नरेंद्र मोदी और अमित शाह की दया पर टिका है उद्धव ठाकरे का भविष्य

नेशनल दुनिया

कोविड-19 की वैश्विक महामारी के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर संकट खड़ा हो गया है। अब अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दया नहीं दिखाएंगे तो एक महीने के भीतर उद्धव ठाकरे की कुर्सी जाना तय है।

महाराष्ट्र में पहली बार ठाकरे परिवार से कोई मुख्यमंत्री बना था। उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बने हुए अभी केवल 5 महीने ही पूरे हुए हैं कि उनकी कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

भले ही राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के द्वारा उद्धव ठाकरे को विधानमंडल का सदस्य नियुक्त किए जाने के लिए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास प्रस्ताव भेजा गया हो, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है।

दरअसल संवैधानिक तौर पर धारा 164 के तहत किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री को विधान सभा विधान मंडल का सदस्य होना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं है तो शपथ ग्रहण से 6 महीने के भीतर दोनों सदनों में से किसी भी सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है।

क्योंकि उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। ऐसे में उनके 6 महीने का काम 28 मई को पूरा हो रहा है। यदि 28 मई से पहले उद्धव ठाकरे विधान सभा विधान मंडल का सदस्य बनने में सफल नहीं होते हैं तो उनको मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा।

उद्धव ठाकरे वर्तमान में विधान सभा विधान मंडल में से किसी के भी सदस्य नहीं हैं। उनकी सरकार की तरफ से राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास विधान मंडल का सदस्य मनोनीत करने के लिए प्रस्ताव भेजा हुआ है, लेकिन अभी तक राज्यपाल ने इस पर कोई फैसला नहीं किया है।

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आज 28 अप्रैल हो चुकी है और राज्यपाल की तरफ से कोई फैसला नहीं हुआ है। अब अगर यदि 1 महीने के भीतर उनको विधानमंडल का सदस्य नहीं बनाया जाता है तो उद्धव ठाकरे की कुर्सी जाना है।

सूत्रों की मानें तो भगत सिंह कोश्यारी के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पास इस बारे में सलाह के लिए अनुमति की चिट्ठी भेजी गई है। अगर नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अनुमति नहीं देते हैं तो उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना ही होगा।

इस बीच पालघर में दो साधुओं की हत्या और रिपब्लिक भारत के एडिटर अर्णब गोस्वामी के खिलाफ जांच को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे एक बार फिर से भाजपा और केंद्र सरकार के निशाने पर आ चुके हैं।