जयपुर।

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार द्वारा राजस्थान के किसानों का करीब 18000 करोड़ का कर्ज माफ करने का दावा करने के बावजूद अन्नदाता के द्वारा आत्महत्या करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

राजस्थान में बीते 2 दिन के दौरान राजस्थान की अजमेर और हनुमानगढ़ में 2 किसानों ने मौत को गले लगा लिया।

प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार हनुमानगढ़ कलेक्ट्रेट परिसर के पार्क में यहां के एक किसान सुरजाराम सिहाग ने की पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक किसान रावतसर के कीकरालिया गांव का रहने वाला था।

इससे पहले रविवार को अजमेर के तालेड़ा गांव के 40 वर्षीय दिव्यांग किसान लादूसिंह बैंक के अधिकारियों द्वारा 6 लाख रुपये का नोटिस थमाया जाने के बाद सदमे में आकर विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी थी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में दिसंबर माह में सरकार बदलने के बाद से लेकर अब तक 18 किसानों ने सुसाइड किया है।

हालांकि अधिकांश में पुलिस ने किसानों की आत्महत्या का कारण कर्ज का बोझ नहीं बता कर दूसरे कारण बताए गए हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि इससे पूर्वर्ती सरकार, जो कि भाजपा की वसुंधरा राजे की सरकार थी, उसके कार्यकाल में करीब 80 किसानों ने आत्महत्या की थी।

पुलिस के आंकड़ों में केवल 8 किसानों को कर्ज के बोझ तले दब ने के कारण सुसाइड करना बताया था। तब कांग्रेस पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए 100 से ज्यादा किसानों के आत्महत्या करने का दावा किया गया था।

लेकिन जैसे ही सरकार में आई तो अशोक गहलोत सरकार ने बीते 5 बरस में केवल 8 किसानों के द्वारा आत्महत्या करने की बात कही गई। अब इसी तरह के आरोप भारतीय जनता पार्टी लगा रही है।

जबकि पिछले साल ही वसुंधरा राजे सरकार ने राजस्थान में किसानों का 7174 करोड़ रुपए का कर्जा माफ किया था, जिसमें सहकारी बैंकों का ₹50000 तक का कर्ज़ था।

अशोक गहलोत सरकार ने किसानों का ₹200000 तक का कर्ज माफ करने की बात कही, लेकिन जिस तरह से किसानों के द्वारा आत्महत्या की जा रही है, उससे साफ है कि यह कर्जमाफी नाकाफी साबित हुई है।