अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे पर ही ‘कट्टर इस्लामिक’ दंगे क्यों होते हैं?

नई दिल्ली।
साल 1990 के बाद दिल्ली में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर दंगे हुए हैं। इससे पहले जब बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आए थे, तब इस्लामिक आतंकियों ने जम्मू कश्मीर में 36 लोगों की हत्या कर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की थी।

जैसे ही 24 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़ी डील करने के लिए भारत आए तो 72 दिन से सड़कें जाम कर बैठे मुस्लिम समाज के लोग हिंसक को गए। उन्होंने उत्तरी—पूर्वी दिल्ली में, जहां उनकी बहुलता है, आग के हवाले कर दिया।

पुलिस के डीएसपी, हैड कांस्टेबल रतनलाल समेत 13 जनों की जान चली गई और इस्लामिक आतंकी खुलेआम सड़कों पर बंदूकें लहराते हुए दिखाई दे रहे थे। पुलिस पर पिस्टल तान रहे थे। इस घटना में 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

मजेदार बात यह है कि जिस सरदार कौम के द्वारा शाहीन बाग में लंगर लगाकर मुसलमानों को खाना खिलाया गया, उनके ही साथियों ने सरदारों की टायरों की दुकानें जलाकर खाक कर दी। उनके घरों को आग के हवाले कर दिया वो सड़क पर बैठकर रोते बिलखते रह गए।

इस दौरान एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक मुसलमान शाहीन बाग जैसे ही एक धरने को संबोधित कर रहा है। वह कह रहा है कि जब भारत में बाहर से कोई निवेशक आता है, तो यहां पर अशांती फैला दो, इससे इंवेस्टर वापस लौट जाएंगे।

वीडियो में दिखाई दे रहे मुसलमान ने यह भी बारीकी से मसझाया कि अगर किसी देश में विकास होता है तो वहां पर इस्लाम का प्रसार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही वह समझा रहा है कि मुसलमानों को अपनी आबादी बढ़ाते रहना चाहिए ताकि भारत पर कब्जा किया जा सके।

यह भी पढ़ें :  मोदी के बयान का विरोध करते हैं कॉमरेड, लेकिन कांग्रेस की नाकामी पर क्यों नहीं बोलते?

जब जब भी भारत में कोई बड़ा निवेश होने की संभावना होती है, तभी इस्लामिक आतंकवाद चरम पर पहुंच जाता है। सीएए के बाद आसाम में सड़कें खोदी गई, दंगा किया गया और फिर नतीजा यह​ निकला कि जापान से पूर्वी—उत्तरी भारत मे आने वाला 70 हजार करोड़ का निवेश नहीं हो पाया।

इसी रणनीति पर चलते हुए कट्टर इस्लामिक आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं। वो जानते हैं कि अगर भारत में विकास करना है तो पहले यहां पर उसको रोकना होगा, ताकि यहां पर विदेशी विकास नहीं हो और विकास को रोका जा सके, ताकि इस्लामिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके।

इस सारे कार्यों के पीछे कहीं न कहीं पाकिस्तान और चीन का नाम सामने आता है। क्योंकि पाकिस्तान में निवेशक जाते नहीं और चीन से निवेशक भारत की तरफ भाग रहे हैं। साथ ही पाक में गुजर रही चीन की सीपीईसी महापरियोजना भी एक बड़ा कारण है, जिसमें भारत बड़ी रुकावट है।

पीओके को भारत अपना बता चुका है और गृहमंत्री अमित शाह कई बार कह चुके हैं कि पीओके लेकर रहेंगे। यदि भारत ने पीओके ले लिया तो समझो कि चीन की सीपीईसी पर ब्रेक लग जाएंगे, जो उसके विकास की धुरी बनने वाली है। यही कारण है कि चीन इन दंगों के माध्मय से भारत को सीपीईसी से दूर हटने का दबाव बना रहा है।

चीन अपने मंसूबे पूरे करने के लिए भारत में इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा देता है। साथ ही उसकी मानसिक पैदाइशें, जो कि वामपंथ के जरिए देश को खोखला करना चाहती हैं, उनको इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

यह भी पढ़ें :  5 साल में नहीं हुआ टेरर अटैक: जानिए कब-​कब हुए भारत में बड़े आतंकी हमले

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में रहने वाला मुसलमान आसानी से चीन और पाकिस्तान का टारगेट बन जाता है और यहां पर दंगे, आगजनी, हत्याओं को अंजाम देने के लिए तैयार हो जाता है। चंद पैसे में इस तरह के लोग अपना दीनो—इमान बैच देते हैं।