मोदी की चीन को दो टूक: “विस्तारवाद का युग खत्म हुआ, यह विकासवाद का युग है”, पढ़िए मोदी की पूरी बातें

जयपुर

भारत और चीन के साथ लद्दाख में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह 9:00 बजे लद्दाख में उस जगह पहुंचे जहां पर सबसे कठिन परिस्थितियों में देश के जवान सीमा की सुरक्षा करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पर सेना का हौसला बढ़ाया, जवानों को संबोधित किया और इसके साथ ही चीन की सीमा पर खड़े होकर चीन को सीधे-सीधे चुनौती दे डाली। प्रधानमंत्री ने एक और जहां देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले जवानों का हौसला बढ़ाया तो दूसरी तरफ चीन की विस्तार वादी नीति को लेकर भी पड़ोसी देश को संदेश के रूप में चेतावनी दी।

प्रधानमंत्री ने चीन को संदेश देते हुए कहा कि विस्तार वार्ड का युग खत्म हो गया है अब विकासवाद का युग है। उन्होंने कहा कि विस्तार वाद के खिलाफ पूरी दुनिया लामबंद हो चुकी है, इसलिए अब किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि वह इस मार्ग पर चलकर सफलता हासिल कर सकता है।

यहां पढ़िए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा भाषण

साथियों आपका यह हौसला आपका शौर्य और मां भारती के मान सम्मान की रक्षा के लिए आप का समर्पण अतुल नहीं है आपकी जीवटता भी दुनिया में किसी से भी कम नहीं है। जिन कठिन परिस्थितियों में, जिस ऊंचाई पर आप मां भारती की ढाल बनकर के उसकी रक्षा करते हैं, उसकी सेवा करते हैं, उसका मुकाबला पूरे विश्व में कोई नहीं कर सकता।

आपका साहस उस ऊंचाई से भी ऊंचा है, जहां आप तैनात हैं। आपका निश्चय उस पत्थर से भी सख्त है, जिसको रोज आप अपने कदमों से नापते हैं। आप की भुजाएं उन चट्टानों से भी मजबूत हैं, जो आपके इर्द-गिर्द खड़ी हैं। आपकी इच्छाशक्ति आसपास के पर्वतों जितनी अटल है, आज आपके बीच आकर मैं ऐसे महसूस कर रहा हूं, साक्षात अपनी आंखों से देख रहा हूं।

साथियों, जब देश की रक्षा आपके हाथों में है आपके मजबूत इरादों में है और एक अटूट विश्वास है, सिर्फ मुझे नहीं पूरे देश को अटूट विश्वास है और देश निश्चिंत भी है। आप जब सरहद पर डटे हैं, यही बात प्रत्येक देशवासी को देश के लिए दिन-रात काम करने के लिए प्रेरित करता है।

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प आप लोगों के कारण आपके त्याग, बलिदान और पुरुष के कारण और मजबूत होता है और अभी जो आपने और आपके साथियों ने वीरता दिखाई है, उसने पूरी दुनिया में संदेश दिया है कि भारत की ताकत क्या है।

मेरे सामने महिला फौजियों को भी देख रहा हूं, युद्ध के मैदान में सीमा पर के दृश्य अपने आप को प्रेरणा देता है। साथियों राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने लिखा था “जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी डोल….. कलम आज उनकी, कलम आज उनकी जय बोल…. मैं आज अपनी वाणी से आपकी जय बोलता हूं आपका अभिनंदन करता हूं।

यह भी पढ़ें :  प्रधानमंत्री-गृहमंत्री को भारत में कहा जा रहा है रंगा-बिल्ला और रामू-श्यामू, पढ़िए कौन कह रहा है?

गलमान घाटी में शहीद हुए अपने वीर जवानों को भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनमें पूरब से पश्चिम से उत्तर से दक्षिण से देश के हर कोने के वीर अपना शौर्य दिखाते हैं, उनके पराक्रम उनके सिंहनाद से धरती अब भी उनको जयकारा कर रही है।

आज हर देशवासी का सिर आपके सामने अपने देश के वीर सैनिकों के सामने आदर पूर्वक नमन करता है, आज हर भारतीय की छाती आपकी वीरता और पराक्रम से फूली हुई है। साथियों सिंधु के आशीर्वाद से यह धरती पुण्य हुई है। वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम के गानों को यह धरती अपने आप में समेटे हुए है।

लेह लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन की बर्फीली चोटियां से लेकर गलवान घाटी के ठंडे पानी की धारा तक, हर चोटी, हर पहाड़, हर जर्रा जर्रा, कंकड़, पत्थर भारतीय सैनिकों की गवाही देते हैं।

