हड़ताली कर्मचारियों को झटका: no work, no pay

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जयपुर।
पिछले 23 दिन से हड़ताल के कारण विभिन्न समस्याओं से जूझ रही राजस्थान की जनता को प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत देने की कोशिश की है। सरकार हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को लेकर सख्ती पर उतर आई है।

सरकार ने सभी हड़ताली कर्मचारियों के वेतन कटौती, इंक्रीमेंट रोकने और हड़ताल, धरने और प्रदर्शन को जरूरी अवकाश में समायोजित करने का आदेश जारी कर दिया है।

मंत्रीमंडलीय उप समिति के साथ समझौता वार्ता असफल होने पर सरकार ने यह आदेश जारी कर दिया। आदेश आज से ही लागू हो गए हैं। कर्मचारी संघों ने इसपर कड़ा ऐतराज जताया है।

वित्त विभाग अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कोई भी कर्मचारी हड़ताल, सामूहिक छुट्टी और किसी भी गैर सरकार कार्यों में लिप्त होगो तो अवकाश पर मानते हुए उसके वेतन में कटौती की जाएगी।

मंत्रालय कर्मचारियों, रोडवेज कर्मचारियों और जेसीटीएसएल के कर्मचारियों की हड़ताल को राजस्थान सरकार का यह करारा झटका माना जा है। आज तय होगा कि हड़ताली कर्मचारी आगे क्या करने जा रहे हैं।

अभी सरकार के 122 मंत्रालयों के करीब डेढ लाख कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। हड़ताल होने के करण प्रदेश की पूरी व्यवस्था बेपटरी है। लोगों को यातायात में भारी परेशानी हो रही है।

आपको बता दें कि राजस्थान सरकार के मंत्रालयों में कार्यरत सभी मंत्रालयी कर्मचारी कई दिन से हड़ताल पर हैं। ये कर्मचारी मानसरोवर में तंबू लगाकर बैठे हुए हैं। इधर, अधिनस्थ मंत्रालयिक कर्मचारी हाउसिंग बोर्ड मैदान पर अनशन कर रहे हैं।

इसी तरह से राजस्थान परिवहन निगम की भी साढे 4 बसें कई दिन से बन्द पड़ी हैं। जिनके करीब साढे 17 हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल करके बैठे हैं।

रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को समर्थन करते हुए जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सभी चालक और परिचालक हड़ताल कर बसों को थाम चुके हैं।

इसी तरह से राजस्थान सरकार के कार्यों के प्रचार प्रसार का जिम्मा उठाने वाले जनसंपर्क सेवा के अधिकारी भी 3 दिन से कार्य बहिष्कार कर बैठे हुए हैं।

विपक्ष के द्वारा इसको राजस्थान सरकार की नाकामी करार दी जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने हड़ताल को लेकर वसुंधरा राजे सरकार पर तीखे हमले किए हैं।

कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार को विफल करार देते हुए आरोप लगाए हैं कि सरकार को जनता की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है।

इधर, हड़ताली कर्मचारियों को कांग्रेस पार्टी का समर्थन होने और कुछ चुनिंदा सरकार विरोधी संगठनों की कवायद होने का आरोप लगाते हुए सरकार ने उनकी मांगों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। देर रात का फैसला इसको पुख्ता करता है।

लगातार चल रही हड़ताल और कर्मचारियों के नहीं झुकने के बाद राजस्थान सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए हड़ताली कर्मचारियों की तनख्वाह काटने और उनके इंक्रीमेंट रोकने के आदेश जारी कर दिए।

महज कुछ ही दिन में राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगने वाली है। ऐसे वक्त में सरकार के अधिकांश कर्मचारियों की हड़ताल दबाव बनाने का सबूत माना जा रहा है।

माना जा रहा है कि सामान्यत: एक ट्रेंड बनाते हुए सरकारी कर्मचारी अंतिम दिनों में दबाव बनाकर अपनी बातें मनवाने का प्रयास कर रहे हैं। राजस्थान सरकार का यह आदेश उनके लिए भारी पड़ सकता है।