खुलासा: CAA के बाद भारत में दंगे भड़काने के लिए PFI ने 120 करोड़ रुपए खर्च किए हैं

caa protest in up and delhi
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New delhi news
एक तरफ जहां पूरे देश में नागरिता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बवाल मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने खुलासा किया है कि इस कानून के पास होने के बाद पहले से प्लान कर चुके पॉपुलर फ्रंट आॅफ ​इंडिया (PFI) ने भारत में दंगे भड़काने के लिए 120 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इस बात का खुलासा किया है पुलिस जांच में। सूत्रों का कहना है कि आसाम से शुरु हुई इस हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और धरनों के पीछे पीएफआई का हाथ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि भारत में इस तरह से सुनियोजित दंगे कराने के लिए पीएफआई ने 120 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

ऐसा लग रहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जो खेल चल रहा है, उसकी असली परतें खुलने लगी हैं। पुलिस जांच के बाद सीएए के बाद देश में चल रही साजिश का पर्दाफाश होने लगा है।

सामने आया है कि इस पूरे बवाल के पीछे एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसके द्वारा दंगा करने वालों, आगजनी करने वालों, धनना देने वालों और प्रदर्शन में शामिल होने वालों को सीधा पैसे मुहइया करवाता है।

आसाम के दंगों, राजधानी दिल्ली, लखनउ, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, हापुड, बिजनौर, शामली, रामपुर और अलीगढ़ समेत तमाम जगह पर जो दंगे, आगजनी, तोड़फोड़ और विरोध प्रदर्शन हुए हैं, उसकी पुलिस जांच में यह खतरनाक खेल सामने आया है।

पुलिस ने अपनी शुरुआत जांच में पाया है कि उत्तर प्रदेश समेत तमाम भारत में दंगा करने वालों को पीएफआई, यानी पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिरूा, जो कि मिमी का ही दूसरा रुप है, ने 120 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

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पुलिस ने जांच में बताया है कि अब तक पीएफआई के 73 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें से 27 बैंक खाते पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया के नाम से खोले गए हैं, जबकि 9 बैंक अकाउंट पीएफआई से जुड़े इस्लामिक संगठन रिहैब इंडिरूा फाउंडेशन के हैं। इसी तरह से इस संगठन के 17 लोगों और 37 बैंक खाते संगठन के नाम पर हैं।

इन सभी 73 बैंक अकाउंट्स की पुलिस जांच में सामने आया है कि सीएए के खिलाफ दंगों के लिए 120 करोड़ रुपए जमा करवाए गए हैं। बताया गया है कि इस दौरान कुछ ही रकम छोड़ गई है, बाकी सारी रकम निकाल ली गई है।

इन 73 बैंक खातों के जरिए 120 करोड़ रुपया ​कैसे ट्रांजेक्शन किया गया और जांच एजेंसियों की नजर में भी नहीं आया, इसका पूरा इंतजाम किया गया था। सामने आया है कि 4 दिसंबर 2019 को संसद में बिज पेश होने के साथ ही पीएफआई के 15 खातों में करोड़ों रुपया जमा हुआ।

बड़ी चालाकी से, कि पैसा कौन डालता है, इसको छिपाने के लिए या तो 5000 की रकम जमा हुई है, या फिर 49000 की। इसमें से अधिकतर नकद जमा करवाए गए। जांच में सामने आया है कि जमा करवाने वालों को हर बार 50 हजार से कम जमा करवाने को कहा गया था।

इसके साथ ही खातों से 2000 और 5000 जैसी छोटी रकम निकाली गई, ताकि खातों पर किसी का ध्यान नहीं जाए। दंगों के दौरान इन्हीं शहरों में 2 से 5 हजार की छोटी रकम 80 से 90 बार हर दिन निकाली गई।

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मजेदार बात यह है कि जिस दिन दंगे हुए, उसी दिन पीएफआई के खातों से पैसे निकाले गए। इसका मतलब बिलकुल साफ है कि दंगों के पहले लाखों रुपए निकालकर दंगाइयों को मुहइया करवाए गए।

दंगों को लेकर पीएफआई की पूरी तस्वीर साफ हो गई है। दंगों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी केंद्र सरकार से की है। इस संगठन का नाम कई आतंकी घटनाओं में भी सामने आ चुका है।