केंद्र सरकार की खिलाफत में कई बार भारतीय मजदूर संघ गंभीर लगता है

नेशनल दुनिया नई दिल्ली।

कोरोनावायरस महामारी के कारण अति खराब हालत में पहुंच चुकी देश की गड़बड़ अर्थव्यवस्था को संकट से बाहर निकालने के लिए केंद्र सरकार ने इसके लिए निजी करण का रास्ता अपनाया है।

इन प्रयासों के बीच नरेंद्र मोदी सरकार को अपनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है भारतीय मजदूर संघ जोकि आरएसएस से संबंधित यूनियन है, ने सरकार की आक्रामक निजीकरण की मुहिम का विरोध करने के लिए 10 जून को देशव्यापी आंदोलन करने का कार्यक्रम घोषित किया है।

यह विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय भारतीय मजदूर संघ की सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को दो दिवसीय नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक में लिया गया है। यह बैठक मंगलवार और बुधवार को हुई थी।

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कोरोनावायरस कि विस्फोट के कारण देश अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई है। इसके चलते संभावना है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश करने जा रही है। इसमें नवरत्न अथवा मिनी रत्न कंपनियां भी शामिल हैं और ऐसी स्थिति में इनके अनेक खरीदार मिल जाएंगे।

हालांकि भारतीय मजदूर संघ का धमकी देने का यह अंदाज और समय काफी मायने रखता है। यूनियन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस सरकार को उसकी पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा अर्जित की गई राष्ट्र की संपत्तियों को बेचने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

भारतीय मजदूर संघ उस समय तक संघर्ष करती रहेगी, जब तक वह सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के खिलाफ एवं श्रमिक विरोधी निर्णय लेने से रोक नहीं देती है।

नरेंद्र मोदी सरकार अपने शासनकाल के दूसरे कार्यकाल में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का विनिवेश करने की योजना को आगे बढ़ा रही है।

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विनिवेश के क्षेत्र जैसे दूरसंचार, ऊर्जा, भारी इंजीनियरिंग, तेल एवं गैस, केमिकल और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं रेलवे की पीएसयू और आरआईटीपीएस और कॉनकॉर के भी प्रस्ताव शामिल हैं, जिसकी रुचि नहीं है।

यद्यपि कांग्रेस वामपंथी पार्टियां से संबंध श्रमिक यूनियन सरकार के इन कदमों का विरोध करती रही हैं, परंतु यह काफी बात है कि अब भारतीय मजदूर संघ सरकार की इस तथाकथित नीति के मामले में विरोध करने के लिए खुलकर सामने आ गई है।

भारतीय मजदूर संघ ने अपने बयान में यह भी कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था में क्षेत्र के उपक्रम का योगदान काफी महत्वपूर्ण है, परंतु सरकार मजदूरों पर निर्णय की कोशिश कर रही है।

सरकार के सलाहकारों के पास राजस्व उत्पन्न करने वाले विचारों का अभाव है। अतः वे लोग सरकार को कॉर्पोरेट करने की सलाह दे रहे हैं।

इस प्रकार के नरभक्षी सलाहकार देश के हितों के खिलाफ कार्य कर रहे हैं। यूनियन ने सरकार को सुझाव दिया है कि वे राजस्व घाटे की भरपाई और अर्जित करने के अन्य दूसरे तरीके तलाश करें।