने वाले कार्यकर्ताओं को समझा इसके लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके साथ ही प्रदेश नेतृत्व और संगठन महामंत्री के द्वारा भी अपने स्तर पर विधायकों से फीडबैक लेकर उनसे संबंधित बगावत करने वाले उम्मीदवारों को मनाने पर फोकस किया जा रहा है।

जयपुर में विधानसभा क्षेत्र सांगानेर, मालवीय नगर, झोटवाड़ा, आदर्श नगर जैसी जगह पर बड़े पैमाने पर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बगावत कर पर्चा दाखिल करने के कारण स्थानीय विधायक संगठन के निशाने पर आ गए हैं।

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प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर के अलावा जयपुर के प्रभारी की एक संयुक्त बैठक में जयपुर के भाजपा विधायकों की क्लास लगी।

सूत्रों के मुताबिक सांगानेर के विधायक अशोक लाहोटी और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ के गणेश के कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी के खिलाफ बगावत कर पर्चा दाखिल करने को लेकर इन विधायकों से प्रदेश नेतृत्व के द्वारा सवाल किए गए और अपने लोगों को नाम वापस लेने के लिए मनाने हेतु प्रयास पर बात की गई तो बगले झांकने लगे।

बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री के द्वारा जब इन विधायकों से क्रॉस क्वेश्चन किए गए तो जवाब देते नहीं बना।

जानकारी में आया है कि प्रदेश नेतृत्व और संगठन महामंत्री के द्वारा इन विधायकों को एक तरह से टारगेट देकर इन से संबंधित सभी कार्यकर्ताओं को मनाने और उनके नाम वापस लेने के लिए लक्ष्य दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि बैठक के वक्त दोनों विधायकों का व्यवहार बिल्कुल ऐसा था जैसे पांचवी कक्षा के बच्चे को कक्षा में खड़ा करके सवाल किया जाता है और उसे जवाब देते नहीं बनता है।

हालांकि, पहले ही अपने खास कार्यकर्ताओं को तमाम प्रयास के बाद भी टिकट नहीं दिलाने के कारण इन विधायकों का कार्यकर्ताओं को जवाब देना मुश्किल हो रहा है, जिसके ऊपर पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा पैसे लेकर टिकट दिलाने के झांसे देने के आरोप से भी दोनों विधायक काफी परेशान हैं।

ऐसे में एक और जहां दोनों विधायक संगठन के निशाने पर हैं, तो दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं के निशाने पर भी हैं।

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