6 राज्यों में हारने के बाद राज्यसभा में भी भाजपा बहुमत के सपने से पीछे होती जा रही है, यह होगा असर

नई दिल्ली।

भारतीय जनता पार्टी के पास लोकसभा में भारी बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में उसको किसी भी बिल को पास करवाने के लिए विपक्ष में तोड़फोड़ करनी पड़ती है, विपक्ष के सदस्यों को किसी न किसी तरह से साथ में लेना पड़ता है।

235 सीटों वाली राज्यसभा में भाजपा के पास फिलहाल 82 सदस्य हैं। जबकि, अप्रैल में होने वाले 51 सीटों के चुनाव के बाद पार्टी के पास 95 सदस्य हो जाएंगे। इसके बावजूद पार्टी को बहुमत से निपटने के लिए काफी फासला तय करना है।

कांग्रेस के पास वर्तमान में 46 राज्य सभा सांसद हैं और अप्रैल में होने वाले चुनाव के बाद उसके 56 सांसद हो जाएंगे। किंतु जिन 51 सांसदों के लिए चुनाव होना है, उसमें सबसे ज्यादा फायदा तृणमूल कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल को होगा।

दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के वक्त भाजपा को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य गंवाने पड़े थे। इसी का परिणाम है कि भाजपा जो कभी राज्यसभा में बहुमत का सपना देख रही थी, उसको अपने अधूरे सपने के साथ जीना होगा।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल में राज्यसभा की खाली हो रही 51 सीटों के लिए मतदान होगा इनमें से राजस्थान की भी 3 सीटें हैं। यहां पर बहुमत के हिसाब से 2 सीट कांग्रेस को और एक सीट भाजपा को मिलने की संभावना है।

इसके अलावा महाराष्ट्र से 7 सीट, तमिलनाडु के छह, पश्चिम बंगाल और बिहार से राज्यसभा के लिए पांच-पांच सीटें खाली हो रही है।

इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, गुजरात से चार-चार सीटें, मध्यप्रदेश, राजस्थान तेलंगाना और ओडिशा से तीन-तीन सीट झारखंड और छत्तीसगढ़ से दो-दो सीट असम, मणिपुर, हरियाणा और हिमाचल से एक-एक सीट खाली हो रही है।

यह भी पढ़ें :  पायलट कर सकते हैं बगावत, राज्यसभा उम्मीदवार ऐलान के साथ हुई शुरुआत

इन सीटों में भाजपा और कांग्रेस के अलावा नेशनल कांग्रेस पार्टी को दो-दो, तृणमूल कांग्रेस को पांच, वाईएसआर कांग्रेस को चार, टीआरएस को एक, जेडीयू को दो, बीजू जनता दल को दो, राष्ट्रीय जनता दल को दो, टीडीपी को दो, डीएमके और अन्नाद्रमुक को तीन-तीन सीटें मिलने की संभावना है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका वाड्रा को छत्तीसगढ़ से राज्यसभा में भेजने की तैयारी की जा रही है। पहले उनको राजस्थान से राज्यसभा का टिकट दिए जाने की चर्चा थी।

बता दें कि राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के कारण भारतीय जनता पार्टी की सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार धारा 370, तीन तलाक और नागरिकता संशोधन कानून जैसे बिल संसद में पास कराने में असक्षम होगी।

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के 303 सांसद हैं, जबकि उनके सहयोगी दलों के 50 सांसद हैं, इस तरह लोकसभा में किसी भी बिल को भाजपा आसानी से पास करवा सकती है। किंतु उसके बाद राज्यसभा में उसको परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अब नरेंद्र मोदी सरकार को संसद में बिल पास करवाने के लिए एक बार फिर से बीजू जनता दल, टीएमसी जैसे दूसरे दलों के ऊपर निर्भर रहना पड़ेगा, जो कि बड़ी टेढ़ी खीर है, क्योंकि विपक्ष के नाते सभी दल केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा लाए जाने वाले मजबूत बिलों का समर्थन करने से हिचक जाती है।