#MainbhiChowkidar mission in 2019
#MainbhiChowkidar mission in 2019

नई दिल्ली।

देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से स्टूडेंट्स के द्वारा कभी “हर घर से अफजल निकलेगा” के नारे सुनाई देते थे, लेकिन आज की तारीख में लोकसभा चुनाव से पहले “मैं भी चौकीदार हूं” बड़ी तादात में देश का युवा अपने हाथ पर गुदवाने के जुनून में शामिल हो रहा है।

देश के युवाओं के मन में आए इस बड़े विचार और बदलाव के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा पिछले 5 साल में किए गए कार्यों की झलक दिखाई देती है, तो साथ ही विपक्ष में नेतृत्वहीन नेताओं की निराशा भी है।

26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में 80 किलोमीटर अंदर घुसकर भारतीय वायु सेना के द्वारा की गई एयर स्ट्राइक (Air strike) के बाद तो जैसे मोदी के लिए एक बार फिर से 2014 से भी बड़ी लहर देशभर में चल चुकी है।

देश की सबसे बड़ी पंचायत, यानी संजय द्वारा किए गए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को जब फांसी पर चढ़ाया गया, तो उसके बाद देश में चरमपंथियों और वामपंथियों के द्वारा इसकी घोर निंदा की गई।

यहां तक की कांग्रेस, वामपंथी समेत कई दलों के नेताओं, बॉलीवुड की जानी-मानी हस्तियों, कलाकारों, लेखकों ने मिलकर एक अभियान चलाया और सुप्रीम कोर्ट का रात को दरवाजा तक खुलवाया, लेकिन आतंकी को फांसी हुई।

उसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में “तुम कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा….” जैसे नारे सुनाई दिए। एक आतंकी, जिनको देश की शीर्ष अदालत ने फांसी की सज़ा दी थी।

हालांकि, उस मामले में कई स्टूडेंट्स को मुकदमों का सामना करना पड़ा और आज भी उनके खिलाफ कोर्ट में सुनवाई चल रही है। किन्तु इन 5 वर्षों में आए बड़े बदलाव के पीछे यदि किसी का हाथ है तो वह केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली सरकार का है।

जिसने न केवल आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए, बल्कि देश की सुरक्षा से भी कभी समझौता नहीं किया। पहली बार भारत की सेना ने एक दफा म्यांमार और दो मर्तबा पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक की, जिसके कारण पूरा विश्व समुदाय भारत की शक्ति से रूबरू हो सका।

भारतीय सेनाओं के अधिकारियों के मुताबिक केंद्र की सरकार ने ऐसी आजादी सुरक्षाबलों को पहली बार दी है, जिसमें दुश्मन को मर्जी से मुंह तोड़ जवाब दिया जा सकता है।

गौरतलब यह भी है कि साल 2014 में बीजेपी ने मोदी को प्रधानमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट कर “अच्छे दिन आने वाले हैं…” का अभियान चलाया था। जिसके बाद पहली बार केंद्र में बीजेपी की बहुमत वाली सरकार बनी।

अब पिछले 5 साल के द्वारा केंद्र में बीजेपी वाले नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यों के दम पर एक बार फिर से बीजेपी ने “मैं भी चौकीदार हूं….” का नारा देते हुए एक बार फिर से मोदी सरकार का आह्वान किया है।

2014 में देश भ्रष्टाचार की दीमक से त्रस्त था और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी में पूरे देश को भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाले एक नेता की छवि दिखाई दी थी, जिसके कारण बीजेपी को पहली बार 282 सीटों पर जीत हासिल हुई।

अब 5 साल में उन्हीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में किए गए विकास कार्यों के दम पर और सुशासन के नारे के साथ बीजेपी फिर से बहुमत के लिए मैदान में उतर चुकी है। मोदी को ईमानदार और विकास पुरुष के रूप में दिखाया जा रहा है, लेकिन देश का भविष्य क्या होगा? इस बात का फैसला देश की जनता करेगी।

मोदी के सामने विपक्ष बुरी तरह से अलग-थलग बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। 1 साल पहले शुरू की गई महागठबंधन की शुरुआत लगभग दम तोड़ चुकी है। सभी पार्टियां लगभग अपने-अपने स्तर पर लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरी है। ऐसे में बीजेपी को फायदा होना सुनिश्चित है।

देखने वाली बात यह होगी कि क्या 23 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम में भाजपा एक बार फिर से बहुमत हासिल कर पाएगी, या यह नारा 2014 के मुकाबले फ्लॉप साबित हो जाएगा?