अल्पसंख्यक दर्ज़ा क्यों छीन रही है मोदी सरकार, पढ़िए असली और तथ्यात्मक कारण

New delhi

प्रकाश सूचना है कि जल्द ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार मुसलमानों से अल्पसंख्यक दर्जा छीनने के लिए कोई बड़ा कदम उठाने जा रही है।

संभवत अगले साल यानी 2021 में जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होंगे, उससे पहले केंद्र सरकार इस प्रकरण को लेकर बड़ा कदम उठा सकती है।

संविधान के मुताबिक भारत में रहने वाली, कोई भी धर्म को मानने वाले 10% से अधिक आबादी होने पर स्वतः ही उनका अल्पसंख्यक दर्जा खत्म हो जाता है।

लेकिन कांग्रेस सरकारों की गलत नीतियों और गलत नियमों के कारण 15% से अधिक होने के बावजूद मुसलमान आज भी अल्पसंख्यक वर्ग में शामिल हैं, जिसके चलते उनको बड़े पैमाने पर सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलता है।

अब इन नियमों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बदलने जा रही है। आबादी के लिहाज से 2021 में देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य, यानी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होंगे।

यह चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए जीतना बेहद जरूरी है। जिसके लिए बीते 5 साल से वहां पर संघर्ष किया जा रहा है, बीजेपी के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है।

अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा छिन जाने के बाद मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे और उसके बाद केंद्र में राज्य सरकारों की बड़े पैमाने पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म हो जाएगी।

इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय पर हिंदू समाज की तरह सारे नियम लागू होंगे और कुछ मात्रा में मुस्लिम धर्म के लोग जो आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, वो भी आरक्षण से वंचित हो जाएंगे।

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बताया जा रहा है कि इसको लेकर केंद्र सरकार एक ड्राफ्ट तैयार कर रही है और सरकार संसद के माध्यम से यह कदम उठाएगी, ताकि किसी तरह का विवाद नहीं हो, अथवा याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कोई फैसला लेने का प्रयास करेगी।

सरकार अगर ऐसा करने में कामयाब होती है तो आजादी के बाद पहली बार ऐसा होगा कि देश में अल्पसंख्यक कोटे में केवल सिख, जैन, बौद्ध, क्रिश्चियन, पारसी ही शामिल रहेंगे।

बहरहाल, सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के विचार लेने के लिए एक बहस शुरू कर दी गई है, जिसमें बड़े पैमाने पर लोग इसका स्वागत कर रहे हैं।