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बुधवार, सितम्बर 23, 2020

निर्भया के दोषियों ने फांसी से बचने के लिए दी “मानसिक अस्वस्थता” की दलील

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नई दिल्ली।

वर्ष 2012 में निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्या मामले में फांसी की सजा पाए 4 दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा के वकील ने फांसी से बचने के लिए एक चौंकाने वाला दावा किया है कि उनके मुवक्किल में जेल में पहुंचे आघात के कारण मानसिक रोग विकसित हो गया है।

गुरुवार को किए गए इस दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार दोपहर बाद 2:00 बजे तक के लिए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। एक सम्बंधित घटनाक्रम में एक शहर अदालत ने डेथ वारंट के लिए सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी।

यहां पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने कहा कि वे शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा विनय की याचिका का निस्तारण करने के बाद ही फांसी की सजा तय करने के लिए तिहाड़ जेल के अधीक्षक और मृतका की माता के आवेदनों पर सुनवाई करेंगे।

अपनी उपचारात्मक याचिका के खारिज होने के बाद फांसी से पहले अपराधी को 14 दिन का समय मिलता है। इस कानूनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए शुक्रवार को 14 दिन बाद फांसी देने के आदेश की दलीलों पर उन्होंने विचार करने से मना कर दिया।

उन्होंने यह कहते हुए सुनवाई टाल दी कि यदि विनय की याचिका स्वीकार की जाती है तो सजा पाए मुजरिमों के पास अनेक विकल्प होंगे। जस्टिस आर भानुमति, अशोक भूषण तथा ए एस बोपन्ना को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विनय की ओर से वकील एपी सिंह तथा दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अलग-अलग फांसी देने के शिकार करने के निर्णय को पढ़ने के लिए केंद्र तथा दिल्ली सरकार की दलीलों को लगभग 2 घंटे तक सुना।

शीर्ष कोर्ट के समक्ष अनुरोध किया कि मानसिक स्थिति को देखते हुए उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला जाए। उन्होंने इंगित किया कि एक मनोचिकित्सक रोजाना उसे जेल में जांच कर रहा है और इसके लिए दवाएं दे रहा है तथा जेल अधिकारियों ने उसे जेल में कथित रूप से मिली यातना और दुर्व्यवहार के कारण विकसित हुई रोग के लिए मानसिक चिकित्सालय भेजा है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश सुरक्षित रखने के लिए बारे में बताने के लिए ट्रायल कोर्ट पहुंचे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष दावा करने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ है, जिसकी 12 फरवरी को एक मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की।

पीठ ने एपी सिंह के इस दावे को खारिज करने के लिए रिकॉर्ड देखा कि उसकी दया याचिका अस्वीकार करने के राष्ट्रपति को की गई सिफारिश पर दिल्ली के उपराज्यपाल तथा गृहमंत्री ने हस्ताक्षर किए थे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर निगाह रख रही है।

वकीलों के विचार में यह प्रश्न है कि क्या विनय फांसी से बच जाएगा, जैसा कि देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर के साथ हुआ था, जो तत्कालीन युवा कांग्रेस अध्यक्ष एमएस बिट्टा की कार पर 1993 में बम हमले के मामले में फांसी की सजा सुनाई जाने के बाद मानसिक रोगी हो गया था।

उसकी दया याचिका के निस्तारण में 8 साल लगे और उसकी मानसिक सेहत ने सुप्रीम कोर्ट को उसकी सजा घटाकर उम्रकैद कर दिया था। इस तथ्य पर ध्यान देते हुए की दया याचिका खारिज करने के विरुद्ध की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को फैसला सुनाना है।

जज राणा ने कहा कि वे एक प्रभावी कानूनी आवेदन के लिए एक अन्य दोषी पवन गुप्ता को भी समय देना चाहेंगे। उन्होंने खेद जताया कि उसने सभी वकीलों को अस्वीकार कर दिया, जिसके नाम से दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने दिए थे।

उनके पिता ने प्रार्थना की थी कि एडवोकेट सिंह द्वारा उनके मामले से हटने के बाद निजी वकील तलाश करने के लिए उन्हें कम से कम 2 दिन चाहिए। लोक अभियोजक इरफान अहमद ने दावा किया था कि डेथ वारंट की क्रियान्वित की तारीख तय करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है, क्योंकि याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के बावजूद न्यायालय में कार्यवाही को स्थगित नहीं किया गया है।

उन्होंने जज से हाई कोर्ट के आदेश की रोशनी में फांसी की तारीख तय करने के लिए कहा। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि कोर्ट की देरी करने की चालों के प्रति सजग रहना चाहिए।

उन्हें दोषी अपना रहे हैं और उन्हें कोर्ट की कार्यवाही पटरी से उतारने के लिए अनुमति नहीं देनी चाहिए। मेरी राय में इस स्थिति में आवेदन के निस्तारण से और भी कानूनी जटिलताएं पैदा होंगे। इन हालातों में प्रकरण 17 फरवरी तक स्थगित हो जाता है।

लगभग 1 घंटे तक सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस राणा ने अपने आदेश में कहा जस्टिस ने टिप्पणी की अनुच्छेद 21 फांसी पाए गए दोषी के जीवन और स्वतंत्रता की उसके अंतिम सांस तक सुरक्षा करता है।

एक अधिकार के मामले की तरह इसका हकदार है कि वह अपने कानूनी अधिकार काम में ले ले और कोर्ट मृत्युदंड पाए दोषियों के मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकता।

4 लोग, जिन्हें मृत्युदंड सुनाया गया है वह है मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा तथा अक्षय कुमार। 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न, जिसे निर्भया के नाम से जाना गया, इसके साथ दक्षिण दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात को सामूहिक बलात्कार किया गया था। 15 दिन बाद सिंगापुर के अस्पताल में चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी।

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Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिआ संपादक .

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