Free kashmir और “हिंदुत्व से आज़ादी” वाली गैंग कौन है, जिसको कांग्रेस, आप, वामपंथी समर्थन कर रहे हैं?

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दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से शुरू हुई लड़ाई अब देश भर में फैल चुकी है न केवल देश भर में फैल चुकी है, बल्कि फ्री कश्मीर और हिंदुत्व से आजादी की भी कामनाएं की जा रही है और इन सब को समर्थन दे रहे हैं वामपंथी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्ष में बैठे हुए राजनीतिक दल।

रविवार शाम को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दो छात्र गुटों के बीच में हुआ झगड़ा दो धर्मों और दो विचारधाराओं की लड़ाई का केंद्र बन गया है। सोमवार को जिन्होंने विरोध किया, उनमें फ्री कश्मीर और हिंदुत्व से आजादी जैसे लोग भी शामिल थे?

एक तरफ जहां दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में हिंदुत्व से आजादी के नारे लगे, तो वहीं दूसरी तरफ शिवसेना की सरकार वाले महाराष्ट्र में गेटवे ऑफ इंडिया पर फ्री कश्मीर के स्लोगन लिखे हुए बैनर पोस्टर लिए छात्राएं प्रदर्शन कर रही थीं।

सवाल यह है कि एक विश्वविद्यालय में दो छात्र गुटों के बीच में हुए झगड़े को दो धर्मों के बीच या देश के टुकड़े टुकड़े होने के रूप में कैसे देखा जा सकता है, कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है?

इस बीच एम्स में भर्ती जेएनयू के वामपंथी विचारधारा के स्टूडेंट से मिलने के लिए कांग्रेस के महासचिव प्रियंका वाड्रा पहुंचीं। उन्होंने केवल वामपंथी विचारधारा के स्टूडेंट से मुलाकात की, जबकि उसी अस्पताल में एबीपी के स्टूडेंट्स भी दर्द से कराह रहे हैं, उनसे मिलने की जहमत नहीं उठाई।

यह वही प्रियंका वाड्रा हैं, जिन्होंने बीते दिनों उत्तर प्रदेश में हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई थी, उसके घर पर पहुंचने के लिए अब नहीं जी जान लगा दी थी। यहां तक कि पुलिस की महिला अधिकारियों के कोहनी तक मारी थी और अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम किया था।

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इस बीच दिल्ली में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है और ऐसा लग रहा है कि अब राजनीतिक रोटियां सेकने वाले लोगों के लिए जेएनयू नया और सबसे बड़ा अखाड़ा बनने वाला है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जेएनयू में हुए विवाद को लेकर जांच कर रही है और संभावना है कि जल्द ही बड़े खुलासे होने वाले हैं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सोमवार को एक वीडियो जारी किया है, जिसमें छात्र संघ अध्यक्ष आईसी घोष नकाबपोश छात्रों का गुंडों का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि एसएफआई ने एक लड़की का फोटो जारी किया है, जिसको एबीवीपी की छात्रा करार दिया है।

सवाल यह खड़ा होता है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जब दो छात्र गुटों की भी झगड़ा हुआ है तो इसमें हिंदुत्व धर्म से आजादी की बात कैसे सामने आए? इसके साथ ही सवाल यह भी खड़ा होता है कि गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन कर रही वह लड़कियां कौन थी, जो फ्री कश्मीर के स्लोगन लिए बैनर पोस्टर लहरा रही थी?

यह बैनर पोस्टर ने केवल हिंदुत्ववादी कही जाने वाली शिवसेना सरकार के लिए शर्म की बात है, बल्कि इसके साथ ही मुंबई पुलिस के लिए भी सिरदर्द बन गया है। क्योंकि पुलिस उन लड़कियों की पहचान कर रही है, जिन्होंने यह बैनर पोस्टर लहराए हैं।

ऐसा लग रहा है कि भारत में न केवल दो विचारधाराएं हैं, जो एक राष्ट्र की बात करती है और दूसरी विदेशी मानसिकता से पीड़ित है ऐसी स्थिति में स्टूडेंट को भी दो भागों में बांट दिया है। पक्ष और विपक्ष के चलते राजनीतिक दलों से जुड़े हुए लोग भी इन विचारधाराओं की शिकार हो रहे हैं।

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