चीन को तहस-नहस कर देगी प्रधानमंत्री मोदी की योजना, भारत ही है चीन की अर्थव्यवस्था का आधार

नेशनल दुनिया, नई दिल्ली।

चीन की तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए कोविड-19 की वैश्विक महामारी महाकाल बनकर टूट पड़ी है। ऐसा लग रहा है कि स्वयं महाकाल, यानी भगवान शंकर चीन के लिए काल बन कर आए हैं।

सितंबर के महीने में जब कोरोनावायरस की बीमारी चीन के हुबेई प्रांत स्थित वुहान शहर में कहर बरसाना शुरू कर रही थी तब चीन ने दुनिया के किसी भी देश को इसके बारे में जानकारी नहीं दी। उसका परिणाम यह हुआ कि वहां से लोग दुनिया के कई बड़े राष्ट्रों में फैल गए।

आज की तारीख में दुनिया भर में 310000 से अधिक लोगों की कोरोनावायरस के चलते मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4800000 लोग कोविड-19 से पीड़ित हैं। चीन ने भले ही अपने यहां पर इस बीमारी को नियंत्रित कर लिया हो लेकिन अमेरिका जैसी महाशक्ति कोरोनावायरस के सामने घुटने टेक चुकी है।

भारत में भी कोरोनावायरस के कारण अब तक करीब 86000 लोग बीमार हो चुके हैं। यहां पर करीब 3000 लोगों की मौत हुई हो चुकी है। अमेरिका के अलावा इटली, फ्रांस, जर्मनी, रूस, ईरान जैसे राष्ट्र कोरोनावायरस की भयंकर चपेट में हैं।

वायरस के लिए जिम्मेदार है चीन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर इस बात को स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि कोरोनावायरस चीन का जैविक हथियार है और उसने इसका निर्माण बुहान शहर स्थित सरकारी लैब में किया है। अमेरिका के अलावा जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, फ्रांस और भारत में भी चीन पर इस वायरस को लेकर हमला बोला है।

अमेरिका समेटने लगा अपना कारोबार

अमेरिका ने कहा है कि उनकी 1000 कंपनियां जो आज की तारीख में चीन में कारोबार कर रही है, वो सभी वहां से बंद कर दी जाएगी और उनके लिए वैकल्पिक जगह तलाश की जा रही है, जिनमें भारत सबसे पहले स्थान पर है।

अमेरिका ने 1 दिन पहले ही चीन से पेंशन फंड के अरबों रुपए का निवेश भी वापस ले लिया है। अमेरिका ने कहा है कि अब वहां पर काम कर रही उनके सेंसेक्स कारोबार वाली कंपनियां ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और भारत में अपना भविष्य तलाशएगी।

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चीन के आयात पर अघोषित प्रतिबंध

इधर बाहर की तरफ से चीन को दोहरा झटका दिया गया है। पहला भारत ने स्पष्ट तौर पर चीन से होने वाले आयात पर करीब करीब प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि यह सभी प्रतिबंध कोविड-19 की वैश्विक महामारी के नाम पर लगाए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह प्रतिबंध आगे भी जारी रह सकते हैं।

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था में खर्च नहीं कर पा रही है इतना पैसा

दूसरे झटके के तौर पर भारत में आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मंगलवार को 20 लाख करोड़ पर का आर्थिक पैकेज जारी करते हुए पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि भारत अब अपनी जीडीपी का 10% खर्च देश को आत्मनिर्भर बनाने में खर्च करने जा रहा है।

भारत प्रतिवर्ष चीन को देता है 600 अरब डॉलर

आपको ज्ञात होगा कि भारत दुनिया से जितना आयात करता है, उसमें सबसे बड़ा हिस्सा चीन का होता है। चीन भी अपना निर्यात सर्वाधिक भारत को ही करता है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक प्रति वर्ष चीन भारत को करीब 600 अरब डॉलर पैसे ज्यादा के सामान निर्यात करता है।

आत्मनिर्भर भारत चीन के लिए सबसे बड़ा झटका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत ने आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू किया है। यदि भारत सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने में कामयाब हो पाती है तो यह है चीन के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। क्योंकि निर्यात से चीन के पास जितना भी विदेशी धन एकत्रित होता है, उसमें भारत का सबसे ज्यादा योगदान होता है।

अभी तक भारत की किसी भी सरकार ने देश के विकास के लिए और उसमें आमूलचूल परिवर्तन करने के लिए इतना बड़ा बजट खर्च नहीं किया है। पहली बार केंद्र की सरकार 20 लाख करोड़ रुपए का बजट खर्च कर रही है और यह लक्ष्य केवल 2 साल का रखा गया है।

