जजों पर निजी हमले, फैसलों को सियासी रंग देना अवमानना: SC

Nationaldunia

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों को लेकर जजों पर टिप्पणी और सरकार के पक्ष में आए कुछ फैसलों को राजनीतिक रंग देने की वकीलों के एक समूह की कोशिश पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया और इसे गंभीर किस्म की अवमानना माना है।

कोर्ट ने कहा कि जजों पर संस्थान की गरिमा को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। जज प्रेस में जाकर अपना पक्ष या विचार नहीं रख सकते। गौरतलब है कि केसों के बंटवारों और कुछ फैसलों को लेकर जस्टिस मिश्रा पर सवाल उठाए गए थे।

जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने वकीलों के एक समूह को आड़े हाथ लेते हुए उन्हें सस्ती लोकप्रियता के लिए लालायित बताया और कहा कि वे सोचते हैं कि वे बार काउंसिल से ऊपर हैं।

एक फैसले में बेंच ने कहा कि बार के सदस्यों के लिए यह बहुत आम सी बात हो गई है कि वे प्रेस/मीडिया में जाकर जजों पर निजी हमले करते हैं। इससे जनता के बीच न्यायपालिका को लेकर अविश्वास फैलता है और जुडिशरी की गरिमा को ठेस पहुंचती है।

सुप्रीम कोर्ट में अब जो भी याचिका दाखिल होगी वह हफ्तेभर के अंदर सुनवाई के लिए लिस्ट कर दी जाएगी। इसके लिए कोर्ट ने Automatic सिस्टम तैयार किया है।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने बुधवार को इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया। ये सिस्टम चार फरवरी से काम करने लगेगा।

गौरतलब है कि जब चीफ जस्टिस गोगोई ने शपथ ली थी, उसी दिन उन्होंने क्लियर कर दिया था कि वह मेंशनिंग के लिए पैरामीटर तय करेंगे।

यह भी पढ़ें :  प्रदेश की जनता मंत्रियों-विधायकों को ढूंढ रही है, बाड़े से बाहर कब आएगी सरकार: डॉ. पूनियां

गौरतलब है कि 23 जनवरी को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मेकेनिजम के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि इससे मामले में जल्द सुनवाई की गुहार के लिए Mentioning से छुटकारा मिल जाएगा।

इसके बावजूद अगर याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत होगी तो वकील रजिस्ट्रार के सामने अपील कर सकते हैं। तब हम मामले में दाखिल अर्जी को देखेंगे।