CAA के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के विरोध में 150 शिक्षाविदों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

नई दिल्ली।

पूर्व जजों, नौकरशाहों, सेना के अधिकारियों और शिक्षाविदो सहित करीब 150 से अधिक प्रसिद्ध नागरिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद को पत्र लिखकर कहा हैं कि वह सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट ( सी.ए.ए.), नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एन. पी. आर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एन. आर. सी.) के खिलाफ शुरू की गई “झूठी और भड़काने वाली” मुहिम के विरुद्ध कार्रवाई करें।

राष्ट्रपति से अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि वे इसमें देश को नुकसान पहुंचाने वाली एक भयावह व्यूह रचना को देखते हैं अतः वे सरकार को निर्देश दें की वो इन विरोध प्रदर्शनों को पूरी गंभीरता से लें और इनके कर्ताधर्ताओं खिलाफ कठोर कार्यवाही करें।

पत्र में हस्ताक्षर करने वाले जाने-माने लोगों में विभिन्न हाई कोर्ट के 11 पूर्व जज, 24 सेवानिवृत्ति ISS अधिकारी, 16 सेवानिवृत्त IPS अधिकारी और 18 पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल है। यह लोग इसको लेकर चिंतित हैं कि भारत के में एक तरह का डर फैलाया जा रहा है जो देश को नुकसान पहुंचाने का एक उत्तेजि और भयावह खेल प्रति होता है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि किस प्रकार “एक समन्वित तरीके” से यह मुहिम चलाई जा रही है जिसमें हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने CAA, एनपीआर और NRC के “झूठे और कुटिल वर्णन” पर चिंता व्यक्त की।

पत्र में कहा गया है कि “इन विरोध प्रदर्शनों के सुरक्षा संबंधी बड़े भारी निहितार्थ हैं और यह हमारी मातृभूमि के लिए शुभ नहीं है। यह विरोध प्रदर्शन हालांकि भारत सरकार की नीतियों के विरोध में होने का दावा करते हैं।

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लेकिन मातृभूमि के लिए शुभ नहीं है। यह विरोध प्रदर्शन हालांकि भारत सरकार की नीतियों के विरोध में होने का दावा करते हैं लेकिन वास्तव में उनका उद्देश्य इस देश के ताने-बाने को नष्ट करना तथा देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाना है।

पत्र में आगे कहा गया है कि वे इस शिद्दत से महसूस करते हैं कि जो व्यवधान उत्पन्न किए जा रहे हैं उनका कोई विदेशी आयाम भी है।