आत्मनिर्भर भारत अभियान: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने चौथे दिन 11 बिंदुओं में ढांचागत विकास का रोडमैप बताया

नेशनल दुनिया, नई दिल्ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मंगलवार को 20 लाख करोड़ो रुपए के राहत पैकेज की घोषणा के जाने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत अभियान में आज चौथे दिन ढांचागत विकास का रोड मैप बताया।

पॉलिसी रिफॉर्म्स फॉर फास्ट ट्रैक इन्वेस्टमेंट एफोर्ट टुवर्ड्स के जरिये आत्मनिर्भर भारत को मेक इन इंडिया से जोड़ा जाएगा। इसके तहत केंद्र सरकार राज्य सरकारों को निवेश के मामले में रैंकिंग प्रदान करेगी।

उद्योगों को रैंकिंग दी जाएगी

देश के 3375 इंडस्ट्रियल पार्क स्टेटस, सेज भी शामिल है जो कि 500000 हेक्टेयर में फैले हुए हैं। इन सभी को ऑल इंडस्ट्रीज पार्क को 2020-2021 रैंकिंग किया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार ने रिफॉर्म पर फोकस किया है। इसके साथ ही परफॉर्म के आधार पर इंडस्ट्रीज को रैंकिंग दी जाएगी। ट्रांसफार्म के लिए अनेक बदलाव किए जाएंगे।

हर मंत्रालय में निवेश सेल बनेगी

विदेशी निवेश और देसी निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय में एक अलग से सेल बनेगी, जो यह देखेगी कि निवेश करने वाले को किसी तरह की दिक्कत नहीं आनी चाहिए। इसके साथ ही राज्यों की रैंकिंग में निर्धारित की जाएगी।

उद्योगों के लिए जमीन ऑनलाइन उपलब्ध होगी

राज्य सरकार को बेहतर औद्योगिक वातावरण के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी और उसी के आधार पर राज्यों को इंसेंटिव भी दिया जाएगा। देश के 3376 इंडस्ट्रीज जो कि 500000 हेक्टेयर में फैले हुए हैं, उन सब की जानकारी ऑनलाइन मिलेगी। निवेशकों को राज्य में जमीन उपलब्ध करवाने के लिए इसको मिशन मोड पर अंजाम दिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने कोयले के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कोयले का प्रति टन मूल्य तय किया जाएगा। इसको किसी भी औद्योगिक इकाई या किसी भी उद्योगपति को बेचा जा सकता है। 50 कॉल ब्लॉक्स को तुरंत प्रभाव से आवंटित करने का काम किया जाएगा।

कोयले को ओपन मार्केट में बेचा जाएगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि दुनिया के 3 बड़े कोयला उत्पादक देशों में से भारत एक है और इसके उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। पहले केवल स्टील उत्पादन और बिजली उत्पादन वालों को ही कोयला दिया जाता था, लेकिन अब ओपन मार्केट में कोयला बेची जाएगा।

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इसके अलावा जो खदान कुछ मात्रा में खनन किए जा चुके हैं, और बंद पड़े हैं, उनको भी आवंटित किए जाने का कार्य किया जाएगा। इन सभी खदानों को निजी क्षेत्र के निवेशकों को भी दिए जाने पर कार्य किया। जो निवेशक खनन कार्य को पहले करेंगे उनको इन्वेस्टमेंट भी दिया जाएगा। कोयला खनन के लिए 50000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

खनिज क्षेत्र में मार्किट को खोला जाएगा

खनिज सेक्टर में भी अब प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आमंत्रित किया जाएगा। देश के 500 माइनिंग ब्लॉक्स को ओपन मार्केट में ट्रांस्प्रेंट ऑक्शन के जरिए प्रोसेस किया जाएगा। बॉक्साइट और कोयले की जो खदानें हैं, उनके ब्लॉग को जॉइंट ऑक्शन के जरिए नीलाम किया जाएगा। मिनरल इंडेक्स बनाया जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डिफेंस के क्षेत्र में प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा। मेक इन इंडिया के तहत हथियार बनाने को बढ़ावा दिया जाएगा और धीरे-धीरे प्रतिवर्ष हथियारों के एयरपोर्ट को प्रतिबंधित किया जाएगा। स्थानीय प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए बजट उपलब्ध करवाया जाएगा और डिफेंस इंपोर्ट के बिल को कम किया जाएगा।

इसके लिए कॉरपोरेशन ऑफ ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का गठन किया गया है जिसके तहत अकाउंटेबिलिटी, ऑटोमनी, एफिशिएंसी और ऑर्डिनेंस सप्लाई का कार्य किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि प्राइवेटाइजेशन नहीं होगा, बल्कि और कॉर्पोरेटटाइजेशन होगा।

रक्षा क्षेत्र में एफडीआई 49% से बढ़ाकर 74% किया जाएगा

अब डिफेंस के लिए हथियार बनाने हेतु डिफेंस सेक्टर में भी फॉरेन डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट को 49% से बढ़ाकर 74% किया गया। समय में प्रतिबंधित हथियारों का निर्माण कार्य किए जाने पर जोर दिया जाएगा। इन सारे रिफॉर्म्स से डिफेंस के सेक्टर में आत्मनिर्भर हो सकेगा।

