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जयपुर।
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए राजस्थान के दोनों चरण 29 अप्रैल और 6 मई को हो चुके हैं। देश में भी चुनाव अंतिम चरण में है। उसके बाद 23 मई को मतगणना होगी, जिसमें तय होगा की अगले पांच साल तक देश पर राज कौन करने वाला है।

इस बीच चुनाव को लेकर सट्टा बाजार का भाव भी अंतिम दौर में चल रहा है। 23 मई के दिन तक सट्टा बाजार का भाव उपर नीचे होने का अहसास सट्टा लगाने वालों को होता रहेगा। यह बात और है कि इस सारे सट्टे में जिन नेताओं को आप चुनने जा रहे हैं, वह खुद ही शामिल हैं।

पुलिस विभाग, जिसके गैर कानूनी कार्यों पर लगाम लगाने का जिम्मा होत है, सूत्र बताते हैं कि इस विभाग के कई आला अफसर भी चुनावी से लेकर आईपीएल सट्टे में लिप्त हैं। पुलिस के खूफिया तंत्र को भी रोज सट्टे का भाव अपने आला अधिकारियों को देना पड़ता है।

बड़ी अजीब है, लेकिन सबसे जोरदार बात यह है कि भले ही छोटे छोटे सटोरिए पकड़ लिए जाएं और पुलिस द्वारा दिखाया जाए कि सट्टा लगाते सटोरियों को पकड़ा जा रहा है, उनपर कार्रवाई की जा रही है। मगर असली खेल पर्दे के पीछे ही चलता है।

पुलिस विभाग के एक सूत्र ने हमें इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि जिन सटोरियों को पुलिस के अफसर पकड़कर मीडिया के सामने एक्सपोज करने का दावा करते हैं, उनको ही बाद में कई अधिकारी सट्टा लगाने के लिए काम में लेते हैं।

इस बात की जानकारी न केवल पुलिस विभाग के कर्ताधर्ताओं
को, बल्कि मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक होने का भी दावा किया जाता है, लेकिन सब चुप हैं और जनता सट्टे के द्वारा मोटा पैसा कमाने के लालच में बर्बाद होती जा रही है।

आप यदि सट्टे पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि चुनाव शुरू होने के वक्त जिन संसदीय और विधानसभा सीटों पर भाव कम था, वहां चुनाव खत्म होने तक अधिक हो गए, जबकि जिनके भाव शुरू में ज्यादा थे, लास्ट में आते आते उनके भाव दम तोड़ गए। यही सट्टे में नेताओं और पुलिस के अधिकारियों की मिलीभगत का सारा खेल है, जो आमजन को पता भी नहीं है।

इस दरिमियान सट्टे में पैसा लगाने वाले लोग अपनी सांसे उपर नीचे करते रहते हैं और पैसा लगाते रहते हैं। हर रोज सट्टे के भाव कम ज्यादा होते हैं। इसमें पैसा निवेश करने वाले लोग परेशान रहते हैं।

इस खतरनाक गेम में कई अच्छे—खासे कमाते—खाते लोग बर्बाद होकर सुसाइड भी कर चुके हैं, लेकिन पुलिस ने आज तक किसी को बड़ी सजा दिलाने में कामयाबी हासिल नहीं की है, कारण क्या है, यह पुलिस ही बेहतर बता सकती है।

सबसे अहम बात यह है कि इस सट्टे में सबसे ज्यादा पैसा वो कमाते हैं, जो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी होते हैं। यह पूरा खेल दोनों ही बड़े चुनाव के अलावा प्रधान, पार्षद, और सरपंच और यहां तक ​कि वार्ड पंच के चुनाव में भी चलता है।

कुछ उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जो चुनाव खत्म होने के अंत तक 100 करोड़ रुपए तक कमाकर निकल चुके हैं। अब उनके चुनाव जीतने या हारने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

पुलिस के कई अफसर कमा रहे हैं, कई विधायक कमा रहे हैं, सांसद पद के उम्मीदवार भी सट्टे में मोटा माल कूट रहे हैं, यहां तक की सरकार में बैठे कुछ मंत्री भी इस तरह के काम करते हैं।

इस बात की जानकारी पुलिस के पूरे तंत्र को पता है, लेकिन आज तक किसी नेता का बाल भी बांका नहीं हुआ है। सारे नोट छाप रहे हैं, किंतु इस पूरे खेल में जो बर्बाद होता है, वह है आम जनता, जिसको पता ही नहीं है कि आखिर माजरा क्या है?

तो पाठकों बात केवल इतनी सी है कि आप इस तरह के शॉर्टकट रास्ते से पैसा कमाने वालों के साथ मत जाइए और अपने को सुरक्षित रखिए, समाज को अच्छी दिशा दीजिए, बच्चों को अच्छी शिक्षा दीजिए।