पहली बार लोकसभा गए, पहली बार मंत्री बने और पहली ही बार में लिख दी अमर गाथा, कौन हैं मोदी सरकार का यह सबसे पॉवर फुल मिनिस्टर?

नेशनल दुनिया, नई दिल्ली।

धारा 370 और 35a हटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी वर्षों से लड़ाई लड़ रही थी। अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए 541 साल से केस चल रहा था।

आजादी के बाद पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं सिखों, ईसाइयों, जैनियों समेत पारसियों का शोषण हो रहा था, उनके ऊपर अत्याचार हो रहा था, लेकिन भारत सरकार ने कभी इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया।

भारत के पहले गृहमंत्री लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के द्वारा जिस उम्मीद और जुनून के साथ देश की 565 अलग-अलग रियासतों को एक करके अखंड भारत का निर्माण किया गया था, उसके पुराने टूटे हुए टुकड़ों और उस देश को अखंड बनाने के लिए किसी दूसरे गृहमंत्री ने कार्य नहीं किया।

अमर फैसलों का गवाह बनी यह पीढ़ी

लगातार बेहतर साल तक देश में धारा 370, राम मंदिर, समान नागरिक संहिता, जनसंख्या नियंत्रण कानून और दूसरे देशों में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भारतीय जनता पार्टी आवाज उठाती रही है, लेकिन किसी भी सरकार ने इन मांगों को पूरा नहीं किया।

साल 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी वाली पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो देश के हिंदुओं में राम मंदिर बनाने, समान नागरिक संहिता लाने, जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने, जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार रोकने की बड़ी उम्मीदें थी, लेकिन इनमें से एक भी पूरी नहीं हुई।

282 से 303 जीतीं

इसके बाद साल 2019 में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रिकॉर्ड जीत करते हुए 303 सीटों के साथ भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली दूसरी बार सरकार बनी। इस बार भाजपा ने अपने अध्यक्ष अमित शाह को पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की जगह गांधीनगर सीट से टिकट दिया और जिताया।

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क्या है राजनीतिक जीवन

अमित शाह के बारे में आपको आगे बताएं, इससे पहले यह जानना जरूरी है की उन्होंने इससे पहले राजनीतिक तौर पर क्या कुछ हासिल किया था? क्या लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेता के संसदीय क्षेत्र से किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया जा सकता था, जो केवल एक पार्टी का कार्यकर्ता था?

दिग्गज नेताओं का काम संभाला

अमित शाह ने 1987 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। इसके बाद उनको बड़ी जिम्मेदारी मिली 1991 के वक्त जब लालकृष्ण आडवाणी के गांधीनगर चुनाव की उनको जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद एक बार फिर से अटल बिहारी वाजपेई जैसे नेता ने जब 1996 में गुजरात से चुनाव लड़ा, तब उनको दूसरी बार बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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1996 तक अमित शाह भारतीय जनता पार्टी की तन-मन-धन से सेवा करते रहे। पेशे से स्टॉक ब्रोकर अमित शाह को पहली बार 1997 के दौरान गुजरात की सरखेज विधानसभा सीट से उप चुनाव के वक्त टिकट देकर मैदान में उतारा गया।

4 बार विधायक जीते

इसके बाद उन्होंने 1998 में दूसरी, 2003 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सरखेज तीसरी, 2007 में चौथी बार जीत हासिल की। उससे पहले 1999 के दौरान उन्होंने अहमदाबाद डिस्टिक कोऑपरेटिव बैंक का चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने। 2003 से लेकर 2010 तक नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात के गृह मंत्री का पद संभाला।

छोड़ना पड़ा पद

2010 में उनको इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि इशरत जहां मुठभेड़ कांड में उनका नाम आने के कारण पार्टी ने उनको जांच का सामना करने के लिए कहा। 15 मई 2014 को उनको सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले से बरी कर दिया।

भाजपा को 2 से 282 पर पहुंचा दिया

इससे पहले 2013 में उनको उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। 80 सीटों वाले सबसे बड़े राज्य में जहां 2014 तक भाजपा केवल 10 सीट जीत पाई थी, वहां पर अमित शाह के करिश्माई नेतृत्व के चलते 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 71 सीटों पर जीत हासिल की।

इतिहास बनाकर अध्यक्ष बन गए

2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के दम पर ही भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों के साथ पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया। केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, जिसका सपना भाजपा अपनी स्थापना 1982 के वक्त से देख रही थी।

इसका नतीजा यह हुआ कि अमित शाह का कद बढ़कर राष्ट्रीय स्तर का हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद पार्टी में वह दो नंबर के बन गए और उनको पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया, जो 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तक रहे।

राज्यसभा सदस्य बने

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2018 में गुजरात की एक राज्यसभा सीट से अमित शाह को चुनाव लड़ाया गया और पहली बार संसद सदस्य बनने का गौरव हासिल हुआ। हालांकि उनको मंत्री नहीं बनाया गया।

पहली बार में ही गृहमंत्री बन गए

मई 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत हासिल की। इस बार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने अपने सबसे विश्वासपात्र व्यक्ति अमित शाह को देश का गृहमंत्री बनाया।

