LOC Balakot

नई दिल्ली।

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के दौरान हिंदुस्तानी सरकार की तल्खी से एक बात और तय हो गई है, जो की आने वाली भारत की सरकारों के लिए मील का पत्थर बनकर सामने खड़ी होगी।

भारत ने पहली बार अपने किसी पायलट को युद्ध के दौरान पाकिस्तान के कब्जे से केवल 2 दिन में छुड़ाने की सफलता हासिल की है।

इससे पहले 1965 के युद्ध में एयर मार्शल (air marshal) केएम करियप्पा को उनके बेटे केसी करियप्पा को एक ही दिन में छोड़ने के लिए पाकिस्तानी फील्ड मार्शल (field marshal) अयूब खान ने ऑफर किया था।

लेकिन उन्होंने किसी भी तरह का पक्षपात करने से इनकार कर दिया। आखिर केएम करियप्पा 4 महीने की पाकिस्तानी कैद के बाद केसी करियप्पा भारत लौटे थे।

साल 2011 के दौरान एक टीवी चैनल के द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री (television documentary) में बोलते हुए विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने कहा था कि एक बेहतरीन पायलट बनने के लिए उसका अक्कड़ स्वभाव (bad atitude) होना जरूरी है।

पुलवामा ने 12 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले से लेकर 26 फरवरी को भारत की एयरफोर्स (indian airforce) के द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक (air strike) किए जाने तक विंग कमांडर अभिनंदन भी खुद टेंशन में रहे।

भारत और पाकिस्तान के आजाद होने के 72 साल बाद पहली बार यह मौका है कि भारत ने अपने किसी ऑफिसर (Army officer) को इतने कम समय में पाकिस्तान के कब्जे से बिना कोई हानि पहुंचाए छुड़ाने में कामयाबी हासिल की है। यह आने वाली सरकारों के लिए एक नजीर साबित होगी।

भारत सरकार के द्वारा खुली छूट देने के बाद केवल 12 दिन के अंतराल में भारत की एयरफोर्स (airforce) ने पाकिस्तान को ऐसा करारा जवाब दिया है, जो हमेशा हमेशा के लिए याद रखा जाएगा

यह केवल भारतीय एयरफोर्स की ताकत का नमूना भर नहीं था, बल्कि यह भारत सरकार के द्वारा नामुमकिन को मुमकिन किए जाने का भी एक उदाहरण सामने आया है।

ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा से बालाकोट तक एक नई नियंत्रण रेखा खिंच गई है, जो भारत ही नहीं, अपितु पाकिस्तान में भी हमेशा के लिए याद रखी जाएगी।

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