भारत-चीन युद्ध हुआ तो अमेरिका, जापान, इस्राइल समेत ये देश खुलेआम भारत की तरफ से लड़ेंगे?

नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच युद्ध की स्थितियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बीती 15 जून को चीन के सैनिकों द्वारा घात लगाकर शस्त्रहीन भारत के सैनिकों पर हमला करने और इसके चलते भारत के 20 सैनिक शहीद होने के बाद देशभर में चीन के खिलाफ भयानक गुस्सा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा स्पष्ट तौर पर चीन को यह कह कर जवाब दे दिया गया है कि भारत अपनी 1 इंच जमीन भी किसी देश को नहीं देगा और अपनी संप्रभुता के लिए किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा।

प्रधानमंत्री ने यह बात 15 जून की घटना के तीसरे दिन 17 जून को और 19 जून को सर्वदलीय बैठक के बाद सभी राजनीतिक दलों को संबोधित करते हुए स्पष्ट तौर पर कही कि भारत की 1 इंच जमीन भी किसी ने नहीं हथियाई है और ना ही किसी को हथियाने देंगे।

प्रधानमंत्री के द्वारा कड़े शब्दों में चीन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है की भारत के वीर सैनिकों की शहादत बेकार नहीं जाएगी और इसका पूरा बदला लिया जाएगा।

जब भी मोदी ने हुंकार भरी है तब कार्रवाई की है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा साल 2014 से लेकर अब तक 6 साल के दौरान जब भी सार्वजनिक तौर पर इस तरह की हुंकार भरी है, तब बड़ी कार्रवाई की गई है। पाकिस्तान पर दो बार ट्राई करना और समय-समय पर मुंहतोड़ जवाब देना इसका जीता जागता उदाहरण है।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री के द्वारा जिस तरह से सार्वजनिक तौर पर चीन को चेतावनी देते हुए भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं करने और भारत के वीर सैनिकों के शहीद होने पर उसका बदला लिए जाने की घोषणा की गई है, उससे चीन समेत दुनिया के कई राष्ट्र चिंतित हैं।

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भारत चीन में कौन पड़ेगा भारी

अगर भारत और चीन के बीच युद्ध की स्थिति बनती है तो शास्त्रों के आधार पर चीन का पलड़ा भारी पड़ता है। लेकिन सैन्य बल को देखा जाए तो भारत चीन से काफी आगे है और उसके बाद भी चीन की काफी सैनिक सकते रूस की सीमा के अलावा कई अन्य देशों की सीमाओं पर तैनात है, जिन को हटाया नहीं जा सकता।

अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान, इजरायल, भारत के साथ

चीन के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भारत के साथ विश्व की महाशक्ति अमेरिका, तकनीकी रूप से सबसे ज्यादा सक्षम जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसा देश, ताइवान जैसा सैन्य शक्ति वाला राष्ट्र, इजरायल जैसा अत्याधुनिक तकनीकों से लैस देश भारत के साथ खड़ा है। इन देशों ने चीन के साथ तनाव के बाद भारत का साथ देने का खुलेआम ऐलान कर दिया है।

इतना ही नहीं सामरिक दृष्टि से फिर उसके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भारत है। हालांकि, चीन और रूस की मित्रता है, किंतु भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदाता है। ऐसे में रूस या तो भारत का साथ देगा या फिर तटस्थ रहेगा।

यूरोपीय देश चीन से बदला लेना चाहते हैं

यूरोपीय देशों की बात की जाए तो फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूनाइटेड किंगडम अभी तक चीन को सबक सिखाने के लिए तैयार बैठे हैं। कोरोनावायरस फैलाने और उसकी समय पर जानकारी नहीं देने के कारण यह सभी राष्ट्र चीन के खिलाफ हैं और युद्ध की स्थिति में भारत का साथ देने के लिए तैयार हैं।

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चीन के साथ पाकिस्तान जैसे राष्ट्र

एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था कि आप सब कुछ बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते। भारत के पड़ोसी राष्ट्रों में पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, ये सभी ऐसे राष्ट्र हैं, जो या तो चीन का साथ देंगे या फिर तटस्थ रहकर युद्ध का माहौल देखेंगे।

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चीन के विस्तार वादी नीति उसकी सबसे बड़ी दुश्मन

भले ही भारत करीब 900 साल तक गुलाम रहा, लेकिन भारत ने कभी भी आगे बढ़कर किसी भी छोटे या बड़े राष्ट्र के ऊपर हमला नहीं किया। जबकि भारत के 3 साल बाद आजाद हुए चीन के द्वारा अब तक आधा दर्जन देशों की स्वतंत्रता हर लिए जाने का सीधा आरोप है।

चीन के विस्तारवादी नीति के कारण ही उसके सभी पड़ोसी राष्ट्र उसके दुश्मन बन गए हैं, जिनमें रूस जैसा मुल्क भी है और ताइवान जैसा सैन्यबल वाला देश भी है। इसके अलावा मंगोलिया जैसा परतंत्र देश, तिब्बत जैसा आजादी के लिए लड़ रहा सांस्कृतिक देश और तुर्किस्तान जैसा गुलाम देश में चीन से छुटकारा पाने के लिए तड़प रहा है।

किसी भी सूरत में भारत से नहीं जीत पाएगा चीन

तमाम स्थितियों का आकलन किया जाए तो चाहे अत्याधुनिक हथियारों की बात की जाए या फिर सैनिक शक्ति की बात की जाए, भारत के साथ मुकाबला करने के लिए चीन किसी भी हालत में सक्षम नहीं है।

1962 के युद्ध की स्थिति से बिल्कुल प्रतिकूल है मामला

इससे पहले भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध हुआ था तभी भारत को हार का सामना करना पड़ा था। भारत की करीब 30000 वर्ग किलोमीटर किलोमीटर की जमीन अक्साई चीन के रूप में चीन ने कब्जा कर रखी है।

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तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा दे रहे थे, और चीन ने पीठ में छुरा घूमते हुए भारत पर हमला कर दिया था। दुनिया के किसी भी देश ने तब भारत का साथ नहीं दिया था। परिणामस्वरूप भारत को अपनी हजारों सैनिकों के साथ हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन भी गंवानी पड़ी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति में फंसा चीन!

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने विश्व के तकरीबन सभी देशों की यात्राएं की और सामरिक दृष्टि से देश को मजबूत करते हुए दुनिया के बड़े-बड़े देशों को मित्र राष्ट्र बनाने का कार्य किया। परिणाम यह हुआ कि आज दुनिया के अधिकांश शक्तिशाली राष्ट्र भारत के साथ खुलकर खड़े हैं।

रणनीतिक तौर पर देखा जाए तो भारत आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक देशों में माना जाता है। अमेरिका से लेकर जापान और इजराइल से लेकर ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब से लेकर कई मुस्लिम राष्ट्र आज नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं।