किसान आंदोलन में शामिल 6 जनों ने बंगाल से आई एक युवती का बलात्कार किया, मरने के बाद शहीद का दर्जा देकर जीप में घुमाते रहे किसान नेता

नई दिल्ली। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाबी सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, शाहजहांपुर बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर 5 महीने से ज्यादा समय हो गया है, किसानों का आंदोलन जारी है। इन सभी जगह पर किसान लगातार धरने पर बैठे हुए हैं और तमाम हाईवे जाम किए हुए हैं।

जैसा कि लगातार सरकार समर्थक लोगों का आरोप है कि इन दिनों में किसान कम है और किसानों के नाम पर दलाली करने वाले अपराधी ज्यादा है। इसी तरह की एक भयानक तस्वीर सामने आई है टिकरी बॉर्डर से।

जानकारी में आया है कि 6 किसान आंदोलनकर्ताओं के द्वारा पश्चिम बंगाल से आई एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। बाद में युवती कोरोना संक्रमित हो गई और उसको दिल्ली के अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जिसकी 29 अप्रैल को मौत हो गई है।

खास बात यह है कि युवती के साथ हुए बलात्कार और कोरोना संक्रमित होने के बाद मौत होने पर तमाम बड़े किसान नेताओं के द्वारा उसकी डेड बॉडी को जीप में रखकर शहीद का दर्जा देकर किसान आंदोलन के धरने में घुमाया गया। इस जघन्य अपराध में दो महिलाएं भी शामिल हैं।

किसान नेताओं की बात की जाए तो योगेंद्र यादव समेत बलवीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल सिंह, गुरु मान सिंह चढूनी, हन्नान मौला, जगजीत सिंह, जोगिंदर सिंह उग्रहां, युद्धवीर सिंह और अभिमन्यु कोहाड़ को भी इसके बारे में पूरी जानकारी थी।

मृतक युवती के पिता ने आरोप लगाया है कि 8 दिन तक लगातार इन्हीं किसान नेताओं के द्वारा मामले को दबाया गया और उनको भी न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया, लेकिन जब सभी किसान नेताओं ने हाथ खड़े कर दिए, तब उन्होंने पुलिस में जा कर यह मामला बताया।

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आरोपित युवक सोशल आर्मी के नाम से एक संगठन चलाते हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब इस बात की जानकारी मिली तो उनका टेंट उखाड़ दिया गया और उनके बैनर हटा कर यहां से भगा दिया गया, लेकिन सवाल खड़ा यह होता है कि क्या एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और एक तरह से उसकी हत्या के मामले में इतनी सजा काफी है।

युवती की तबीयत खराब होने पर 26 अप्रैल को दिल्ली के पीजीआई अस्पताल ले गए, जहां पर बेड नहीं मिलने के बाद उसको बहादुरगढ़ अस्पताल ले गए, जहां पर 29 अप्रैल को उसके पिता पहुंचे और 30 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।

इन्होंने किया कुकर्म

अनिल मलिक, अंकुर सांगवान, कविता आर्य, योगिता सुहाग और एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले के लिए डीएसपी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की गई है। इस एसआईटी में सिटी, 2 इंचार्ज, सीआईए एसएचओ एक महिला एसएचओ शामिल की गई है।

मामले की जांच एसआईटी कर रही है, लेकिन कई सवाल खड़े होते हैं। जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता और स्वराज पार्टी के मुख्य होने का दावा करने वाले योगेंद्र यादव की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है। बताया जा रहा है कि योगेंद्र यादव को पूरे मामले की जानकारी थी। जब युवती के साथ बलात्कार हो रहा था, उस वक्त भी उसको जानकारी थी।

जानकारी में आया है कि युवती ने मरने से पहले एक वीडियो भी बना कर जारी किया था, जो कुछ सहयोगियों के द्वारा उसके पिता के पास भेजा गया और एक पेन ड्राइव में रखा गया है। पुलिस के द्वारा वीडियो प्राप्त कर लिया गया है और मामले की गहनता से तहकीकात की जा रही है।

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युवती का पिता भी किसान नेता है

युवती के पिता ने बताया कि वह खुद बंगाल में एक ट्रेड यूनियन के सदस्य हैं। एक अप्रैल को ही सोशल आर्मी ग्रुप के सदस्य बंगाल पहुंचे थे, जहां उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने उनकी बेटी को साथ ले लिया इसके बाद टिकरी बॉर्डर पर लाकर उसके साथ टेंट में दुष्कर्म किया गया। इतना ही नहीं, बल्कि उसको आगरा और हांसी में ले जाकर भी बलात्कार किया गया।