एलआरडी (पुलिस) समेत 38000 पदों पर भर्ती को लेकर गुजरात का युवा आंदोलनरत, ट्वीटर पर मची धूम

LRD Police (file photo)
LRD Police (file photo)

अहमदाबाद।
सरकारी नौकरी में भर्ती का मामला राजस्थान के युवाओं के लिए ही पेचीदा नहीं है, वरन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी युवा काफी परेशान हैं। सरकारी अधिकारियों की लेटलतीफी का आलम यह है कि करीब दो साल से अलग—अलग स्तर पर बेरोजगार युवाओं द्वारा जमकर आंदोलन किया जा रहा है।

शिक्षित युवा बेरोजगार समिति के महेंद्र माली ने बताया कि सरकार ने अगस्त 2018 में 6100 पदों पर एलआरडी (पुलिस) भर्ती निकाली थी। बाद में सरकार ने पदों की संख्या बढ़ाकर 9713 कर दी और इसके लिए 2 दिसंबर 2018 को परीक्षा का आयोजन किया गया।

किंतु इस परीक्षा का पेपर लीक हो गया और सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद सरकार ने 6 जनवरी 2019 को फिर से परीक्षा का आयोजन किया गया। जिसका 30 नवंबर 2019 को परिणाम जारी कर दिया गया।

नियमानुसार इसमें से करीब 1500 पदों पर छात्राओं के लिए पद सुरक्षित रहने थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिसके चलते छात्राओं ने आंदोलन कर दिया। तब ​अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के गुजरात में यात्रा थी। इसको देखते हुए सरकार ने छात्राओं वार्ता कर आश्वास्त कर दिया।

इस आंदोलन को अब कोरोना की पाबंदियों के कारण युवा ट्वीटर पर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर चला रहे हैं। आज भी ट्वीटर पर इस भर्ती को लेकर गुजरात का युवा ट्रेंड करवा रहा है। इस परीक्षा में 8.76 लाख अभ्यर्थियों ने पार्टीसिपेट किया था।

इसके बाद जानकारी में आया है कि सरकार ने इस भर्ती के लिए करीब 46 फीसदी आरक्षण लड़कियों के लिए जारी करते हुए 2485 भर्ती उनको दे दी गई। सरकारी अधिकारियों ने कारस्तानी कर तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदी बेन द्वारा 2014 में महिलाओं के लिए 13 फीसदी से 33 प्रतिशत किये गये आरक्षण से भी आगे बढ़कर 46 फीसदी आरक्षण दे दिया।

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इस मामले में सरकारी अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं, जबकि आंदोलन करने वालों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों को चुनौती के साथ यह बात बताई गई है कि आपके द्वारा एलआरडी भर्ती में महिलाओं को 46 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

इस प्रकरण को लेकर युवाओं के द्वारा 22 जून को गांधीनगर में करीब 700 लोगों की मौजूदगी में प्रदर्शन किया गया था। तब गांधी नगर पुलिस के द्वारा आश्वासन दिया गया था। इसी तरह से जब भी युवा अपनी बात रखने को एकत्रित होते हैं तो पुलिस उनको हिरासत में ले लेती है।

बेरोजगारों का कहना है कि एलआरडी भर्ती ही नहीं, अपितु ग्राम सेवक, फोरेस्ट गार्ड और सचिवालय भर्ती समेत 38000 पदों पर भर्ती अटकी पड़ी है, जिसको सरकार निपटा नहीं पा रही है।