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कृषि विकास और श्रमिकों के लिए रोजगार है प्रमुखता

जिस तरह से भारत सरकार ने लघु एवं कुटीर उद्योग, कृषि, मजदूर, प्रवासी श्रमिक, छोटे दुकानदार समेत तकरीबन सभी तरह के काम करने वाले लोगों के लिए बजट का प्रावधान किया है, वह अपने आपने बहुत बड़ी बात है।

उत्तर प्रदेश सरकार दे रही है रोजाना 50 लाख को रोजगार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के अलावा उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अपने श्रमिकों को दोबारा दूसरे राज्यों में भेजने को तैयार नहीं है। योगी सरकार उत्तर प्रदेश में ही हर दिन 50 लाख श्रमिकों को रोजगार देने के लिए योजना पर दिन रात काम कर रही है।

लघु एवं कुटीर उद्योग पर है जोर

केंद्र सरकार का सबसे ज्यादा ध्यान लघु एवं कुटीर उद्योग के अलावा कृषि पर है। सरकार चाहती है कि गांव गांव, कस्बे कस्बे, तहसील, जिला स्तर पर छोटे-छोटे उद्योग विकसित हो जाएं, प्रत्येक किसान आत्मनिर्भर हो जाएं, ताकि हर छोटी मोटी जरूरत की चीज स्थानीय स्तर पर बनाई जाए और वहीं पर उसकी मांग के अनुरूप सप्लाई कर दी जाए।

इलेक्ट्रॉनिक आइटम की खपत है सबसे बड़ी समस्या

क्योंकि भारत छोटी छोटी चीजों के लिए चेन की तरफ देखता है। चीन के यहां से भारत में कपड़े सिलने की सुई से लेकर हवाई जहाज तक आयात किया जाता है। भारत में सबसे ज्यादा आयात इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का है।

चीन में मोबाइल का बड़ा कारोबार

भारत सरकार चाहती है कि भारत में यहीं पर इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की कंपनियां स्थापित की जाए, ताकि घरेलू मांग को यहीं से पूरा किया जा सके। मोबाइल उद्योग भी चीन का भारत के पीछे चल रहा है। यदि भारत अपनी मांग के अनुरूप यहां पर मोबाइल बनाना शुरू करता है तो चीन को यह बहुत बड़ा झटका होगा।

लावा मोबाइल कंपनी भारत में आएगी

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भारत के उद्योगपति हरिओम राय की कंपनी लावा जल्दी ही अपना पूरा कारोबार चीन से समेट कर भारत में शुरू करने जा रही है। हरिओम राय का कहना है कि चीन आज भी इसीलिए उद्योग स्थापित करने में कामयाब हो पा रहा है।

क्योंकि वहां पर उद्योग के लिए बहुत रियायत है। अब भारत सरकार ने भी उद्योगों के लिए जो बदलाव किए हैं। उसके बाद उनको कारोबार करने के लिए चीन में जाने की जरूरत नहीं है।

200 करोड़ तक की टेंडर लोकल

इसी तरह से भारत सरकार ने 200 करोड रुपए तक के टेंडर ग्लोबल करने के बजाय लोकल करने का फैसला किया है। यानी 200 करोड रुपए तक के टेंडर के लिए भारत सरकार किसी भी विदेशी कंपनी को आमंत्रित नहीं करेगी, इसके लिए भारतीय कंपनियां हिस्सा लेगी।

देश का प्रत्येक नागरिक बन सकेगा सैनिक

इसके साथ ही भारतीय सेना ने भी तैयारी कर ली है। चीफ डिफेंस सर्विस के तौर पर पहली बार नियुक्त हुए विपिन सिंह रावत की पहल पर सेना की योजना पर काम कर रही है। जिसके अनुसार शार्ट सर्विस कमीशन की अवधि 3 साल की जा रही है।

अगर सेना का यह प्लान कामयाब होता है और भारत सरकार इसको मंजूरी देती है तो आने वाले समय में भारत के प्रत्येक व्यक्ति नागरिक को भारतीय सेना की वर्दी पहनने का अवसर प्राप्त हो सकता है। इसके के मुताबिक सेना पहले 3 साल तक का शार्ट सर्विस कमीशन देगी, उसके बाद यदि कोई योग्य व्यक्ति चाहेगा तो उसको नियमित कमीशन भी दिया जा सकेगा। इस तरह की प्रणाली अभी तक केवल अमेरिका और इजरायल में है।

सेना की योजना अगर स्वीकार कर ली जाती है और इसको अमलीजामा पहना दिया जाता है, तो आने वाले समय में भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना होगी। ऐसे समय में चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ भारत युद्ध करने के लिए तैयार हो सकेगा।