नरेंद्र मोदी की दया पर टिकी है उद्धव ठाकरे की कुर्सी, आदित्य ठाकरे बन सकते हैं मुख्यमंत्री

नेशनल दुनिया/ मुंबई।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कुर्सी अब केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दया की मोहताज बची है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के द्वारा अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके सहायता मांगी है।

आपको पहले ही जानकारी दे दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे केवल 28 मई तक किसी मुख्यमंत्री रह सकते हैं। उसके बाद उनको मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधानसभा या विधान मंडल का सदस्य होना अनिवार्य है। और उद्धव ठाकरे अभी तक दोनों सदनों में से किसी का भी सदस्य नहीं हैं।

आपको याद दिला दें कि 28 नवंबर 2019 को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उद्धव ठाकरे विधानसभा या विधानमंडल का सदस्य नहीं थे। संविधान की धारा 144 के तहत उद्धव ठाकरे को 6 महीने के भीतर दोनों सदनों में से किसी एक का सदस्य बनना जरूरी था।

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चिंतन मुद्रा में उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास विधानमंडल में 2 सदस्यों की मनोनीत किए जाने का अधिकार है। पिछले दिनों महाराष्ट्र की सरकार में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने उद्धव ठाकरे को विधानमंडल में सदस्य मनोनीत करने के लिए भगत सिंह कोश्यारी को प्रस्ताव भेजा था।

जानकारी मिली है कि एक दिन पहले ही राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए मंत्री परिषद की इस सिफारिश को खारिज कर दिया है भगत सिंह कोश्यारी के द्वारा अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किए जाने पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके सहायता मांगी है।

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जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने महाराज के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सहायता के बारे में अभी कोई खास आश्वासन नहीं दिया है, लेकिन इतना जरूर कहा है कि वह इस पर विचार करेंगे।

ठाकरे परिवार से कोई सदस्य पहली बार महाराष्ट्र मुख्यमंत्री बना है और पहली ही बार में उसके ऊपर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहायता नहीं करेंगे, तो 28 मई से पहले पहले उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर किसी अन्य को मुख्यमंत्री बनाना होगा।

वैसे आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे वर्तमान में विधानसभा के सदस्य हैं और उनकी कैबिनेट में मंत्री भी हैं। अगर सहयोगी पार्टी राकपा और कांग्रेस द्वारा सहयोग किया गया, तो उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बना सकते हैं।