किसानों के भारत बंद आह्वान को कांग्रेस द्वारा हाईजैक की जाने की चिंता

जयपुर/हिसार/चंड़ीगढ़। केंद्र सरकार के द्वारा हाल ही में कृषि सुधारों में लाए गए तीन कृषि अध्यादेश के खिलाफ आज विभिन्न किसान संगठनों के द्वारा भारत बंद का आह्वान किया गया है, लेकिन किसानों के इस आह्वान को कांग्रेस द्वारा हाईजैक किए जाने की चिंता भी जताई जा रही है।

देश के विभिन्न कृषि संगठनों के साथ भारतीय किसान यूनियन, जिसको वामपंथी विचारधारा की पार्टियों का किसान संगठन बना जाता है, उसके द्वारा देश में रेल रोकने और हाइवे जाम करने की चेतावनी दी गई है। इसके आधार पर माना जा रहा है कि कई जगह यह आंदोलन हिंसक हो सकता है।

किसान महापंचायत की राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट का कहना है कि किसानों के लिए आंदोलन शांति और अहिंसा के मार्ग को अपना पर किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान जो आंदोलन हो रहा है, उसके पीछे राजनीतिक मंशा ज्यादा दिखाई दे रही है।

जाट का कहना है कि यह बात सही है कि केंद्र सरकार के द्वारा जो अध्यादेश लाए गए हैं, उससे किसानों की लूट बंद नहीं होगी, बल्कि लुटेरे बदलने का काम किया गया है। किंतु इसका मतलब यह नहीं है कि किसान अपनी मांग के लिए हिंसा का रास्ता अपनाएं।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा कृषि में सुधारों के नाम पर तीन अध्यादेश संसद में पारित करवाए गए हैं। पहले अध्यादेश में कहा गया है कि किसान अब अपनी उपज मंडी में बेचने के लिए बाध्य नहीं होगा, वह खुले बाजार में किसी भी कारोबारी को बेच सकता है।

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अब तक किसान के लिए अपनी उपज को बेचने का एकमात्र रास्ता कृषि उपज मंडी, जिनमें कारोबारियों द्वारा सांठगांठ करके किसानों की उपज का उचित दाम नहीं दिया जा रहा था। लगातार किसान कारोबारियों के द्वारा तय किए गए मूल्यों पर निर्भर रह गया था।

दूसरे अध्यादेश में कारोबारियों के लिए बाध्यकारी स्टॉक लिमिट खत्म की गई है, जिसको भी किसानों की फायदे के रूप में परिभाषित किया जा रहा है। किंतु आंदोलन करने वाले किसान नेताओं का कहना है कि इससे जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा और अंबानी व अडानी जैसे उद्योगपति कृषि को इंडस्ट्री बना देंगे।

तीसरे अध्यादेश में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का प्रावधान किया गया है। अब तक किसान कॉन्ट्रैक्ट करके फार्मिंग नहीं कर सकता था। लेकिन अब देश-विदेश की छोटी-बड़ी कंपनियां सीधे किसान के साथ कॉन्ट्रैक्ट करके उससे पैदावार खरीद सकेंगी, जिससे किसान की मंडी के ऊपर निर्भरता में कमी आएगी।

इन तीनों देशों का संसद में भी विरोध हुआ और जिसके चलते राज्यसभा में 8 सदस्यों को निलंबित भी किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि वह इन अध्यादेशों के खिलाफ नहीं है, लेकिन अध्यादेश लाने और उनको कानून का रूप देने से पहले कांग्रेस पार्टी के साथ बातचीत करनी चाहिए थी।

किसानों के द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।