कृषि में निजीकरण को बढ़ावा दे रही सरकार, विरोध में उतरे किसानों पर लाठीचार्ज

कृषि में निजीकरण को बढ़ावा दे रही सरकार, विरोध में उतरे किसानों पर लाठीचार्ज

रोहतक।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार हाल ही में लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों का विरोध कर रहे हरियाणा के किसानों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं। प्रदेशभर के किसानों ने गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कोरोना के चलते सरकारी रोक के बाद भी पिपली में ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ रैली के लिए बड़े पैमाने पर राज्य के किसान, व्यापारी और मजदूर एकत्रित हुये थे। पुलिस ने खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया। जिसके विरोध में किसानों द्वारा भी पुलिस पर पथराव किया गया।

इतना ही नहीं, अपितु प्रशासनिक सख्ती से उग्र किसानों ने दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा, फिर इस प्रकरण को लेकर सुलझने की संभावना नहीं होने पर प्रशासन झुक गया और किसानों रैली की अनुमति दे दी गई। दोपहर में करीब 2:00 बजे किसानों ने पिपली अनाज मंडी में भी रैली शुरू कर दी। इसको लेकर हंगामा हुआ और इसी हंगामे के समय कई किसान लाठियां लगने के कारण घायल हुये। साथ ही कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए।

इससे पहले हरियाणा की मनोहर लाला खट्टर सरकार ने पिपली में किसानों कीरैली पर रोक लगा दी थी। स्थानीय जिला पुलिस ने सभी जिलों में रैली में शामिल होने जा रहे किसानों को रोकने का पूरा प्रयास किया। किंतु भारी संख्या में किसान, व्यापारी, मजदूर रैली में कुरुक्षेत्र पहुंचे। जिनको हटाने के लिये पुलिस ने हल्का बल का प्रयोग किया। इस कार्रवाई से रोष खाये किसानों ने पुलिस के जवानों पर पथराव कर दिया।

मजेदार बात यह है कि रैली को समर्थन देने पहुंचने वालों में अधिकांश कांग्रेसी नेता ही थे।कांग्रेसी नेता पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा, लाडवा कांग्रेस के विधायक मेवा सिंह, इंप्रूवमेंट ट्र्स्ट के पूर्व अध्यक्ष जलेश शर्मा और संगठन मंत्री सुभाष पाली समेत कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस मौके पर डीसी शरणदीप कौर, पुलिस अधीक्षक आस्था मोदी और स्थानीय एसडीएम अखिल भी पहुंचे। जिन्होंने किसानों को समझाने की भरपूर कोशिश की, मगर किसान अपनी मांग पर पद अड़े रहे।
नहीं मानी मांग तो 15 से धरना
मंडी में किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने केंद्र सरकार से कहा है कि सरकार ने किसानों पर लाठीचार्ज कर गलत किया है। अब सरकार को चार दिन का समय दिया गया है। अगर चार दिन में हरियाणा की सरकार सभी तीनों अध्यादेश वापस नहीं लिये और सरकार बात नहीं मानी, तो प्रदेश के किसान 15 सितंबर 2020 से हर जिला मुख्यालय पर धरना शुरू करेंगे।

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इन अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं किसान
जानकारी के अनुसार कानून के अनुसार व्यापारी केवल मंडी से ही किसान का उत्पादन खरीद कर सकते थे। किंतु नये अध्यादेश के अनुसार व्यापारी को मंडी के बाहर से भी फसल खरीदने की छूट मिल जाएगी। दूसरे अध्यादेश में कहा गया है कि अनाज, दालों, खाद्य तेल, प्याज, आलू इत्यादी को जरूरी वस्तु अधिनियम से बाहर किया गया है। अब जरुरी वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक सीमा समाप्त कर दी गई है। तीसरे अध्यादेश में सरकार ने कृषि में भी कांट्रेक्ट फॉर्मिंग को बढावा देने का काम किया है।