जयपुर।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले भाजपा जहां पूरे विश्वास के साथ सरकार बनाने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस में मुख्यमंत्री की दावेदारी ने हालात खराब कर दी है।

कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के बीच शुरू हुई सीएम की दावेदारी ने सियासत को जंग में तब्दील कर दिया है।

गहलोत, पायलट और डूडी की लड़ाई के बीच कांग्रेस में धड़ेबंदी हो गई है। पार्टी के कई दावेदार नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।

अशोक गहलोत दो बार के मुख्यमंत्री रहने के कारण बड़े नेता जरूर हैं, लेकिन जिस तरह से 1998 में परसराम मदेरणा को पछाड़कर गहलोत ने सीएम की सीट पर कब्जा किया था, ठीक वैसे ही सचिन पायलट या अन्य कोई बाजी मार सकता है।

असल मुद्दा यह है कि राजस्थान में सत्तासीन होने पर कांग्रेस में एक मुख्यमंत्री के साथ जाट और राजपूत के रूप में दो उप मुख्यमंत्री बनाये जा सकते हैं। यह कॉम्बिनेशन गहलोत, पायलट और डूडी के साथ हो सकता है।

यही मॉडल निर्दलीय विधायकों को साथ लेने पर किया जा सकता है। हनुमान बेनीवाल को 5 से 10 तक सीट जीत रहे हैं। इस स्थिति में बीजेपी को ही फायदा मिलेगा।