मृतक नेमीचंद के पिता निरानाराम का घर
मृतक नेमीचंद के पिता निरानाराम का घर

Churu

चूरू जिले की सरदार तहसील के सरदारशहर तहसील के सोनपालसर गांव जुलाई महीने की शुरुआत में एक युवक नेमीचंद की चोरी करने के आरोप में पकड़ने के बर्फ पुलिस हिरासत में मारपीट करने के कारण मौत हो गई थी।

और उसकी भाभी के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया था, उस मामले में पीड़ित परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला है, लेकिन राजनीति करने वाले लोगों ने इसमें भी अपनी सियासी रोटियां सेंकना शुरू कर दिया है।

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इस घटना के को लेकर “नेशनल दुनिया” की टीम ने जयपुर से सीकर, सीकर से चूरू, चूरू से सरदारशहर और सरदारशहर से 52 किलोमीटर आगे सोनपालसर गांव तक, कुल 660 किलोमीटर की यात्रा करके पूरे घटनाक्रम को जानने का प्रयास किया।

हमनें (नेशनल दुनिया) अपनी पहली रिपोर्ट में बताया कि पीड़ित परिवार की हालत क्या है। मृतक नेमीचंद के परिजनों द्वारा घटना को लेकर जो जानकारी दी गई है, वह भी हमने अपनी पहली रिपोर्ट में पब्लिश कर दिया है।

अब आज हम आपको इस घटना की दूसरी रिपोर्ट, यानी दूसरा पहलू दिखाने जा रहे हैं, जिसमें किस तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़े हो रहे लोग राजनीति कर रहे हैं और इस प्रकरण को लेकर सोनपालसर में अब जातीय विद्वेष फैलाने का काम किया जा रहा है।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक भले ही नेमीचंद को पुलिस ने हिरासत में रखकर मारपीट की हो, लेकिन हकीकत यह है कि वह गांव में चोरी करने के लिए कुख्यात था।

जिस दिन पुलिस ने उसको धीरासर गांव से पकड़ा था, उस दिन भी उसने चोरी की थी और गांववालों ने उसको पकड़ कर जोरदार पिटाई कर दी थी।

उसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने 30 जून 2019 को शाम करीब 5:00 बजे पकड़ कर थाने ले गए, जहां पर पुलिस के द्वारा उसके द्वारा की गई। चोरियों के राज खुलवाने के लिए मारपीट किए जाने का मामला सामने आया।

जानकारी में यह आया है कि पुलिस ने लगातार उसके साथ 4 दिन तक मारपीट की और उसके बाद वह मर गया तो रात को 2 बजे उसका चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया गया।

उसके मरने से 1 दिन पहले उसके द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर सरदार शहर पुलिस के थाना अधिकारी रणवीर सिंह और उनके अधीनस्थ पुलिसकर्मियों ने मृतक नेमीचंद की भाभी को भी गांव से उठा लिया था।

थाने में लाकर नेमीचंद की भाभी के साथ मारपीट की गई और जिस तरह की बातें पीड़ित परिवार बता रहा है, उसके मुताबिक नेमीचंद की भाभी के साथ पुलिस ने रेप किया था।

इस दौरान उसके साथ भी मारपीट की गई और उसके हाथों और पैरों के नाखून निकाल दिए गए। बेहोशी की हालत में नेमीचंद की मौत के बाद उसकी भाभी को दूसरे दिन पुलिस द्वारा घर छोड़ दिया गया।

पुलिस की थाने में पिटाई के कारण उसकी हालत बिगड़ने पर घर वालों ने पहले उसको चूरु अस्पताल पहुंचाया और उसके बाद जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया।

यह सारी बात पीड़ित परिवार और उसके साथ संवेदनाएं रखने वाले लोगों के द्वारा बताई गई है। अब हम आपको इस घटना का वह चेहरा दिखाने जा रहे हैं, जिससे लोग वाकिफ नहीं है।

सूत्रों का दावा है कि सरदारशहर थाने में नेमीचंद के साथ जरूर मारपीट की गई थी, लेकिन उसकी भाभी के साथ जिस तरह दिखाया जा रहा है, उस तरह न तो पुलिस के द्वारा शारीरिक शोषण किया गया और न ही इतनी पिटाई की गई कि वह बेहोशी की हालत में एसएमएस अस्पताल भर्ती करवाई जाए।

