आर्थिक आपातकाल की तरफ बढ़ रहा है भारत? अबतक नहीं लगा, क्या हैं संभावनाएं?

रामगोपाल जाट

वैश्विक महामारी कोविड-19 के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार कोई बड़ा कदम उठा सकती है। इसको लेकर तरह-तरह की कयासबाजी लगाई जा रही है। इस महामारी को देखते हुए भारत, अमेरिका, इटली, स्पेन, जापान समेत दुनिया के अधिकांश देश तालाबंदी कर के बैठे हुए हैं। भारत में कई जगह कर्फ्यू लगाया हुआ है। कुछ जगह महाकर्फ्यू भी लगाया हुआ है।

इसके साथ ही अमेरिका जापान जैसे देशों में आपातकाल लागू किया जा चुका है। इस वैश्विक महामारी को देखते हुए भारत ने अभी तक आर्थिक और सामाजिक कदम तो खूब उठे हैं, किंतु फिर भी लोकतंत्र के उच्च मूल्यों को स्थापित किए जाने के लिए अभी तक भी आपातकाल लागू नहीं किया है।

राहत पैकेज दिया गया है

कोविड-19 के चलते इस वक्त पूरे देश में आर्थिक हालात खराब होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। सभी उद्योग धंधे बंद हैं, छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम और अन्य सभी काम धंधे चौपट हो चुके हैं। ऐसे वक्त में लोगों के पास आय का कोई स्रोत नहीं बचा है, हालांकि सरकार ने 1.70 लाख करोड रुपए का आर्थिक पैकेज देकर राहत देने का प्रयास किया है।

अभी भी देश में कोविड-19 के चलते तालाबंदी खत्म होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। अगर यह स्थिति लंबी अवधि तक चलती है, तो देश एक बहुत भयंकर आर्थिक विनाश के दौर में पहुंच जाएगा। आर्थिक तौर पर तालाबंदी देश को विकास के मामले में बहुत पीछे ले जा सकती है।

तमाम स्थितियों के बीच ऐसी संभावनाएं नजर आने लगी है कि देश को आपातकाल की जरूरत है। राष्ट्रीय आपातकाल या फिर आर्थिक आपातकाल लागू किए जाने पर विचार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस विकल्प के ऊपर काम भी कर रही होगी।

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हालांकि आपातकाल लगाने की तमाम शक्तियां केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति के पास होती है। ऐसी स्थिति में देश के तमाम नागरिकों के सभी अधिकार समाप्त हो जाते हैं और सत्ता के पास असीम शक्तियां प्राप्त हो जाती है। सत्ता निरंकुश शासक की तरह आदेश जारी कर सकती है।

देश में आपातकाल संविधान के 3 अनुच्छेद के तहत लगाया जा सकता है

अनुच्छेद 352

अनुच्छेद 352 के तहत केंद्र की सरकार देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकती है। इसे आपातकाल के वक्त देश के समस्त नागरिकों के सभी राष्ट्रीय अधिकार खत्म हो जाते हैं। देश की सरकार सभी फैसले अपने हिसाब से लेती है और ऐसे समय में सरकार निरंकुश सत्ता की तरह शासन कर सकती है।

कब लगता है राष्ट्रीय आपातकाल?

इस आपातकाल के वक्त राष्ट्र के नागरिकों के मौलिक अधिकार जो कि अनुच्छेद 19 में दिए गए हैं, वह स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। हालांकि अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 ऐसे वक्त में भी प्रभावी रहता है। सभी राज्यों की सरकार ऐसे समय में निष्प्रभावी हो जाती हैं। यह आपातकाल युद्ध, बाहरी आक्रमण और राष्ट्रीय सुरक्षा के वक्त लगाया जाता है।

अनुच्छेद 356

अनुच्छेद 356 का प्रयोग केंद्र सरकार राज्यों में राजनीतिक संकट उत्पन्न होने के कारण करती है। ऐसे वक्त में राज्य की सत्ता प्रभावहीन कर दी जाती है और वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाता है।

