सरकारी कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने के आदेश, 30 साल की सर्विस के बाद घर बिठाने की योजना शुरू

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों को कम्पलसरी रिटायरमेंट का तोहफा दिया है। सरकार ने केंद्र के सभी 49 मंत्रालयों के चिट्ठी भेजकर जिन कार्मिकों की उम्र 50 या 55 साल हो चुकी हैं, उनको जरुरी सेवानिवृत्ति देने का फैसला किया गया है।

इसके साथ ही कहा गया है कि जिन कार्मिकों की सेवा अवधि 30 साल पूरी हो चुकी है और कार्यक्षमता में कमी आई है, उनको सेवानिवृत्ति देकर घर बिठा दिया जाए।

बताया जा रहा है कि इससे करोड़ों कर्मचारी सीधे प्रभावित होंगे और उनके बुढ़ापे में दिक्कतें बढ सकती हैं। सरकार इससे पहले भी जबरन रिटायर करने का कार्यक्रम शुरू कर चुकी थी, लेकिन यह कार्यक्रम केवल उच्च पदों पर बैठे कर्मचारियों के लिए थी, अब सभी पदों पर इस योजना का लागू किया जा रहा है।

इधर, जनता में इसको लेकर तरह तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर इसको लेकर खुशी मना रहे हैं, जो सरकारी कर्मचारियों की बेरुखी से परेशान हैं।

जबकि सोशल एक्टिविस्ट का कहना है कि इससे सामाजिक जिम्मेदारियों को बोझ बढेगा और सरकारी कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढेगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता में भारी कमी आ सकती है।

गौरतलब है कि केंद्र की सरकार के द्वारा बीते तीन चार सालों के दौरान दर्जनों आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को जबरन रिटायर किया जा चुका है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र से ज्वाइंट सेक्रेटरी और उप सचिव जैसे पदों पर सीधे आईएएस बनाने का कार्य किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि जिन लोगों के अकर्मण्यता की भावना घर कर जाती है या फिर उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, उनका सरकार बोझ क्यों उठाए, जबकि इसी तरह की रणनीति अपनाकर चीन अपना विकास कर रहा है।

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