कासरगोड मॉडल ने दिखाया रास्ता, जल्द ही केरल के “कोरोना फ्री” होने की उम्मीद

कश्मीर-में-कोराना-से-संक्रमित-व्यक्ति-की-मौत

श्रीवत्सन
हिन्दुस्तान में सबसे पहले केरल में ही कोरोना का पोजिटिव मामला आया था, जिसके बाद यहाँ पर संक्रमितों की तादात भी बढती ही गयी, लेकिन देश के सबसे साक्षर राज्य केरल ने कोरोना के खिलाफ एसा अभियान शुरू किया की अब देश में इसके मॉडल की तारीफे सब जगह हो रही है।

ख़ास बात यह है की कोरोना से पहले जहाँ निपाह और जिका वायरस के संक्रम को बखूबी केरल में निपटा गया और अब यहाँ का कासरगोड मॉडल ने समूचे केरल के हिन्दुस्तान में सबसे पहले कोरोना फ्री होने का रास्ता खोल दिया है.

गोडस ओवन कंट्री के नाम से विख्यात केरल में जब कोरोना का सबसे पहला मामला सामने आया तब से हिन्दुस्तान में इस संक्रमण को लेकर खलबली मच गयी थी।

देखते ही देखते यहाँ पर मार्च के अंत तक संक्रमितों की संख्या 200 को भी पार कर गयी लेकिन जितनी तेज रफ़्तार से यहाँ पर कोरोना ने अपने पैर पसरा उतनी ही तेजी से अब इसका खात्मा भी होने लगा है।

यहाँ कोरोना को ख़त्म करने को लेकर किस तरह काम हो रहा है इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है की 150 से भी ज्यादा कोरोना संक्रमित पोजिटिव मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं. 30 जनवरी को केरल में ही देश का पहला कोरोना पोजिटिव मामला सामने आया था।

कोविड-19 से बेहद प्रभावित कासरगोड के साथ कन्नूर, सबरीमामला मंदिर के लिए विख्यात पथनमथिट्टा और मलप्पुरम रहे।

यहाँ कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 387 है, लेकिन 257 लोग अब ठीक होक्र घर लौट चुके हैं, और इस दौरान केवल तीन लोगों की मौत हुई है।
फरवरी की शुरुवात के साथ ही केरल के कई जिले स्वास्थ्य मंत्रालय की सूचि में हॉट स्पॉट जिलों की सूची में शुमार हो गए थे लेकिन यहाँ पर इस गति से प्रयास हुवे की अब इन जिलों का नाम इस सूचि में दूर दूर तक नहीं है।

यह भी पढ़ें :  मोदी सरकार द्वारा किसानों के खातों में 7000 करोड़ देने की तैयारी

यानी की तीन लोगों की जान यहाँ लेने वाले कोरोना संक्रमण का 84 फीसदी रिकवरी दर से नियंत्रित्त करके यहाँ की जनता के सहयोग ने मानों पूरी तरह गला ही घोट दिया गया.

इस कामयाबी के लिए कहा जा रहा है की यहाँ की रणनीति इन कुछ कदमों पर आधारित रही. केरल सरकार ने पहला बड़े कदम के तहत आइसोलेशन और पुलिस पट्रोलिंग के जरिये सड़क को बंद करके गश्त बढाने के पारंपरिक तरीकों को अपनाकर लोगों को घरों से निकलने से रोकने में कामयाब रही।

जबकि दुसरे बड़े कदम के तहत सभी संक्रमित और संदिग्ध मामलों वाले को क्वारंटीन में भेज दिया गया. विदेशों से आए सभी लोगों और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का आंकड़ा तैयार किया गया।

जिससे यह पता चल गया की संक्रमण का ख़तरा किन किन इलाकों से हैं. और उसी के आधार पर इलाके की घेराबंदी की गयी। किसी को भी ना जाने दिया गया ना बाहर निकलने दिया गया।

इन सबकी पहचान के बाद तीसरा बड़ा कदम ड्रोन से निगरानी के रूप में उठाया गया। उनके घरों के बाहर पहरा लगाकर उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के मोबाइल फोन में कोविड-19 के सेफ्टी ऐप भी डाउनलोड करवाए गए।

कोई यदि अपने घर के बाहर निकलने की कोशिश भी करता तो सख्ती एसी की ऐसे लोगों को सीधे सरकारी आइसोलेशन सेंटर में भेजते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

नतीजा तीसरे कदम को लागू करने के महज तीन दिन के भीतर ही जब 107 लोगों के बर्ताव को समाज के लिए खतरा मानते हुवे सरकारी सेंटर भेज दिया गया तो बाकी लोग भी कानून को मानाने लगे.