न्यायिक कार्यों को छोड़कर सभी अधिकार केंद्र सरकार के पास

ऐसे समय में राज्य में न्यायिक कार्यों को छोड़कर सभी कार्य केंद्र सरकार के हाथ में आ जाते हैं। इस आपातकाल का समय न्यूनतम 2 महीने और अधिकतम 3 वर्ष का होता है। इस अनुच्छेद का देश में सैकड़ों बार उपयोग किया जा चुका है।

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अनुच्छेद 360

भारत में अनुच्छेद 352 अनुच्छेद 356 का उपयोग कई बार किया जा चुका है, लेकिन अनुच्छेद 360 का आज तक उपयोग नहीं हुआ है। अनुच्छेद 360 के तहत देश में आर्थिक आपातकाल लागू किया जा सकता है। ऐसे समय में राष्ट्रपति द्वारा समस्त सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों का वेतन कटौती की जा सकती है और सारे वित्तीय अधिकार अपने हाथ में ले जा सकते हैं।

कब लागू होता है आर्थिक आपातकाल?

आर्थिक आपातकाल तभी लागू किया जा सकता है, जब देश में बड़ा आर्थिक संकट खड़ा गए हो गए हो, सरकार दिवालियापन के कगार पर खड़ी हो और उद्योग-धंधे चौपट हो गए हो अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई हो।

लोगों की निजी संपत्ति पर सरकारी अधिकार हो जाता है

अगर देश की वित्तीय साख को खतरा हो और वित्तीय स्थायित्व खत्म हो गया हो, तब केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर आर्थिक आपातकाल राष्ट्रपति के द्वारा लागू किया जाता है। ऐसे समय में देश के नागरिकों की समस्त संपत्ति पर सरकार का अधिकार हो जाता है।

राजनीतिक दल केंद्र सरकार के साथ!

केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों से वैश्विक महामारी कोविड-19 के तहत अहम बैठक करके राय मांगी है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने आपातकाल की संभावनाओं पर भी विचार किया है और इसको लेकर 80% राजनीतिक दल सत्ता के साथ हैं!

क्यों बनी है आर्थिक आपातकाल की संभावनाएं?

आर्थिक आपातकाल की संभावनाओं की बात की जाए तो देश में इस वक्त सभी उद्योग धंधे बंद पड़े हैं। सभी लोग एक तरह से बेरोजगार हैं। हालांकि, सरकार ने सभी प्राइवेट, सरकारी, अर्द्ध सरकारी कंपनियों को और तमाम नियोक्ताओं को किसी भी कर्मचारी की तनखाह नहीं काटने के निर्देश दिए हैं।

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लंबे समय में मुश्किल होगा घर बैठे तनख्वाह देना

अगर यही स्थिति लंबे समय तक, यानी अगले 2 या 3 महीने तक चलती है तो ऐसी स्थिति में कोई भी नियोक्ता बिना उत्पादन के अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने की स्थिति में नहीं होगा। बड़े पैमाने पर बेरोजगारी सामने आ सकती है। उत्पादन ठप होने के कारण नियोक्ताओं के पास जमा पूंजी खत्म होने की संभावना बढ़ रही है।

विचार शुरू किया जा चुका है!

जिससे देश में वित्तीय अस्थिरता सामने आएगी और देश आर्थिक आपातकाल की तरफ बढ़ सकता है। वित्तीय अस्थिरता सामने आने के कारण केंद्र सरकार देश में आर्थिक आपातकाल पर विचार कर सकती है। सूत्रों का दावा है कि कोविड-19 के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार इस विकल्प पर विचार शुरू कर चुकी है।

क्या होगा परिणाम?

संविधान के अनुच्छेद 307 के तहत अगर केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति देश में आर्थिक आपातकाल लागू करते हैं, तो सभी आर्थिक अधिकार केंद्र सरकार के पास चले जाएंगे। आम नागरिकों के सभी अधिकार खत्म हो जाएंगे। सभी की निजी संपत्ति पर केंद्र सरकार का अधिकार हो जाएगा।