बताया जाता है कि जिस धीरासर गांव में कालूराम चौधरी के घर पर मृतक नेमीचंद ने चोरी की थी, उसके वह 6 महीने पहले भी भेड़ चराने के लिए नौकरी किया करता था।

6 माह पहले नेमीचंद ने चोरी-छिपे कालूराम की एक बकरी चुरा कर बेच दी, जिसके बाद कालूराम ने नेमीचंद को नौकरी से निकाल दिया।

जून महीने में गर्मी के कारण कालू लाल की भेड़ बकरियां चराने वाला नौकर गांव चला गया, जिस पर कालू लाल ने नेमीचंद को फिर से भेड़ बकरी चराने के लिए नौकरी पर बुलाया, लेकिन वह नहीं गया।

इस दौरान 30 जून को सामने आया कि नेमीचंद ने धीरासर में कालू लाल चौधरी के घर पर 5 लाख रुपए की चोरी की, जिसमें 3 लाख रुपए नगद और ₹200000 के गहने चोरी हुए थे।

इस दौरान कालू लाल के घर पर नेमीचंद को पकड़ लिया गया। गांव के ही कुछ लोगों का दावा है कि रुपए चुराने का मामला 30 जून से पहले का है, लेकिन उसको 30 जून को गांव में बुलाकर पकड़ा गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस के जिन अधिकारियों पर इस सारी घटना के आरोप लगे हैं और उन को निलंबित किया गया है, उनके मुताबिक उनकी शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि नेमीचंद चोरी करता था और चोरी का सारा माल अपनी भाभी जिनके साथ में रहता था, उसको दे दिया करता था।

कालू लाल के घर पर जो भी 500000 रुपए की चोरी हुई थी, उसमें से ₹200000 के गहने थे, उन गहनों को सरदारशहर के स्थानीय एक सर्राफा कारोबारी को बेचने के लिए देवर भाभी दोनों गए थे।

उन्होंने सराफा कारोबारी को गहने बेचने का प्रयास किया, लेकिन प्रयास सफल नहीं रहा। इसी आधार पर पड़ताल करते हुए पुलिस संबंधित सर्राफा कारोबारी के पास पहुंची तो उसने बताया कि नेमीचंद और उसकी भाभी उनके पास आए जरूर थे।

लेकिन गहने लेकर नहीं आए थे और केवल यह पूछने आए थे कि उनके गहने तोड़कर नई स्टाइल में गहने बना दिए जाएंगे। इसके बाद पुलिस ने नेमीचंद और उसकी भाभी को पकड़ा था।

नेमीचंद के साथ मारपीट करने के बाद भी उसने कोई बात नहीं बताई 3 जुलाई को नेमीचंद ने बताया कि वह चोरी का सारा माल अपनी भाभी को दे चुका है।

इसके बाद उसी दिन पुलिस ने नेमीचंद की भाभी को गांव से पकड़ लिया रात को उसके साथ भी मारपीट की गई, लेकिन उसने कोई राज नहीं मिला।

इस दौरान पीड़ित परिवार के अनुसार जो बात सामने आई है, वह यह है कि 4 जुलाई की रात को नेमीचंद की भाभी के साथ थानाधिकारी रणवीर सिंह समेत छह पुलिसकर्मियों ने गैंग रेप किया और उसके हाथ और पैरों के नाखून निकाल दिया।

नेमीचंद की भाभी के साथ की गई प्रताड़ना के निशान उसके पैरों और हाथों से निकाले गए नाखूनों से साफ देखी जा सकती है इसके साथ ही उसके पैरों पर जगह-जगह चोट भी लगी हुई है।

यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि नेमीचंद की भाभी के साथ मारपीट की गई थी, लेकिन एसएमएस अस्पताल में करवाए गए मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि उसके साथ गैंगरेप नहीं किया गया था। जबकि पीड़ित परिवार के लोगों का कहना है कि उसके साथ थाने में थाना अधिकारियों द्वारा गैंगरेप किया गया।

एक और पहलू है जो सामने आया है, बताया जाता है कि कालूराम के रिश्तेदार सरपंच हैं। जिस गांव में पीड़ित परिवार रहता है वह उसी पंचायत का हिस्सा है।

