अयोध्या राम मंदिर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपी बरी, 16 की हो चुकी है मौत

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर की जगह बनाई गई बाबरी मस्जिद के 6 दिसंबर 1992 को विध्वंस मामले में आज लखनऊ की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है।

2000 पन्नों के आदेश में अदालत ने कहा है कि यह पूरा मामला अचानक घटित हुआ था, जिसमें किसी भी आरोपी की प्रत्यक्ष रूप से करवाई गई घटना साबित नहीं होती है। इस केस में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे लोगों के नाम शामिल थे।

1992 के बाद के दावे की समाजवादी सरकार के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने केस को सीबीआई को ट्रांसफर किया था। केंद्र सरकार के द्वारा सीबीआई जांच करवाई गई और इसके साथ ही घटना होने के 10 दिन बाद लिब्राहन आयोग का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट केंद्र को 17 साल बाद प्राप्त हो गई। इस आयोग को 48 बार एक्सटेंशन दिया गया था और इस आयोग के ऊपर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

मजेदार बात यह है कि लिब्राहन आयोग के द्वारा या फिर सीबीआई दोनों की तरफ से ही इस प्रकरण में अंतिम छोर पर पहुंचने का काम नहीं किया गया। अंततः लखनऊ की विशेष अदालत ने आज अपने फैसले में सभी जिंदा 32 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि राम मंदिर के स्थान पर मुगल शासक बाबर के वक्त उसके खास सिपहसालार के द्वारा मंदिर को तोड़कर उसकी जगह बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया गया था। इस प्रकरण को लेकर इस साल के शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने पूरी जमीन रामलला को सौंप दी है और यह मानना है कि यहां पर राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जमीन राम मंदिर के लिए सौपे जाने और आज लखनऊ की विशेष अदालत के द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस ढांचे को ढहाने का आरोप झेल रहे सभी 32 जनों को बरी करने के बाद अब इस प्रकरण का अंत होने की संभावना जताई जा रही है।