दुनिया ने आपका अदम्य साहस देखा है, जाना है, आप की शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रही है और भारत माता के दुश्मनों ने आपकी “फायर और आपकी फ्यूरी” देखी है।

अभी लद्दाख का यह पूरा हिस्सा, यह भारत का मस्तक, 130 करोड़ भारतीयों के मान सम्मान का प्रतीक, यह भूमि भारत के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्र भक्तों की धरती है। इस धरती ने कई महान राष्ट्रभक्त दिए हैं।

यह राष्ट्रभक्त उन्हें के कारण, जिन्होंने दुश्मन के नापाक इरादों कुंड करने के लिए स्थानीय लोगों को लामबंद किया है, उनकी अगुवाई में यहां पर अलगाव पैदा करने की हर साजिश को लद्दाख के राष्ट्र भक्तों ने नाकाम किया है, यह उन्हीं के प्रेरक प्रयासों का परिणाम था कि देश को भारतीय सेना को लद्दाख स्काउट नाम से इन्फेंट्री रेजीमेंट बनाने का प्रेरणा मिली।

आज लद्दाख के लोग हर स्तर पर चाहे ना हो या फिर सामान्य नागरिक के कर्तव्य हो राष्ट्र को सशक्त करने के लिए अद्भुत योगदान दे रहे हैं।

साथियों हमारे यहां कहा जाता है कि “वीर भोग्य वसुंधरा” यानी अपने शस्त्र की ताकत से ही धरती की मातृभूमि की रक्षा करते हैं, यह धरती वीर भोग्य है, वीरों के लिए है, इसकी रक्षा सुरक्षा को हमारा समर्पण और सामर्थ्य हमारा संकल्प हिमालय जितना ही ऊंचा है, यह सामर्थ्य और यह संकल्प में इस समय आपकी आंखों में मैं देख सकता हूं, आपके चेहरों पर यह साफ साफ नजर आता है।

आप उसी धरती के वीर हैं, जिसने हजारों वर्षों से अनेकों आक्रांताओं के, उन लोगों को अत्याचारों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। हम हम वह लोग हैं जो बांसुरी की पूजा करते हैं, हम वही लोग हैं, जो सुदर्शन चक्रधारी को भी आदर्श मानते हैं।इसी प्रेरणा से हरण के बाद भारत और सशक्त होकर उभरा है।

साथियों, राष्ट्र की दुनिया की मानवता की प्रगति के लिए शांति और मित्रता हर कोई शिकार करता है, हर कोई मानता है, बहुत जरूरी है, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि शांति निर्बल कभी नहीं होती है, कमजोर शांति की पहल नहीं कर सकता, वीरता ही शांति की पूर्व शर्त होती है।

यह भी पढ़ें :  दिल्ली हार के बाद भाजपा का नया नारा आया सामने: "हर काम, देश के नाम"

भारत आज जल, थल, नभ और अंतरिक्ष तक अगर अपनी ताकत बढ़ा रहा है, उसके पीछे का लक्ष्य मानव कल्याण ही है और आज आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है ,दुनिया के आधुनिक आधुनिक तकनीक भारत की सेना के लिए ला रहे हैं तो उसके पीछे की भावना भी यही है।

भारत अगर आज उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है तो उसके पीछे का संदेश भी यही है। विश्व युद्ध को अगर हम याद करें विश्व या फिर शांति की बात जब भी जरूरत पड़ी है, विश्वयुद्ध में हमारे वीरों का पराक्रम भी देखा है और विश्व शांति के उनके प्रयासों को महसूस भी किया है।

हमने हमेशा मानवता के लिए रक्षा और सुरक्षा के लिए काम किया है। जीवन खपाया है, आप सभी भारत के इसी लक्ष्य को, भारत की इस परंपरा को भारत महान संस्कृति के अगवा लीडर हैं।

साथियों, महान संत तिरुवल्लुवर जी ने सैकड़ों वर्ष पूर्व कहा था कि शौर्य, सम्मान, मर्यादापूर्ण व्यवहार ही परंपरा और विश्वसनीयता, ये 4 गुण किसी भी देश की सेना का अभिन्न अंग होते हैं। भारत की सेनाएं हमेशा से इसी मार्ग पर चली हैं।

