parliament election 2019
parliament election 2019 (rajasthan)

Jaipur news.
राजस्थान से प्रकाशित एक ‘हिंदी दैनिक अखबार’ ने दावा किया है कि राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से 8 पर सिर्फ जाट समाज के प्रत्याशी ही जीत सकते हैं। अखबार ने संसदीय इतिहास का हवाला देते हुए खबर प्रकाशित की है। बता दें कि यह अखबार जातियों को टारेगेट करते हुए लगातार खबरें प्रकाशित करने की पत्रकारिता करने के लिए मशहूर है।

अपने मुख्य पृष्ठ पर खबर प्रकाशित करते हुए अखबार ने यह भी दावा किया है कि प्रदेश की तीन सीटों पर सिर्फ राजपूत जीत सकते हैं। अपनी रिपोर्ट में अखबार ने लिखा है कि जयपुर शहर से ब्राह्मण, सीकर से जाट, झुंझुनूं से जाट, चूरू से जाट, नागौर से जाट जाति से खड़ा होने वाला उम्मीदवार ही चुनाव जीत सकते हैं।

इसके अलावा अखबार के हवाले से जैसलमेर—बाड़मेर में भी जाट समाज का दावा किया गया है। पाली से जैन, जोधपुर से राजपूत, अलवर से यादव, राजसंमद से राजपूत, सवाई माधोपुर से से मीणा या गुर्जर और जयपुर ग्रामीण से जाट या राजपूत ही चुनाव जीत सकते हैं।

यह पहला मौका नहीं है कि इस अखबार ने जातियों के आधारा पर जीत हासिल करने की रिपोर्ट प्रकाशित की है, बल्कि हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यह हिंदी अखबार जाति के आधार पर उम्मीदवारों की जीत हार का दावा करता रहा है।

अखबार ने आकंड़ा दिया है कि जयपुर शहर से 1991 से लेकर अब तक सिर्फ ब्राह्मण उम्मीदवार ही जीत पाया है। साथ ही सीकर सीट पर वर्ष 1991 से लेकर 2014 तक यही दावा करते हुए जाट उम्मीदवार के जीतने की भविष्यवाणी की है।

अखबार लिखता है कि झुंझुनूं संसदीय सीट पर 1996 से लेकर अब तक सिर्फ जाट समाज के प्रत्याशी का कब्जा रहा है, तो चूरू में भी 1991 से लेकर अब तक केवल जाट उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं।

इसी तरह से जैसलमेर—बाड़मेर की रिपोर्ट करते हुए अखबार ने दावा किया है कि 1991 से लेकर अब तक सिर्फ जाट या राजपूत उम्मीदवार ही जीते हैं, इसलिए यहां से भी सिर्फ यही दोनों जातियां जीत सकती हैं।

अखबार ने आगे लिखा है कि पाली सीट से पिछले 7 लोकसभा चुनाव में से 5 बार जैन समाज का प्रत्याशी जीता है। इसी आधार पर दावा किया गया है कि इस जाति का यहां पर वर्चस्व रहा है, जबकि पिछले ही चुनाव में कल्बी जाति के पीपी चौधरी सांसद बने थे।

जोधपुर पर फोकस करते हुए अखबार ने लिखा है कि यहां से 7 लोकसभा चुनाव में से 3 बार माली, यानी अशोक गहलोत, 2 बार विश्नोई, 2 बार राजपूत जीते हैं, जबकि यह सीट 2009 और 2014 के चुनाव में राजपूत समाज के उम्मीदवारों ने जीती है।

हालांकि, अपनी पुरानी सभी रिपोर्ट्स की भांति यहां पर भी अखबार ने बाकि सीटों को इतिहास लिखने में कंजूसी की है। अखबार की विधानसभा चुनाव से पहले की एक ‘प्री पोल रिपोर्ट’ के बाद पत्रकारिता जगत में काफी किरकिरी हो चुकी है।

जिस तरह अखबार ने 25 संसदीय सीटों में से केवल 10 के आंकड़े दिए हैं, उससे एक बार फिर जाहिर हो गया है कि यह अखबार अपनी रिपोर्ट्स के आधार पर समाज में जहर घोलने का काम अनवरत रूप से बखूबी कर रहा है। बहरहाल, पाठकों द्वारा इस अखबार की विश्वसनीयता भी इसी आधार पर आंकी जाती रही है।

अधिक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.nationaldunia.com पर विजिट करें। Facebook,Twitter पे फॉलो करें।