प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi) सरकार के द्वारा दिसंबर में संसद में पारित करवाए गए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बीते दिनों देशभर में हिंसक प्रदर्शन और दंगे हुए।

जिसमें 2 दर्जन से अधिक मौतें हुईं, बावजूद इसके आज से पूरे देश में एक साथ नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू हो गया है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा नागरिकता संशोधन कानून का शुक्रवार को देर रात नोटिफिकेशन (notification) जारी कर दिया गया।

इस नोटिफिकेशन के मुताबिक संघ सूची में होने के कारण यह संशोधित कानून पूरे देश भर में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ लागू हो गया है।

गौरतलब है कि संसद में इस कानून के पास होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हुए और उसके बाद मीडिया के माध्यम से लोगों तक इसकी जानकारी पहुंची।

दूसरी तरफ कांग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने देश भर में इस कानून के खिलाफ जमकर लोगों को भड़काया।

खासतौर से मुस्लिम समुदाय के लोगों को भड़काकर जगह-जगह प्रदर्शन किए गए, आगजनी की गई, तोड़फोड़ की गई, हिंसा की गई और दंगा करने वाले लोगों के द्वारा कई बसों, कारों, स्कूटी, मोटरसाइकिल और कई जगह कई ट्रेनों को आग लगा दी गई।

पूर्वोत्तर के राज्य आसाम से शुरू हुआ यह दंगा-फसाद दिल्ली होता हुआ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैल गया।

उत्तर प्रदेश में दंगाइयों के द्वारा जब अराजकता फैलाई गई, तो वहां की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कड़ाई से उनके खिलाफ एक्शन लेने का फैसला किया।

इस दौरान कई शहरों में हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिसको नियंत्रित करने के लिए योगी सरकार की पुलिस ने गोलीबारी की। इस गोलीबारी में अकेले उत्तर प्रदेश में 19 दंगाइयों की मौत हो गई।

दूसरी तरफ दिल्ली में भी खासतौर से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों के द्वारा और वामपंथी संगठनों से जुड़े स्टूडेंट के द्वारा नागरिकता संशोधन कानून को मुस्लिम धर्म के खिलाफ बताकर प्रचारित किया गया।

करीब 1 सप्ताह तक दंगाइयों ने देश में अराजकता का माहौल कर दिया। आखिरकार केंद्र सरकार ने लोगों तक पहुंचने का फैसला किया और भारतीय जनता पार्टी ने अपने बड़े नेताओं को मैदान में उतारा।

अभी नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में देशभर में जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है।

देश के तमाम राज्यों में दंगा फसाद बंद हो गए हैं और मुस्लिम धर्म के अनुयायियों ने यह मान लिया है कि उनकी नागरिकता छीनने का इस कानून में कोई प्रावधान नहीं है।

गौरतलब यह है कि इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आ चुके हिंदू, सिख, बौद्ध, क्रिश्चियन, पारसी और जैन धर्म के धर्मावलंबियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, इन तीनों देशों से आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को नागरिकता देने में प्राथमिकता नहीं मिलेगी, किंतु जैसा की सर्वविदित है पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान धार्मिक तौर पर मुस्लिम कंट्री हैं, जिनका इस्लाम राज्य धर्म है।

ऐसी स्थिति में इन तीनों ही देशों में मुस्लिम धर्म के लोगों पर अत्याचार नहीं होते हैं। जबकि बचे हुए 6 अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर अत्याचारों के हजारों मामले सामने आ चुके हैं।

इसी को देखते हुए भारत की सरकार ने इन 6 धर्मों के लोगों को भारत की नागरिकता देने का कानून बनाया है।

अब यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है, बावजूद इसके पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस पार्टी अभी भी खिलाफत कर रहे हैं।

यह तीनों तरह के लोग और पार्टियां नागरिकता संशोधन कानून को एनआरसी से जोड़कर लोगों में अफवाह फैलाने का काम कर रही है।

दूसरी तरफ के अंदर सरकार साफ कर चुकी है कि इस कानून में किसी भी व्यक्ति की नागरिकता जीने का प्रावधान नहीं है।