100Cr की लागत वाली “वंदे भारत एक्सप्रेस” ने 1 साल में कमाए 92Cr, राहुल गांधी ने उड़ाया था मजाक, ट्रेन पर मुस्लिमों द्वारा कई बार पत्थरबाजी भी की गई

नई दिल्ली।

पूर्ण रूप से पहली स्वदेशी ट्रेन “वंदे भारत एक्सप्रेस” को 15 फरवरी 2020 को 1 साल पूरा हो गया। इससे ठीक एक साल पहले, यानी 15 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से वाराणसी तक चलने वाली इस स्वदेशी ट्रेन का उद्घाटन किया था।

इस ट्रेन की खास बात यह है कि इसकी लागत 100 करोड़ पर आई थी, जबकि एक साल के भीतर ही ट्रेन में 92.29 करोड़ पर कमाकर रेलवे को लाभकारी सिद्ध करने के सपने को साकार कर दिया है।

1 साल के दौरान एक स्वदेशी ट्रेन ने 3.8 लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है। उत्तरी रेलवे ने मंगलवार को इस ट्रेन का 1 साल का लेखा-जोखा सामने रखा। रेलवे ने बताया है कि 100% ऑक्यूपेंसी वाली यह ट्रेन दुनिया की सबसे सफल ट्रेनों में से एक शुमार हो गई है।

मजेदार बात यह है कि जब इस ट्रेन को शुरू किया गया था, तब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसके नाम “वंदे भारत” को लेकर मजाक उड़ाया था। इतना ही नहीं वाराणसी से दिल्ली तक चलने वाली इस ट्रेन पर कई बार मुस्लिम समुदाय के उपद्रवियों ने पत्थरबाजी भी की थी।

मंगलवार और गुरुवार के अलावा सप्ताह में दिल्ली और वाराणसी के बीच में 5 दिन तक चलने वाली इस ट्रेन को दोनों शहरों की दूरी तय करने में केवल 8 घंटे लगते हैं। इस ट्रेन के आठ डिब्बे हैं।

प्रत्येक डिब्बे में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है और ऑडियोवीजुअल अनाउंसमेंट वाले “वंदे भारत एक्सप्रेस” ट्रेन दिल्ली से जम्मू के कटरा तक वैष्णोदेवी के लिए शुरू की गई थी, इनकी ऑक्यूपेंसी 112% है। ट्रेन के चलने के बाद यह दूरी 8 घटें कम की है।

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पिछले वर्ष जब ट्रेन को शुरू किया गया था तब कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने “मेक इन इंडिया” का मजाक उड़ाया था। तब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत के इंजीनियरों का राहुल गांधी मजाक उड़ा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंजीनियरों की मेहनत को सलाम करते हैं।

खास बात यह है कि ट्रेन पर शुरू करने के बाद कई बार ट्रेन के डिब्बों पर पत्थरबाजी हुई थी। जिसका कारण पुलिस पड़ताल में सामने आया था, कि “वंदे भारत” नाम होने की वजह से मुस्लिम समुदाय के कुछ उपद्रवी लोगों को ट्रेन से आपत्ति थी।