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अमित शाह को गृह मंत्री बनाए जाने के कारण भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किए जाने की चर्चा भी खूब हुई। लेकिन अगले 6 महीने के दौरान ही अमित शाह ने संसद में ताबड़तोड़ तीन बड़े कानून बनाने के कारण सबका मुंह बंद कर दिया।

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72 साल का विवाद खत्म किया

जम्मू कश्मीर में धारा 370, जो कि भारतीय संविधान के लिए ही एक नासूर बन गई थी, उसको एक झटके में खत्म करके जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राज्य का गठन किया और उसकी जगह जम्मू कश्मीर और लद्दाख के रूप में केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।

370 ने बनाया हीरो

गृह मंत्री बनने के बाद अमित शाह का यह पहला बड़ा कदम था जिसका नए केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के द्वारा भी उनकी काफी प्रशंसा हुई। बड़ी ही सूझबूझ के साथ जम्मू कश्मीर के इस नासूर बने विवाद को अमित शाह ने लोह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल बनते हुए हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

लेकिन शायद अमित शाह कार रुकना यहीं पर नाकाफी था। उन्होंने तुरंत प्रभाव से दूसरा बड़ा कदम उठाते हुए नागरिकता संशोधन कानून बनाया। इसके कारण देशभर में जगह-जगह धरने और विरोध प्रदर्शन हुए वामपंथी संगठनों और कांग्रेस के द्वारा सरकार को मुस्लिम विरोधी करार दिए जाने की भरकस कोशिश की गई।

राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ

हालांकि इसको सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की सफलता नहीं कहा जा सकता, लेकिन जिस तरह से न्यायपालिका के समक्ष सबूतों के आधार पर केंद्र सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में फैसला करवाने में सफलता हासिल की, वह अद्भुत और अतुलनीय था।

541 साल पुराने इस विवाद को खत्म करना इतना आसान नहीं था। पूरी 67 एकड़ जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई, लेकिन इसके साथ ही देश में गृहयुद्ध होने की पूरी संभावना थी। गृह मंत्री होने के नाते यह जिम्मेदारी अमित शाह के कंधे पर थी, उन्होंने इस जिम्मेदारी को शिद्दत के साथ निभाते हुए विवाद को समाप्त कर दिया।

नागरिकता संसोधन कानून

गृहमंत्री अमित शाह की तब आलोचना होती हुई नजर आई, जब केवल 6 महीने के दौरान ही तीसरा बड़ा फैसला लेते हुए नागरिकता संशोधन कानून पास किया गया। इसके जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में बसे हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक लोगों को भारत की नागरिकता दिए जाने का रास्ता खोल दिया गया।

इस कानून को बनाने के कारण देशभर में वामपंथी संगठनों, कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के द्वारा केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की गई। यहां तक कि नरेंद्र मोदी सरकार को मुस्लिम विरोधी करार दे दिया गया।

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दिल्ली दंगों को खत्म किया

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान जब चीन के द्वारा फंडिंग किए जाने के कारण वामपंथी संगठनों से जुड़े लोगों के द्वारा दिल्ली में दंगे करवाए गए, तब भी अमित शाह की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हुए, लेकिन उन्होंने संसद के भीतर जिस बेबाकी से और तथ्यात्मक रूप से जवाब दिया उससे उनकी छवि में और निखार आया।

कोरोना के वक्त की पूरी ड्यूटी

हालांकि, इसके बाद मार्च में कोविड-19 की वैश्विक महामारी के चलते देश में लॉक डाउन का ऐलान कर दिया गया और एक बार फिर से गृह मंत्री होने के नाते अमित शाह पर बड़ी जिम्मेदारी आ पड़ी। उन्होंने शिद्दत के साथ इस जिम्मेदारी को निभाते हुए पूरे देश में कानून व्यवस्था बनाए रखने में महती भूमिका निभाई।

इसी दौरान मई महीने में जबकि नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार अपने कार्यकाल का 1 वर्ष पूरा कर रही है, तब चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान की तरफ से लगातार सीजफ़ायर किए जाने के कारण गृह मंत्री अमित शाह एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं।

क्या कर रहें ये चारों?

बताया तो यहां तक जा रहा है कि चीन के साथ विवाद निपटाने और पाकिस्तान के पीओके और गिलगित बालटिस्तान को वापस लिए जाने के लिए नरेंद्र मोदी के खास सिपहसालार गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर और सीडीएस विपिन सिंह रावत एक खास रणनीति पर काम कर रहे हैं।

लौह पुरुष के रूप में विख्यात हो गए अमित शाह

1 साल के सफल कार्यकाल के कारण और एक के बाद एक 5 बड़े असम्भव नजर आने वाले फैसले सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया जाने के कारण गृह मंत्री अमित शाह को पहले गृहमंत्री लोह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के समकक्ष कहा जाने लगा है।

इन फैसलों पर है सबकी नजर

नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार के 4 साल बाकी है और पूरी संभावना है कि अमित शाह को लगातार 4 साल तक गृह मंत्री का पद संभालना है। इस दौरान मोदी सरकार की नजर समान नागरिक संहिता, जनसंख्या नियंत्रण कानून, पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद पीओके को वापस लेने, गिलगित-बालटिस्तान को खाली करवाने और चीन के साथ अक्साई चीन विवाद को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।