हथियारों को सूचीबद्ध किया जाएगा और आयात को प्रतिबंधित किया जाएगा

हथियारों को सूचीबद्ध किया जाएगा और प्रतिवर्ष समय-समय पर हथियारों के आयात पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, ताकि अधिकतर हथियारों का निर्माण भारत में भी हो सके। मतलब धीरे-धीरे भारत हथियार निर्माण के मामले में आत्मनिर्भर होगा। इससे सुरक्षा बजट में भी कमी आएगी।

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ऑर्डिनेंस बोर्ड की जगह निगम बनाया जाएगा

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण किया जाएगा, निजीकरण नहीं किया जाएगा। इससे सेना को अच्छे हथियार मिलेंगे और दुनिया के देशों पर हथियार खरीदने के लिए हमारी आत्मनिर्भरता कम होगी और हम पारदर्शी में बेहतर प्रदर्शन की तरफ आगे बढ़ने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का निगमीकरण किया जाएगा।

भले ही रक्षा के क्षेत्र में एफडीआई को 49% से 74% किया जा रहा हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनको छूट दी जाएगी, बल्कि समय की प्रतिबद्धता के साथ हथियार निर्माण और उनके टेस्टिंग का कार्य पूरा किया जाएगा।

हवाई क्षेत्र में बढ़ावा दिया जाएगा

विमानपत्तन क्षेत्र में 3 बड़े कदम उठाए गए हैं। आज की तारीख में 60% क्षेत्र ही भारतीय विमानों के लिए उपलब्ध है, इससे लंबे रास्ते लेने पड़ते हैं, समय अधिक लगता है और अधिक खर्च होता है। भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर इस मामले को निराकरण की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा, इससे 1000 करोड़ पर की बचत होगी।

6 एयरपोर्ट पीपीपी मोड पर दिए जाएंगे

स्त्री हवाई अड्डे बनाने के लिए प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप पर जोड़ दिया जाएगा। 6 हवाई अड्डों को पीपीपी मोड पर दिए जाने के बाद जहां पहले 540 रोड पर आता था, वहां पर अब करीब 1000 करोड़ पर आता है।

अब सरकार 3 हवाई अड्डों को और पीपीपी मोड पर देने जा रही है। पहले और दूसरे चरण में 12 हवाई अड्डों को पीपीपी मोड पर ले जाएगा, जिससे 13000 करोड रुपए का निवेश होगा।

मेंटेनेंस वाले विदेशी कंपनियों को भारत में आमंत्रित किया जाएगा

हवाई जहाजों के मेंटेनेंस के लिए देश में ही व्यवस्था की जा रही है जिसमें मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल शामिल है। इससे जो बड़ी कंपनियां मेंटेनेंस का कार्य करती है, वह भी भारत में आएगी और इनवेस्ट करेंगी। ऐसे एयरलाइंस की कोस्ट भी कम आएगी।

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बिजली क्षेत्र में सुधार की जाएंगे

विद्युत उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा। इससे उनकी लागत में कमी आएगी और उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध हो सकेगी। बिजली क्षेत्र में स्थिरता आएगी, इसमें अतिरिक्त खर्चे नहीं होंगे। समय पर भुगतान होगा। डीबीडी का नाम बिजली क्षेत्र में भी होगा।

बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण किया जाएगा

बिजली वितरण में सुधार हो इसके लिए निजीकरण किया जाएगा। इसके ढांचागत सुधार की तरफ ध्यान दिया जाएगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस को प्रमुखता से लागू किया जाएगा।

विज्ञान के क्षेत्र में 8100 करोड़ों का निवेश किया जाएगा

विज्ञान के क्षेत्र में प्राइवेट निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा। इसमें राज्यों का 30% और केंद्र का 30% हिस्सा निर्धारित किया गया है। इसके अलावा पूरा इन्वेस्टमेंट क्षेत्र से आमंत्रित किया जाएगा।

स्पेस एक्टिविटीज को बढ़ावा देने के लिए प्राइवेट सेक्टर को आमंत्रित किया जाएगा

अंतरिक्ष क्षेत्र की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्राइवेट पार्टनरशिप आमंत्रित किया जाएगा। स्पेस परीक्षण के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों का सहयोग लिया जाएगा और उनको भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा। स्पेस ट्रैवलिंग के लिए प्राइवेट सेक्टर को आगे लाया जाएगा। एक नीति बनाकर सेटेलाइट की सेक्टर में बदलाव लाएंगे।

नए ग्रहों की खोज हो, या अंतरिक्ष यात्रा को इसके लिए भी प्राइवेट सेक्टर को शामिल किया जाएगा। एंटरप्रेन्योर विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रह सके, इसके दिशा में भी पॉलिसी बनाई जाएगी।

एटॉमिक एनर्जी में भी पीपीपी मोड लागू किया जाएगा

एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप को लागू किया जाएगा। कैंसर की बीमारी हो या कोविड-19 के समय महामारी भारत ने दुनिया को बहुत कुछ देने का काम किया है।

कृषि के क्षेत्र में खाद्य संरक्षण केंद्र के लिए भी एटॉमिक एनर्जी को एक माध्यम बनाएंगे। इससे कृषि क्षेत्र को बल मिलेगा और हमारी भंडारण की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। शोध की सुविधाओं और नए उद्योगपतियों को भी इसका लाभ मिलेगा।