साथियों, विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है, यह युग विकासवाद का है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है, विकासवाद के लिए अवसर है और विकासवादी भविष्य का आधार भी है। बीती शताब्दियों में विस्तारवाद में ही मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया है, मानवता को विनाश करने का प्रयास किया है, विस्तारवाद की जीत जब किसी पर सवार होती है, उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है और साथ में इतिहास गवाह है, ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मिटने के लिए मजबूर हो गई हैं या मुड़ गई हैं।

विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर हम एक बार फिर से पूरे विश्व में विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है, आज विश्व विकासवाद को समर्पित है और विकास की खुले मन से स्वागत करता है।

साथियों, जब जब मैं राष्ट्र रक्षा से जुड़े किसी निर्णय के बारे में सोचता हूं, मैं सबसे पहले दो माताओं का स्मरण करता हूं, जबकि मैं राष्ट्र रक्षा के विषय में सोचता हूं, मैं सबसे पहले दो माताओं का स्मरण करता हूं। पहले- हम सभी की भारत माता, जब मैं 2 माताओं का अपमान करता हूं, हम सभी की भारत माता और दूसरी वह भी माताएं जिन्होंने आप जैसे पराक्रमी योद्धा को जन्म दिया है।

इन दोनों का सम्मान करता हूं, मेरे निर्णय की कसौटी यही है, इसी कसौटी पर चलते हुए आपके सम्मान, आपके परिवार के सम्मान और भारत माता की सुरक्षा को देश सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार हो या आपके लिए जरूरी साजो सामान, इन सभी पर हम बहुत ध्यान से देते रहे हैं।

यह भी पढ़ें :  मोदी-मोदी और 'how is the josh' से गूंजी संसद, देखिए क्या मिला आम बजट में

अब देश में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब-करीब 3 गुना खर्च कर दिया गया है। इससे बॉर्डर एरिया और सीमा पर सड़के, पूल बनाने का काम भी बहुत तेजी से हुआ है, इसका एक बहुत बड़ा लाभ यह भी हुआ है कि अब आपको सामान भी कम समय में पहुंच सकता है।

साथियों, सेनाओं में समन्वय के लिए लंबे समय से जिसकी आशा थी, उसका वन नेशन वन पेंशन हो या फिर नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण हो, वन रैंक वन पेंशन का फैसला हो या फिर आपके परिवार की देखरेख से लेकर शिक्षा तक की व्यवस्था के लिए लगातार देश आज हर स्तर पर अपनी सेनाओं और सैनिकों को मजबूत कर रहा है।

साथियों, भगवान गौतम बुद्ध ने कहा है साहस का संबंध प्रतिबद्धता से कन्वेंशन से हैं, साहस निर्वाण, साहस अपनी शक्ति है, साहस वह है जो हमें निर्भीक और अडिग होकर सत्य के पक्ष में खड़े होना सिखाएं। साहस वह है जो हमें सही को सही कहने और करने की ऊर्जा देता है।

साथियों, देश के वीर सपूतों ने गलवान घाटी में अदम्य साहस दिखाया, यह आपके साहस की पराकाष्ठा है, देश को आप पर गर्व है, आप पर नाज है। आपके साथ ही हमारे आईटीबीपी के जवान हो, बीएसएफ के साथ ही हो, हमारे पीआरओ और दूसरे संगठनों के जवान हो, मुश्किल हालात में काम कर रहे इंजीनियर हो, श्रमिक हो, आप सभी अद्भुत काम कर रहे हैं।

हर कोई कंधे से कंधा मिलाकर मां भारती की रक्षा के लिए, मां भारती की रक्षा के लिए, मां भारती की सेवा में समर्पित हैं। आज आप सभी की मेहनत से देश अनेक आपदाओं से एक साथ और पूरी दृढ़ता से लड़ रहा है।

आप सभी से प्रेरणा लेते हुए हम मिलकर हर हर चुनौती पर मुश्किल से मुश्किल चुनौती पर विजय प्राप्त करते रहे हैं, विजय प्राप्त करते रहेंगे। जिस भारत के सामने हम सबने, जिस भारत के सपने को लेकर और विशेष रूप से आप सब सरहद पर देश की रक्षा कर रहे हैं, हम उस सपने का बनाने में जुटे हैं।

आपके सपनों का भारत बनाने में जुटे 130 करोड़ देशवासी भी पीछे नहीं रहेंगे। यह मैं आज आपको विश्वास दिलाने आया हूं, हम आत्मनिर्भर भारत बनाएंगे, बना करके ही रहेंगे और आप से जब प्रेरणा मिलती है।

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी और ताकतवर हो जाता है। फिर एक बार आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। भारत माता की जय, वंदे मातरम।