चीन ही नहीं, दुनिया के किसी देश को तहस नहस कर सकता है भारत

-भारत की मिसाइलें और परमाणु बम, चीन ही नहीं, विश्व को तहस-नहस कर सकता है भारत।

-हमारी सूर्य मिसाइल और परमाणु बम की ज़द के बाहर कोई नहीं: आत्म निर्भर है भारत।

यह सच है कि भारत को शस्त्रास्त्र, मिसाइल, लड़ाकू विमान, युद्ध पोतवाहक, सबमरी्न्स और अन्य सैन्य सामग्री में जितना आत्मनिर्भर होना चाहिए था उतना तो नहीं है। लेकिन दो ऐसे सबसे महत्वपूर्ण शस्त्र हैं जिसमें भारत पूर्णतः आत्मनिर्भर हैं: मिसाइलें और परमाणु बम।

भारत के पास लगभग 150 से 200 के बीच परमाणु बम (Atom/nuclear bomb) होने का अनुमान विदेशी रक्षा विशेषज्ञ लगाते हैं। भारत को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए क्या-क्या नहीं किया विकसित देशों ने।

नॉन प्रॉलीफेरेशन ट्रीटी (NPT) और सीटीबीटी (Comprehensive Test Van Treaty) जैसे protocol और संगठन बनाकर इनपर हस्ताक्षर करने के लिए भारत सरकार पर बहुत दबाव डाला गया था, जिसपर भारत ने कभी हस्ताक्षर नहीं किया।

1998 में (अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में) भारत ने परमाणु परीक्षण के बाद परमाणु बमों का निर्माण किया। लेकिन परमाणु बम अपने आप में कुछ भी नहीं है अगर उसका अचूक delivery system न हो, यानी मिसाइलें।

और मिसाइलें भी कुछ महत्वपूर्ण नहीं रह जायेंगी अगर उन्हें launch करने का जल, थल और वायु में सक्षम platforms न हो। ये तीनों ही आवश्यक है और सक्षमता की chain तभी पूरी होगी जब ये तीनों हो। सौभाग्य से भारत इन तीनों में सक्षम ही नहीं पूर्णतः आत्मनिर्भर और विश्व स्तर की तकनीक से सुसज्जित है।

मिसाइलों के विकास और निर्माण के क्षेत्र में भारत ने विश्व स्तर की सफलता प्राप्त की है और न तो किसी से कम है न किसी पर निर्भर।

दुनिया की सशस्त्र सेनाओं में परंपरागत युद्ध हथियार (राइफलें, मशीनगनें, मोर्टार, आर्टिलरी/तोपें, टैंक, राकेट/कम दूरी की क्रूज मिसाइल इत्यादि) तो होते ही हैं लेकिन सभी के पास बैलिस्टिक मिसाइलें नहीं होती और होती भी है तो उस तरह की नहीं जिस तरह भारत के पास है।

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की अधिकतर मिसाइलें भारत में ही इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम या IGMDP (Integrated Guided Missile Development Program) के अंतर्गत DRDO (Defence Research and Development Organization) द्वारा पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित और निर्मित की गई है।

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इनका औद्योगिक उत्पादन BDL (Bharat Dynamics Limited) द्वारा किया जाता है।

इनको विकसित करना इसलिए आवश्यक था कि दुनिया के विकसित देशों के पास जो मिसाइल टेक्नोलॉजी थी, वह उसे भारत को देने से मना कर चुके थे।

इस टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण क्रायोजेनिक इंजन और इंधन देने से दुनिया के उन सभी देशों ने मना कर दिया था जिनके पास यह थी: यानि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन (चीन से तो मांगा भी नहीं)। रुस, जो भारत का परम मित्र माना जाता है, देना चाहता था पर अन्य देशों के दबाव के कारण नहीं दे सका।

लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतिभा और अथक परिश्रम से न सिर्फ क्रायोजेनिक इंजन और उसके लिए इंधन बनाया बल्कि पूरी तरह से स्वदेशी विश्व स्तर की मिसाइल टेक्नोलॉजी देश को प्रदान किया।

यह मिसाइलें हमारे देश की न सिर्फ शान है बल्कि हमारे सुरक्षा और प्रतिकार की अंतिम गारंटी है। इसमें स्ट्रैटेजिक (Strategic) और टैक्टिकल (Tactical) दोनों तरह की मिसाइलें शामिल है। आइए देखते हैं कि भारत के पास कौन-कौन सी मिसाइलें है:

सूर्य मिसाइल:

चौक गए ना आप? जी हां इस मिसाइल के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं और जानेंगे तो और चौंक जाएंगे। इसकी आवश्यकता भारत के सशस्त्र बलों ने सरकार को 1993 में ही Parliamentary committee on defence के माध्यम से दे दी थी और इसी के आधार पर 1994 में ही भारत के वैज्ञानिकों ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को दे दिया था।

पी वी नरसिंह राव के नेतृत्व में थोड़ा बहुत कार्य हुआ था लेकिन उसके बाद ये ठंडे बस्ते में चला गया। असली कार्य अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में इसपर 1998 में फिर आरंभ हुआ और तब से स्वतंत्र रूप से चलता रहा।

