कसाब को भगवा आतंकी का चेहरा बनाकर कांग्रेस और सोनिया गांधी आरएसएस पर बैन लागाना चाहती थी

नई दिल्ली।
कांग्रेस सरकार और उसकी मुखिया सोनिया गांधी आतंकी कसाब को भगवा आतंकी का चेहरा बनाकर किसी भी तरह से भगवा आतंकवाद का चेहरा बनानी चाहती थीं, ताकि इसके सहारे आरएसएस पर बैन लगाया जा सके। यह खुलासा किया है मुंबई के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने। उनकी किताब मंगलवार को सामने आई है, जिसमें बड़े खुलासे किए गए हैं।

राकेश मारिया की किताब सामने आने के बाद सांसद और भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस, आईएसआई और लश्कर के संयुक्त अभियान के तहत कसाब और उसके 11 साथियों को मुंबई हमले के लिए भेजा गया था।

मारिया ने खुलासा करते हुए लिखा है कि कसाब को समीर दिनेश चौधरी नाम का पहचान पत्र दिया गया था। इसके साथ ही उसकी दायें हाथ की कलाई पर कलावा बांधा गया था, तकि सहज ही यह पहचान हो सके कि वह हिंदू है।

मारिया ने यह भी लिखा है कि उस वक्त जनता में भारी रोष था और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कसाब को मारने की सुपारी दी जा चुकी थी, जिसके चलते कसाब का बचाना उनकी पहली प्राथमिकता थी, क्योंकि वही एकमात्र जिंदा सबूत था, जो यह साबित कर सका कि वह पाक का आतंकी था, और मुसलमान था।

मारिया की पुस्तक के सामने आने के बाद स्वामी ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, कांग्रेस पार्टी, आईएसआई समेत तमाम उन लोगों पर हमला बोला है, जो भगवा आतंकवाद की अवधारणा गढने का काम कर रहे थे। स्वामी ने सोनिया गांधी को इसमें प्रमुख किरदार बताया है।

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल समेत एक साथ 10 जगह हमले हुए थे, जिसमें कसाब के सभी 10 साथी मारे गए थे और उसको मुंबई पुलिस के जवान ने जान देकर जिंदा पकड़ा था।

यह भी पढ़ें :  JNU में पिट गए कम्युनिस्ट छात्र, दो गुटों में लाठी-भाटा-जंग

उस हमले में 166 लोगों की हत्या कर दी गई थी, जबकि सैकड़ों जख्मी हुए थे। कसाब को बाद में 21 नवंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुंबई के ही यरवदा जेल में फांसी दी गई थी।

मारिया और स्वामी ने उस रहश्य से पर्दा उठाया है, जिसके तहत कसाब को भगवा आतंकी बताकर सरकारी स्तर पर आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की साजिश रची गई थी, किंतु बहादुर पुलिस के जवानों ने उस साजिश का नेस्तनाबूत कर दिया।