यह भी पढ़ें :  Kill नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री की हत्या के लिए बना रहे थे प्लान, खुफिया एजेंसियों ने किया पर्दाफाश

ख़ास बात यह थी की 1 लाख 70 हजार से अधिक लोगों को 14 दिन की बजे 28 दिन तक घरों में क्वारंटाइन करके रखने के साथ क्वारंटीन किए गए 10,700 से ज्यादा लोगों के मोबाइल फोन में ऐप डाउनलोड करवाया गया।

जहाँ पुलिस इन इलाकों में घरों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने लगी। साथ ही पुलिस ने कासरगोड सुरक्षा ऐप की शुरुआत की। इसके जरिए बीमार लोगों को डॉक्टर से परामर्श लेने की सुविधा मिली।

इन सभी सख्त क़दमों के चलते 21 अप्रैल तक उम्मीद है कि संक्रमण के गिने चुने मामले ही रह जायेगे जबकि अप्रेल महीने के अंत तक संक्रमितों की संख्या घटकर सिंगल डिजिट में लाने को लेकर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

कासरगोड मोडल इसलिए कहा जा रहा है की क्यों जिस तेजी से यहाँ पर 175 से भी ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये उन्हें महज एक महीने के भीतर लगभग ख़त्म करने में पूरी सफलता भी मिली है.

इसके साथ ही साबुन से हाथ धोने की आदत डालने के लिए सरकार ने ‘ब्रेक द चेन कैंपेन’ की शुरुआत करके सार्वजनिक स्थानों पर वॉश बेसिन लगवाने, केरल के सभी हवाईअड्डों को जिला अस्पतालों की आपातकालीन कार्य से जोड़ने, ब्लड बैंक में वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए रक्त दान करने वालों की कईबार स्क्रीनिंग करने के साथ यहाँ तक की सड़क मार्ग से राज्य में आने वाले लोगों की जांच के लिए डॉक्टर को लगाया।

लोग घरों में ही रहे इसके लिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा की 30 से 40 फीसदी स्पीड बढ़ाने का नियम लागू कराया।

यह भी पढ़ें :  ट्विटर के साथ भारत सरकार की तकरार, सूचना प्रसारण मंत्रालय ने देसी कू ऐप के जरिए साझा की जानकारी

यही नहीं भले ही देश का पहला कोरोना संक्रमण मामला केरल में ही 30 जनवरी को सामने आया था, लेकिन केरल सरकार की सजगता एसी थी रही की पहला मामला आने से पहले ही 26 जनवरी को कोरोना से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लिया था। साथ ही केरल पुणे की एक निजी से लैब से रैपिड-पीसीआर किट खरीदने वाला देश का पहला राज्य है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि केरल सरकार ने पहला मामला आने से पहले ही 26 जनवरी को कोरोना से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लिया था।

क्वारंटाइन से लेकर आइसोलेशन और कांटेक्ट खोजने के काम के लिए 18 समितियों का गठन कर दिया था। देश में पहला मामला 30 जनवरी को केरल में आया और एक-एक करके कुल तीन हो गए। ये तीनों ही फरवरी में स्वस्थ हो गए। इसके बावजूद केरल सरकार ने सतर्कता में कमी नही आने दी।

जाहिर है की निपाह और जीका जैसे वायरस से निपटने के बाद कोरोना से जंग में भी केरल मॉडल सबसे कारगर साबित हो रहा है। कुछ दिनों पहले तक सबसे अधिक मामलों से जूझ रहे राज्य ने संक्रमण की दर पर तेजी से काबू पाया है। जहाँ कुछ राज्यों में मामले दो से छह गुना तक बढ़ गए वहीँ केरल में तेजी से यह कंट्रोल में आ गया है।