रंगियासर गांव के सरपंच लाल चंद मुंड, जो कालूराम के रिश्तेदार हैं। वह खुद सरपंच का काम करता है, लेकिन चुनी हुई सरपंच उनकी पत्नी संतोष चौधरी हैं।

लालचंद मोड खुद डेयरी के चेयरमैन है और इसी के चलते पुलिस के साथ उनकी अच्छी खासी उठ बैठ है।

एक और बात सामने आई है कि लाल चंद मुंड के राजनीतिक करियर को खत्म करने के लिए स्थानीय कुछ नेताओं के द्वारा इस साजिश को अंजाम दिया गया।

हालांकि जब तक पुलिस ने नेमीचंद को पकड़ा और उसकी भाभी को पकड़ा, तब तक उनकी नजर नहीं थी, लेकिन जैसे ही नेमीचंद की मौत हुई और उसकी भाभी के नाखून काटे गए उसके बाद लालचंद मोड के विरोधियों के द्वारा यह सारी कहानी रची गई।

साजिश के तहत नेमीचंद की भाभी को गैंगरेप का शिकार बताकर जयपुर एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था कि मामला पूरा मीडिया की नजर में आ जाए और सरकार को एक्शन लेना पड़े।

लेकिन स्थानीय विधायक भंवरलाल शर्मा के द्वारा विधानसभा में कहा गया कि महिला के साथ गैंगरेप नहीं किया गया है, विधायक शर्मा ने यह भी कहा था कि महिला के नाखून नहीं निकाले गए हैं, बल्कि उसकी बनावट ही वैसी ही है।

हालांकि यह बात झूठ पाई गई। पीड़ित महिला के नाखून पुलिस के द्वारा निकाले गए थे, इस बात की पड़ताल नेशनल दुनिया की टीम ने भी की, तो सामने आया उसके नाखून निकाले गए हैं।

एक और बात है जो अभी तक भी जनता से छिपी हुई है। सोनपालसर में जहां पर मृतक नेमीचंद रहता था उस गांव में 21 जातियां निवास करती है।

सबसे बड़ी जाति के तौर पर ब्राह्मण है, दूसरे नंबर पर जाट, तीसरे पर राजपूत, चौथे पर मेघवाल और इस तरह मृतक नेमीचंद जोकि नायक जाति का है, उसके भी कुछ परिवारों रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पर ब्राह्मण, जाट और राजपूतों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चलती रहती है। इसी का परिणाम है कि नायक जाति के परिवार के साथ पुलिस की इस प्रताड़ना के मौके को तलाशते हुए यहां के कुछ स्थानीय राजपूत समाज के लोगों द्वारा मामले को तूल दिया जा रहा है, ताकि जाट समाज के स्थानीय सरपंच लालचंद मोड को राजनीतिक तौर पर बदनाम किया जा सके।

इसी साजिश को अंजाम देने के लिए उन्होंने कुछ उभरते हुए स्थानीय नेताओं का सहारा लिया, जो कि जाट समाज सभी है और ब्राह्मण समाज से भी ईर्ष्या रखते हैं।

इनमें से ही कुछ नेताओं के द्वारा जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह दावा किया गया कि मृतक नेमीचंद की भाभी के साथ थाने में दुष्कर्म किया गया था और उसके साथ पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म किया था।

जबकि मेडिकल रिपोर्ट में पहले ही साफ हो चुका है कि महिला के साथ बलात्कार नहीं हुआ है। इसी प्रकरण को और तूल देने के लिए कुछ छुटभैये नेताओं के द्वारा 1 अगस्त को जातीय आधार बनाकर राजस्थान बंद का आह्वान भी किया गया है।

इस आह्वान के पीछे उनकी खुद की राजनीतिक मंशा तो है ही है, साथ ही साथ वह लोग 2 अप्रैल 2018 की तरह प्रदेश में एक बार फिर से दलित कार्ड खेलने का काम करने की फिराक में है।

फिलहाल उनको समर्थन नहीं मिल रहा है, लेकिन यह लोग कुछ उभरते हुए नेताओं के साथ मिलकर पैसे के दम पर दलित समुदाय को एकजुट कर 1 अगस्त को राजस्थान बंद करने का षड्यंत्र रच रहे हैं।

मामले की जांच सीआईडी सीबी कर रही है और अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। महिला का सवाई मानसिंह अस्पताल में उपचार हो चुका है।