कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी 2 महीने से दिल्ली की जनता को दंगों के लिए उकसा रही थी

– केंद्रीय कानून मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है: 2 महीने से इस प्रयास की परिणिति दिल्ली के दंगों में हुई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषणों के मामले में तुरंत एफ आई आर दर्ज करने का आदेश में देकर भाजपा को राहत प्रदान की है।

इसके तुरंत बाद भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर हमला बोला और उन पर दोषारोपण के अति निंदनीय खेल में लिप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि वह राजधानी के हिंसक माहौल में शांति बहाल करने के बजाय वे इस पर राजनीति कर रही हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने इस तनावपूर्ण घटना के लिए सोनिया गांधी के भड़काऊ भाषण को पूर्ण रूप से जवाब दें ठहराया, जो उन्होंने 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में दिया था और कहा था कि वे आर-पार की लड़ाई लड़ेगी तथा उनके वरिष्ठ नेतागण भी जनता को भड़काते रहे हैं।

जिसके परिणाम स्वरूप आखिर उत्तर पूर्वी दिल्ली में यह हिंसा वारदातें हुई, जिसमें 35 लोगों की मौत हुई, 200 से अधिक जख्मी हो गए और इस सप्ताह के प्रथम 3 दिनों में हुई भारी तोड़फोड़ की गुंडागर्दी में नुकसान हुआ है।

जावडेकर ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से भी खासतौर से कांग्रेस पिछले 2 माह से लगातार लोगों को नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने तथा कानून हाथ में लेने के लिए लाने का आधार बनाती रही।

उन्होंने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। गुरुवार को राष्ट्रपति को इस मामले में सच्चाई थी और इस सप्ताह को जो कुछ हुआ नहीं हुआ है, कांग्रेसी नेता गण उनके बयानों के माध्यम से नागरिकता संशोधन कानून और और भ्रम की स्थिति उत्पन्न करते रहे हैं।

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जावड़ेकर ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा पर भी हमला बोला और कहा कि वे लोगों के मन में भय का वातावरण बनाती रही हैं कि लोगों को जेल में डाल दिया जाएगा और जो इस कानून के खिलाफ संघर्ष नहीं करेंगे तो कायर कहलायेंगे। उन्होंने पूछा कि क्या भड़काऊ भाषण जानबूझकर नहीं हैं।

राहुल गांधी पर भी आरोप लगाया और कहा कि राहुल गांधी ने भी कहा था कि किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आपके साथ है। गांधी किसके खिलाफ संघर्ष करने को कह रहे थे, जनता को भी तो पता होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार ने बारंबार का है कि इस कानून का किसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और ना ही किसी मुस्लिम पर, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भाग कर आए लोगों को नागरिकता प्रदान करने के लिए है।

जावड़ेकर ने कहा कि वो भी अच्छी तरह से जानते हैं की नागरिकता संशोधन कानून से किसी की भी नागरिकता नहीं जाएगी, क्या हिंसा को बढ़ाने के लिए दिए गए बयान में जमीन तैयार कर दी, उन्होंने सोनिया गांधी के लिए।

उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में राजीव गांधी ने कहा था कि जब कोई विशाल पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार, बल्कि अनेक कांग्रेसी नेताओं ने लोगों से भड़काने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर, मणिशंकर और सलमान खुर्शीद के विरोध प्रदर्शन के साथ व्यक्त करने गए थे तो पाकिस्तान भी गए थे और उन्होंने कहा था कि हमें साइन बाग से बहुत उम्मीदें हैं।

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जावड़ेकर ने हिंसा के लिए धरना स्थल के सांप्रदायिक और अलगाववादियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। असम को अलग कर देंगे, 100 करोड़ हिंदुओ पर 15 करोड़ भारी पड़ेंगे, जैसे नारे लगाए गए थे, परंतु इस प्रकार की टिप्पणी के खिलाफ कांग्रेस पार्टी एक शब्द भी बोला।

जावड़ेकर ने दिल्ली के आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी नहीं बख्शा। आप पार्टी की नेता अमानतुल्लाह खान के लोगों से कहा था की नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद मुस्लिमों के द्वारा सिर पर पहने जाने वाली टोपी भी नहीं रहने दी जाएगी, कितना झूठ है यह, क्या ये जनता को भड़काना नहीं है क्या?

उन्होंने आप पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन के आवास से दंगे में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के पकड़े जाने पर कांग्रेस की चुप्पी साधे पर सवाल खड़ा किया, उनके घर से दंगा भड़काने वाला अस्ला मिला है। सभी प्रकार के घातक हथियार, पेट्रोल बम्ब तथा कई पत्थर वहां मिले।