Video: ‘अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद’ में छा गए डॉ. सतीश पूनियां, समाज को दिए ये 4 संदेश…

नई दिल्ली।

-राजस्थान के युवा जाट नेताओं, पीएस कलवानिया, रामावतार पलसानिया और हरिराम किंवाड़ा के अथक प्रयासों से पहली “अंतरराष्ट्रीय जाट संसद” का सफल आयोजन

दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई पहली “अंतरराष्ट्रीय जाट संसद” में राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने अपने दमदार भाषण के जरिए जाट समाज की बुलन्द और हितकारी आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया।

डॉ सतीश पूनिया ने जाट समाज को छोटी संख्या वाली कोमों का रक्षक और उनका पालनहार बताते हुए एक बार फिर से सिंहावलोकन का आह्वान किया है। उन्होंने इस मौके पर सिंहावलोकन का तात्पर्य भी बताया। इस अवसर पर डॉ सतीश पूनिया ने समाज के लिए चार संदेश दिए हैं।

उन्होंने पहला संदेश देते हुए कहा है कि पुराने जमाने से लेकर जब भारत आजाद हुआ था उसके बाद कई बरसों तक पूरे देश में लोकतंत्र स्थापित हो रहा था, तब देश की छोटी-छोटी संख्या वाली जातियां जाट समाज के पीछे खड़ी थी और जाट समाज के लोग न केवल उनकी रक्षा करते थे, बल्कि उनका लालन-पालन भी किया करते थे।

लेकिन समय बदला और इस भाईचारे को तोड़ने के लिए साजिश के तहत कई ऐसे अभियान और आंदोलन चलाए गए, जिसके चलते इन छोटी कोमों के लोगों को जाट समाज से दूर करने का सफल प्रयास किया गया। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि एक बार फिर से जाट समाज को इन छोटी संख्या वाली जातियों के लोगों को साथ लेकर चलना होगा।

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भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां का उद्बोधन

दूसरा संदेश देते हुए डॉ सतीश पूनिया ने कहा कि जाट समाज खेत में कड़ी मेहनत कर लोगों का पेट भरने का काम करता है, तो बॉर्डर पर देश की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा बलिदान देने वाली कौम भी जाट ही है।

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उन्होंने समाज के युवाओं से आह्वान किया कि अब केवल लाठी के जोर पर हर लड़ाई नहीं जीती जाती, बल्कि दिमाग से भी लड़ना पड़ता है। इसलिए दोनों चीजों का संतुलित रूप से इस्तेमाल करें।

जाट समाज को संबोधित करते हुए अपने तीसरे संदेश में डॉ सतीश पूनिया ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति कितना भी अच्छा करे, लेकिन उसकी कमियां निकालने के लिए लोग लिखते हैं, दिखाते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि जाट समाज के लोग लिखने और दिखाने वालों में भी आगे बढ़ें, ताकि समाज की अच्छाइयां दूसरों को दिखाई जा सकें।

समाज के युवाओं द्वारा एंटरप्रेन्योरशिप के तौर पर और उद्योगपतियों के रूप में अपनी पहचान बनाने के बारे में उल्लेखित करते हुए डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि खेत से अन्न पैदा करने के साथ ही साथ अब समय आ गया है कि समाज के युवाओं को व्यापार के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की बहुत जरूरत है, हम का दायित्व है कि हम उन्हें प्रेरित करें।

उन्होंने खुद के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह एक छोटे से गांव से आए हैं और आज राजस्थान भाजपा अध्यक्ष के तौर “अंतरराष्ट्रीय जाट संसद” में पहुंचे हैं, तो इसका सबसे बड़ा कारण उनकी कड़ी मेहनत, इमानदारी और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून ही है

उन्होंने लोक देवता तेजाजी महाराज, भरतपुर साम्राज्य के संस्थापक महाराजा सूरजमल से लेकर महान शहीद भगत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि हर क्षेत्र में जाट समाज के लोग सबसे आगे हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हमेशा की तरह बड़े भाई के तौर पर अन्य सभी छोटी तादात वाली जातियों की रक्षा करें और उनको पोषित करने का कार्य भी करें।

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“अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद” में अपने करीब 18 मिनट के भाषण में अपने जिस चिर-परिचित अंदाज में सभ्य और सौम्य तरीके से सतीश पूनियां ने समाज को संदेश दिया, वह न केवल उनकी परिपक्वता को दर्शाता है, बल्कि उनके 37 वर्ष के लंबे राजनीतिक अनुभव और सभी समाजों को साथ लेकर चलने की इच्छा शक्ति को भी स्पष्ट तौर पर उल्लेखित करता है।

इस “अंतरराष्ट्रीय जाट संसद” का आयोजन भाजपा से जुड़े हुए युवा नेता पीएस कलवानिया, रामअवतार पलसानिया और उनके साथी हरिराम किंवाड़ा के अथक प्रयासों के द्वारा संभव हो पाया है। तीनों ही युवा पिछले लंबे समय से “अंतरराष्ट्रीय जाट संसद” के सफलता के लिए देशभर में कड़ी मेहनत कर रहे थे।

दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित हुई पहली “अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद” में भारत के तमाम राज्य से हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्म में जाट सभ्यता के अनुयायियों के हजारों प्रतिनिधियों ने शिरकत कीं। इस कार्यक्रम में अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, केन्या समेत कई देशों के जाट प्रतिनिधि हिस्सा लेने आए।