भारत-ऑस्ट्रेलिया डिफेंस समझौते से चीन काफी भन्नाया हुआ है, आखिर क्यों?

नेशनल दुनिया, नई दिल्ली।

भारत ऑस्ट्रेलिया के बीच डिफेंस समझौते से चीन काफी भन्नाया हुआ है। इस शनिवार को भारत और चीन के बीच होने जा रही सीमा वार्ता की पूर्व संध्या पर खबर मिली है कि चीन लद्दाख और उत्तरी सिक्किम के विवादित क्षेत्र में सैनिक जमा कर रहा है।

समझा जा सकता है कि भारत पर दबाव बनाने के लिए चीन सीमा विवाद पर कभी नरम और कभी गर्म रुख अपना रहा है, जहां गत सप्ताह चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि बॉर्डर पर सैनिक नियंत्रण योग्य तथा स्थिर हैं, लेकिन इसके बावजूद भी चेन सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है।

अपनी तरफ से भारत में भी ऑस्ट्रेलिया के साथ सुरक्षा संधि करके अपना खेल जोरदार तरीके से खेला है। इस संधि की घोषणा गुरुवार को कर दी गई है।

हालिया कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया चीन के लिए सबसे ज्यादा दुखती रगों में से एक बनकर उभरा है। कोरोना महामारी के उद्गम तथा चीन द्वारा इसे संभाल ले जाने के बारे में जिन देशों ने निष्पक्ष जांच की मांग सबसे पहले की थी, उनमें ऑस्ट्रेलिया भी प्रमुख है।

इस बीच चीन ने जहां शुरू से ही ऐसे किसी जांच के लिए अनुमति देने से इंकार कर दिया, लेकिन इसमें 1 माह के शुरू में हुई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की वार्षिक बैठक में चीन ने अधिक समझौतावादी रुख अपनाया।

लेकिन ऑस्ट्रेलिया को होने वाले सभी निर्यात को रोककर चीन ने सार्वजनिक रूप से ऑस्ट्रेलिया के कदम पर अपनी नाराजगी जाहिर करना जारी रखा। जिसने ऑस्ट्रेलिया को काफी तनाव में ला दिया।

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लेकिन इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया महामारी की जांच किए जाने पर जोर देने की इस बिंदु पर भारत ऑस्ट्रेलिया के बीच संधि की घोषणा हिमालय की सीमाओं पर झगड़ों के संदर्भ में कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसके अलावा अपने सरकारी पत्र ग्लोबल टाइम्स के जरिए अपनी सैन्य ताकत का बखान कर रहा है। चीन ने आयुध प्रणालियों का उल्लेख किया है, जो उसके पास है।

ग्लोबल टाइम्स में उन आधुनिक हथियारों को दिखाया जा रहा है, जो सीमा क्षेत्र में ऊंचाई पर स्थित क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है।

चीन यह कह रहा है कि यह तैयारियां इलाके में भारत द्वारा बड़े रोड नेटवर्क विस्तार तथा अन्य सुविधाओं के जवाब में वर्षों की अनदेखी के बाद भारत ने सैनिकों तथा हथियारों और गोला-बारूद को तेजी से पहुंचाना सुलभ बनाने के लिए ऊंचाई वाले इलाकों में भी सड़कें बनाना शुरू कर दिया है।

इसमें चीन को नाराज कर दिया है और अब भारत को दबाने के लिए अपनी ताकत दिखाने का प्रयास कर रहा है। हाल के समय में सीमा पर आमना-सामना होने की घटनाओं की तीव्रता तथा आवर्ती बढ़ गई है।

दोनों देशों के बीच भूटान के डोकलाम क्षेत्र में एक बड़ा झगड़ा हुआ था, जहां चीन ने भूटान के सीमा क्षेत्र में सड़के बनाने का प्रयास किया था। भारत भूटान के इन इलाकों में तेजी से पहुंचा था और इस क्षेत्र में चीन की आधारभूत संरचना निर्माण की गतिविधियों को शुरू होने से पहले ही रोक दिया गया था।

डोकलाम में चीन की सड़कें पास में स्थित भारत के कमजोर बिंदु, उस तथाकथित चिकन क्षेत्र को सीधे देखती थी, जो उत्तर पूर्व तथा शेष भारत के बीच की एकमात्र जीवन रेखा है।

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डोकलाम में रोक लिए जाने के बाद चीन ने अपने क्षेत्र में कुछ अंदर अन्य आधारभूत संरचनाएं बनाई। ऊंचाई पर स्थित इलाकों में बार-बार हो रही हैं और ऐसे गहरे मतभेद हैं, जो अभी तक दूर नहीं किए जा सके सीमा पर विस्तार एक स्वीकार नहीं किया गया है।

जहां चीन दावा करता है कि वह केवल 2138 किलोमीटर लंबी है। भारत के अनुसार यह गणना 1500 किलोमीटर अधिक लम्बी है। दोनों पक्षों के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा भी हमेशा एक सी नहीं रहती है।

अब चीन अपने लोगों तक को विवादित क्षेत्रों में बसाने के लिए लाने लगा है। बार-बार दावे और प्रति दावे करके अपने प्रतिपक्षियों को धोखा देने की चीन की रणनीति को मात देने के लिए बाहर को निश्चित रूप से एक मजबूत रुख सामने रखना होगा।