Jaipur

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की गलतियों का खामियाजा राजस्थान और राजस्थान आने वाली दूसरे राज्यों की जनता भुगत रही है।

राज्य के राजधानी से निकलने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली के नियमों में भारी अनियमितता होने के कारण राहगीरों से डेढ़ गुना तक टोल वसूला जा रहा है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर से होकर जयपुर-अजमेर, जयपुर-आगरा, जयपुर-सीकर, जयपुर-कोटा और जयपुर-दिल्ली राजमार्ग गुजरते हैं।

इनमें से जयपुर-सीकर, जयपुर-दिल्ली, जयपुर-कोटा और जयपुर-भीलवाड़ा मार्ग पर टोल वसूलने के नियम अलग हैं, जबकि जयपुर-अजमेर और जयपुर-आगरा के राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल वसूली दूसरे नियमों से होती है।

इसके चलते राहगीरों को डेढ़ गुना तक टोल टैक्स चुकाना पड़ता है। जयपुर अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग 24 घंटे में नहीं मिलने के कारण यात्रियों को आने जाने के टोल के रूप में ₹90 की जगह ₹120 देने पड़ रहे हैं।

जबकि इसी तरह से जयपुर आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी डेढ़ गुना तक टोल टैक्स चुकाना पड़ रहा है। 24 घंटे में रिटर्न कॉल की सुविधा राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में हैं, लेकिन इन दो राजमार्गों पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा कंपनियों के साथ किए गए करार में पुराने नियम लगाने के चलते रिटर्न टोल का फार्मूला लागू नहीं किया गया।

उदाहरण के तौर पर जयपुर से सीकर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक तरफ काटोल सा डर लगता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति 24 घंटे में वापस आने के कारण रिटर्न टो लेता है तो उसको ₹95 देने पड़ते हैं।

जबकि जयपुर-अजमेर और जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर रिटर्न कॉल की सुविधा नहीं होने के कारण यात्रियों को ₹95 की जगह ₹120 चुकाने पड़ते हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राजस्थान सीजेएम एमके जैन का कहना है कि इन दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियम पहले बने थे,, जबकि टोल के नियम बाद में आए हैं इसलिए इन राजमार्गों पर प्राइवेट कंपनियों के साथ पुराना एमओयू किया हुआ है और वही एमओयू अंत तक लागू रहेगा।

अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा की गई गलतियों के कारण यात्रियों को भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। राज्य सरकार भी इस मामले में मौन साधे बैठी है।