4.14 करोड़ में नीलाम हुई सद्गुरु की पेंटिग, ईशा के महामारी राहत कार्यों के लिए मिले

कोयंबटूर।

ईशा फाउण्डेशन के संस्थापक, सद्गुरु की एक अमूर्त पेंटिग 4.14 करोड़ की बिकी। 5 फुट x 5 फुट की इस कैनवास पेंटिग का शीर्षक है, ‘टू लिव टोटली!’ 

इस धनराशि का उपयोग ग्रामीण तमिलनाडु में ईशा फाउण्डेशन के आस-पास के इलाकों में ईशा के महामारी राहत प्रयासों के लिए किया जाएगा।

हाल ही के एक सत्संग में सद्गुरु ने घोषणा की थी कि ‘जो भी ‘बीट द वायरस फंड’ के लिए सबसे अधिक धनराशि दान करता है, उसे यह पेंटिग मिलेगी।’ 

उन्होंने यह भी कहा था कि ‘पेंटिंग की छोटे साइज़ की प्रतियां’ भी खरीदने वालों के लिए उपलब्ध होंगी।

 ‘बीट द वायरस’ ईशा का धरती से जुड़ा अभियान है जो महामारी को थोंडामुथूर ब्लॉक के, जिसमें दो लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, गांवों में प्रवेश करने से रोकने के लिए है।

प्रतिदिन 700 ईशा वालंटियर्स का कर्मी-दल विकेंद्रित रसोइयों में ताजा बना भोजन गांवों में बांटता है और साथ ही प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने वाला एक निलवेंबु कशायम पेय भी देता है।

रोजाना के पोषण के अलावा, वालंटियर्स जागरूकता बढ़ाने, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, और अग्रिम कर्मियों और प्रथम उत्तरदाता को सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान करने में प्रशासन की सहायता कर रहे हैं।

ईशा की महामारी राहत गतिविधियां मुख्यतया समाज में भुखमरी रोकने की ओर केंद्रित हैं। महामारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया है और गांवों में लाखों लोगों की आजीविका चली गई है।

अधिकतर ग्रामीण आबादी रोजाना की कमाई पर निर्भर है, और महामारी को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन से वे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

‘हालांकि सरकार और प्रशासन समाज में गरीबों तक पहुंचने में काफी मेहनत कर रहे हैं, फिर भी कई हैं जो वंचित रह जाएंगे। यह सुनिश्चित करना हर नागरिक का कर्तव्य है कि कोई भुखमरी की हालत में न जाए,’ सद्गुरु ने कहा।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस साल मार्च में कोविड-19 को एक महामारी घोषित किया था। पिछले साल चीन में पहली बार वुहान में इसके विस्फोट का पता चला था, और यह तेजी से पूरी दुनिया में फैल गया।

इसने मुख्य अर्थव्यवस्थाओं की कमर तोड़ दी और कई देशों को संपूर्ण लॉकडाउन लगाने पर मजबूर कर दिया। दुनियाभर में तीस लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रतिम हैं और मौतों की संख्या दो लाख को पार कर रही है।