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मोदी सरकार के आने के बाद 2014 से फिर इसपर बहुत तेजी से कार्य हुआ। आइए जानते हैं इस मिसाइल के बारे में।

सूर्य मिसाइल भारत की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली रणनीतिक (strategic) मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता में संपूर्ण पृथ्वी है।

इसकी रेंज 12000 से 16000 किलोमीटर है, जबकि पृथ्वी की परिधि लगभग 40000 किमी है। इस तरह अगर भारत के अलग-अलग भागों से इसे फायर किया जाए तो यह दुनिया के किसी भी हिस्से को तबाह कर सकती है।

ध्यान रहे भारत की उत्तर-दक्षिण लम्बाई 3200 किमी नहीं बल्कि 5000 किमी के आसपास है: अंडमान-निकोबार का सबसे दक्षिणी बिन्दु लदाख के उत्तर बिन्दु से लगभग 5000 किमी दूर है।

इस प्रकार यह 16000+5000=21000 किमी उत्तर और इतना ही दक्षिण (पूरब-पश्चिम भी) दिशा में पहुंच सकती है। इस प्रकार दुनिया का लगभग हर भाग इसकी चपेट में है।

यह मिसाइल मूलतः परमाणु बम (nuclear/atom bomb) को deliver करने के लिए बनायी गयी है, हांलांकि परम्परागत हथियार (conventional warhead) भी यह deliver कर सकती है।

यह मिसाइल एक बार में 9-12 लक्ष्य भेद सकती है (मतलब 9-12 परमाणु बम एक साथ ले जा सकती है), क्योंकि यह MIRV ( Multi Independently targetable Re-entry Vehicle) है।

सही अर्थों में यह भारत की अकेली अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल या ICBM (inter Continental Ballistic Missile) है। इस मिसाइल का वजन लगभग 55000 किलोग्राम, लम्बाई 40-70 मीटर और चौड़ाई (diameter) 1.1 मीटर है।

इसकी गति 10-12 मैक (न्यूनतम) से 29 मैक (अधिकतम) तक है। यानी यह ध्वनि से 10-12 गुना से 29 गुना तेज चलती है। इस प्रकार धरती के किसी भी कोने में यह अधिकतम 30 से 40 मिनट के बीच पहुंच सकती है। बस एक घंटे में कम की बात है, खेल खत्म हो सकता है।

इस मिसाइल के विषय में भारत सरकार ने कभी आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की, लेकिन विश्व के रक्षा विशेषज्ञों का विचार है कि यह मिसाइल बनकर तैयार हो चुकी है और इसका परीक्षण अग्नि-6 (Agni-VI) के नाम से किया जा चुका है।

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भारत इस मिसाइल का परीक्षण पूरी रेंज (12000-16000 Km) के लिए नहीं कर सकता। क्योंकि 12000 से 16000 किलोमीटर तक फायर करने के लिए भारत के पास ही नहीं, दुनिया के किसी भी देश के पास न तो भूमि है न ही समुद्र।

दुनिया के सबसे बड़े देश रूस के पास भी, जो यूरोप से लेकर एशिया तक फैला है, इतनी लम्बाई नहीं है। रूस 9000 किमी लम्बा है। इसलिए सूर्य मिसाइल का परीक्षण, अग्नि-6 (Agni-VI) के नाम से, 6000 से 8000 किलोमीटर तक की रेंज के लिए किया जा चुका है।

इस परीक्षण से 16000 रेंज की सारी आवश्यकतायें पूरी हो जाती है। यह तस्वीर सूर्य की बल्कि रुस के ICBM की है। सूर्य की डिजाइन इसी पैटर्न पर बतायी जाती है।

भारत सरकार आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं करती, क्योंकि दुनिया में जो भारत के मित्र देश हैं वह अनावश्यक रूप से नाराज हो सकते हैं।

भारत द्वारा अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बनाने का बहुत गंभीर विरोध हुआ था। इस टेक्नोलॉजी के नियंत्रण के लिए मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) नाम का संगठन बनाया गया था।

इनका कहना था कि भारत को इतनी रेंज की मिसाइल की आवश्यकता क्या है जबकि उसकी शत्रुता पाकिस्तान और चीन के अलावा किसी से नहीं है। और इन देशों तक मार करने के लिए ICBM की आवश्यकता नहीं है।

NPT/CTBT में प्राविधान था कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (अमेरिका, चीन, फ्रांस, इंग्लैंड और रूस, जिनके पास ICBM पहले से ही थे) को छोड़कर यह टेक्नोलॉजी किसी और देश के पास नहीं होनी चाहिए और न विकसित होने देना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों के बाद भारत अकेला देश है जिसके पास यह मिसाइल है।

सूर्य मिसाइल को विशेष प्रकार के रेल या ट्रक से फायर किया जा सकता है। इस विशेष प्रकार के रेल या ट्रक को TEL (Transporter-Erector-Launcher) कहा जाता है।