भारत-चीन युद्ध की आहट से जर्मनी, इटली, ब्राजील समेत इन देशों की 1000 कंपनियों ने चीन छोड़कर भारत आने का फैसला किया!

नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच युद्ध की आहट के दौरान यूरोप के कई देशों की करीब 1000 कंपनियों ने ड्रेगन से तौबा कर ली है। सामने आया कि ये कंपनियां चीन छोड़कर भारत आने का निर्णय कर चुकी हैं।

इटली, जर्मनी, ब्राजील, ब्रिटेन, ब्राजील समेत यूरोप के एक दर्जन देशों की एक हज़ार से ज्यादा कंपनियां चीन को छोड़कर कारोबार करने के लिए भारत आने का फैसला कर इसपर काम शुरू कर चुकी हैं।

चीन में सबसे ज्यादा कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक, बाइक उपकरण, मोबाइल फोन निर्माण, एंटीबायोटिक दवाओं समेत प्लास्टिक खिलौने बनाने का काम करती हैं।

चीन में क्यों काम करती है ये कंपनियां?

चीन में पिछले 2 दशक में दुनिया के बड़े विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कारोबार किया है। चीन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को बिजली, टैक्स और जरूरी संसाधनों को मुहैया करवाने का काम किया है।

भले ही चीन 1950 में, यानी भारत के 1947 से 3 साल बाद आज़ाद हुआ हो, किन्तु विकास के मामले में उसने भारत से आगे निकलने और भारत को ही बाजार बनाने का काम कर दिया।

भारत सरकार ने बदले नियम और कानून

इस बीच कोरोनावायरस की वैश्विक महामारी के दौरान जब भारत में श्रमिकों का पलायन हुआ और बड़े पैमाने पर प्रदेश में हाहाकार मचा, तब भारत सरकार ने न केवल 21 लाख करोड रुपए का आर्थिक पैकेज जारी किया, बल्कि इसके साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में कारोबार के लिए आने हेतु नियम, कायदे और कानून में बड़ा बदलाव किया।

सबसे अविश्वसनीय देश हो गया है चीन

दरअसल यूरोप के जिन करीब एक दर्जन देशों की 1000 से ज्यादा कंपनियों ने चीन को छोड़कर भारत में कारोबार करने का फैसला किया है, उसके पीछे वैश्विक स्तर पर चीन की साख खराब होना है।

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आज पूरी दुनिया में कोरोनावायरस के कारण चीन पूरी तरह से बदनाम हो चुका है और विश्व का कोई भी विकसित देश और बहुराष्ट्रीय कंपनी उस पर विश्वास नहीं करती है। यही कारण है कि इन 1000 कंपनियों ने भारत आने का फैसला किया है।

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भारत-चीन युद्ध की आहट से जर्मनी, इटली, ब्राजील समेत इन देशों की 1000 कंपनियों ने चीन छोड़कर भारत आने का फैसला किया! 2

भारत में पूंजीवाद और समाजवाद का मिश्रण है

चीन से यूपी कंपनियों के पलायन का सबसे बड़ा कारण वहां पर कम्युनिज्म का प्रचार और पूंजीवाद का विस्तार है। दरअसल, चीन भले ही खुद को कम्युनिस्ट देश कहता हो, लेकिन पूरी दुनिया का सबसे खतरनाक पूंजीवादी देश चीनी ही है।

भारत की बात की जाए तो यहां पर पूंजीवाद, समाजवाद और कम्युनिज्म तीनों विचारधाराओं का मिश्रण है भारत में कभी भी पूंजी को प्राथमिकता नहीं दी गई। कम्युनिस्ट यहां पर बड़े पैमाने पर विचारधारा का प्रचार करते हैं, और रहते हैं। जबकि, समाजवाद भारत की मूल धारणा का हिस्सा है।

जनसंख्या विस्फोट भी भारत के लिए लाभप्रद होगा

चीन वैसे तो दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। क्योंकि चीन की जनसंख्या करीब 140 करोड़ है, तो दूसरी तरफ दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। आज भारत की जनसंख्या करीब 135 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

यह भी एक बहुत बड़ा कारण है कि यूरोप की बड़ी कंपनियां चीन को छोड़कर भारत में अपना कारोबार करना चाहती है, क्योंकि इन कंपनियों को न केवल भारत में उत्पादन करना आसान होगा, बल्कि इसके साथ ही खपत के लिए भी घरेलू बाजार मिल जाएगा।