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बुधवार, जून 3, 2020

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे जीता सिंधी समाज का दिल

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गोरखपुर।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मोहद्दीपुर-जंगल कौड़िया फोरलेन के निर्माण की सीमा में गोरखनाथ सिंधी कलोनी स्थित झूलेलाल मंदिर भी आ रहा है।

एक दो दिन में यह मंदिर भी टूट जाएगा। इसे लेकर सिंधी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की है।

जिसके बाद मुख्यमंत्री से उन्हे अश्वासन मिला है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों से कहा कि वे नगर आयुक्त एवं जिलाधिकारी से मिल कर अपना मांग पत्र सौंप दें।

सिंधी समाज के पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश कर्मचंदानी ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को गोरखनाथ स्थित झूलेलाल मंदिर के सड़क निर्माण में आने की जानकारी दी और मांग की कि मंदिर निर्माण के लिए जगह दी जाए।

मुख्यमंत्री ने ओम प्रकाश और मनोनीत पार्षद लक्ष्मण नारंग को आश्वस्त किया कि गोरखनाथ प्राथमिक विद्यालय के निकट नगर निगम की 3500 वर्गफीट जमीन मंदिर के लिए आवंटित की जाएगी।

आवंटन की प्रक्रिया के लिए डीएम के विजयेंद्र पांडियन और नगर आयुक्त अंजनी सिंह को मांग पत्र सौंपने के निर्देश दिए।

प्रतिनिधि मंडल को उम्मीद है कि गोरखनाथ प्राथमिक विद्यालय के निकट नगर निगम की 3500 वर्गफीट जमीन मंदिर के लिए आवंटित की जाएगी।

गोरखनाथ मंदिर से धर्मशाला जाने वाली रोड पर लबे सडक पूरब की ओर झूलेलाल का मंदिर है।

सड़क के दोनों ओर सिंधी समाज के लोगों की आबादी। ये सभी लोग विभाजन के समय यहां आए और अपनी मेहनत के बूते खास मुकाम बनाया।

ईंट-भट्ठों और बेकरी के कारोबार में तो इस समुदाय का तकरीबन एकाधिकार है। इस समुदाय का यही एक मात्र मंदिर है।

मालूम हो कि सिंधी समाज का गोरक्षपीठ से पुराना रिश्ता है। बंटवारे के बाद अपना सब कुछ गंवा कर यहां आने वाले समाज के लोगों ने तबके गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को 1951 में झूलेलाल महोत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

उस समय अपने संबोधन में उन्होंने समाज के लोगों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आप लोग शरणार्थी नहीं विजेता हैं।

जालिमों से संघर्ष कर यहां तक आने वाला विजेता ही होता है। आज से आपकी कलोनी का नाम विजयनगर रहेगा।

गोरक्षपीठ से तब से शुरू अपनत्व का रिश्ता तीन पीढियों से कायम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उदारता से इस रिश्ते का एक और नया आयाम मिल गया।

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Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिया संपादक .

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