कुर्बानी देने का आह्वान करने वाली सोनिया गांधी कहती हैं “दिल्ली दंगों के लिए अमित शाह और अरविंद केजरीवाल दोषी हैं”

नई दिल्ली।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भीड़ को संबोधित करते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि “लोगों को सड़क पर उतरना होगा, बड़ी से बड़ी कुर्बानी देनी होगी, क्योंकि कभी-कभी कुर्बानी देने पर ही कुछ हासिल होता है।”

सोनिया गांधी का यह वीडियो अब फिर से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है, क्योंकि सोनिया गांधी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दिल्ली दंगों में गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दोषी करार दिया है।

सोनिया गांधी के दिल्ली विधानसभा चुनाव की वीडियो और प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो को जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है, जिसके बाद सोनिया गांधी पूरी तरह से एक्सपोज हो गई हैं।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अपने अंतर्गत आने वाले पुलिस को निर्देशित करने में उनकी भारी सफलता के कारण रविवार से भड़की सांप्रदायिक हिंसा की पूरी जिम्मेदारी उन्हें ही वहन करनी चाहिए।

नेतृत्व करते हुए भीड़ में दिए गए भड़काऊ भाषण से उलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस की सीडब्ल्यूसी का संकल्प पढ़ा और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।

उन्होंने कहा कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए लोगों तक पहुंचने में प्रशासन को सक्रिय नहीं करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा उनकी दिल्ली सरकार बराबर की जिम्मेदार है।

को दे दिए गए भाषण को कहीं पर भी जिक्र नहीं करते हुए सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव में सोनिया गांधी के द्वारा कहा गया है कि दोनों सरकारों की सजा असफलता की वजह से राष्ट्रीय राजधानी में एक बड़ी त्रासदी हुई है जो जन्मदिन और हालात बिगड़ने का खतरा दर्शा रही है गृह मंत्री अमित शाह पर इसके हमले ने विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर सहित केंद्रीय मंत्रियों के कड़ी विरोध को आकृष्ट किया जिसमें इंगित किया गया है कि मंगलवार को एम दाबाद से वापसी के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने इस मामले में सर्वदलीय बैठक बुलाने में कोई समय नहीं गंवाया।

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संबंधित घटनाक्रम में कांग्रेस नेताओं ने आईसीसी मुख्यालय से 30 जनवरी मार्च मार्ग स्थित गांधी स्मृति तक एक शांति मार्च भी निकाला है वो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलना चाहते थे जो उनसे गुरुवार को ही मिलने के लिए सहमत हुए हैं सीडब्ल्यूसी दिल्ली के लोगों से गणना की राजनीति को अस्वीकार करने का था शर्मनाक घटनाओं से बने खाई को पाटने के लिए प्रयत्न करने की अपील की और कहा कि वह सुनिश्चित करें कि ऐसा दोबारा नहीं होगा सीडब्ल्यूसी ने पांच सवाल भी पूछे हैं।

1. गत रविवार से गृहमंत्री अमित शाह कहां थे और वे क्या कर रहे थे?

2. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहां थे और गत रविवार से क्या कर रहे थे?

3. दिल्ली के चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद के दिनों में से आज तक उत्तर एजेंसियों द्वारा दी गई रिपोर्ट क्या थी?

4. जब ऐसे स्पष्ट संकेत थे कि हिंसा बढ़ जाएगी, तब रविवार रात तैनात पुलिस बल की संख्या क्या थी?

5. जब यह स्पष्ट था कि स्थिति दिल्ली पुलिस के नियंत्रण से बाहर है तो अतिरिक्त पुलिस बल तत्काल क्यों नहीं बुलाया गया?

हालांकि, उत्तरी पूर्वी दिल्ली के प्रभावित इलाकों में बुधवार को ही कर्फ्यू लगा दिया गया था। सीडब्ल्यूसी ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अर्धसैनिक बल तैनात करने तथा पनप रही परिस्थितियों पर प्रशासनिक मशीनरी द्वारा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए हर मोहल्ले में सभी समुदाय के सदस्यों की शांति समितियां एवं वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की मांग की है।

चुनाव के दौरान भीड़ को संबोधित करते हुए कुर्बानियां मांगने वाली सोनिया गांधी ने कहा पहला कदम अर्धसैनिक बल हैं, यदि वैसे सफल हो तो सेना है।

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सीडब्ल्यूसी प्रस्ताव से पढ़ते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा विधानसभा चुनाव हारने के बाद हुई हिंसा एक सुविचारित की गई षड्यंत्र थी। गति दिनों से घटे त्रासद घटनाओं का इतिहास रूपरेखा और पैटर्न है।

यह दिल्ली चुनाव के दौरान भी नजर आ रहा था। सोनिया ने कहा भाजपा के कई नेताओं ने भड़काने वाले वक्तव्य दिए, जबकि खुद सोनिया गांधी के द्वारा भी इस तरह के भड़काने वाले भाषण दिए गए थे।

सोनिया ने कहा कि इनका मन घृणा डर का वातावरण सृजित करने की था। ऐसे ही अंतिम वक्तव्य रविवार को दिया गया, जब एक भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया और चेतावनी दी कि 3 दिन बाद हम कुछ नहीं करना।

सोनिया गांधी ने एक बार फिर से अपना बचाव किया और खुद के द्वारा दिए गए भाषण पर भी कोई जवाब नहीं दिया।